सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ़ एक्शन पर रोक, जांच की मांग
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ़ एक्शन लेने पर रोक लगाई है, साथ ही पुलिस की कथित ज्यादतियों की जांच की मांग की है। अदालत ने एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने पर विचार कर रही है ताकि हिंसा की घटनाओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।

सौजन्य से:- BBC
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स के ख़िलाफ़ एक्शन लेने पर लगाई रोक, और क्या-क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निर्देश दिया कि दिल्ली के जंतर-मंतर और देश के विभिन्न राज्यों में हाल में कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ कोई दंडात्मक कार्रवाई (कोएर्सिव एक्शन) न की जाए.
क़ानूनी ख़बरों और विश्लेषण की वेबसाइट लाइव लॉ के मुताबिक़, मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने विभिन्न राज्यों में पुलिस हिरासत में लिए गए नाबालिगों को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया.
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राहत उन लोगों को नहीं मिलेगी जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है.
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस की कथित ज़्यादतियों के आरोप प्रथम दृष्टया निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करते हैं.
अदालत ने संकेत दिया कि वह हिंसा की इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने पर विचार कर रही है.
केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को दिया मौक़ा
हालांकि, समिति गठित करने से पहले अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को अपना पक्ष रिकॉर्ड पर रखने का मौका दिया. अदालत ने कहा कि जिन अन्य राज्यों में हिंसा हुई है, वे भी अपना पक्ष अदालत के समक्ष रख सकते हैं.
इसके तहत अदालत ने दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया.
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि इन प्रदर्शनों से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, वायरलेस संचार और अन्य संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं.
अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों का जो डिजिटल डेटा इकट्ठा किया है उसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा.
अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया, "प्रदर्शनकारियों की कोई भी व्यक्तिगत जानकारी या पहचान संबंधी विवरण सार्वजनिक नहीं किया जाएगा."
पैलेट गन पर भी बोला सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल, इलेक्ट्रिक बैटन, लाठीचार्ज, महिला प्रदर्शनकारियों और मीडियाकर्मियों पर कथित हमले, और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों के हिंसा में शामिल होने के आरोपों का भी संज्ञान लिया.
अदालत ने कहा, "पैलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन और लाठी के इस्तेमाल से जानलेवा चोटें लगने जैसे आरोप गंभीर हैं. विशेष रूप से पैलेट गन के अत्यधिक इस्तेमाल के आरोपों की जांच की जानी चाहिए."
साथ ही, अदालत ने उन आरोपों का भी संज्ञान लिया जिनमें कहा गया है कि प्रदर्शन के दौरान 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे.
केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि सरकार को स्वतंत्र जांच कराए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है.
इसके अलावा, अदालत ने अपने आदेश में यह आरोप भी दर्ज किया कि प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था.
अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की इस दलील को भी रिकॉर्ड में दर्ज किया कि प्रदर्शन में अपराधी घुस आए थे और उन्होंने पुलिसकर्मियों को घायल किया.
इस बीच, पीठ ने कहा कि विरोध-प्रदर्शनों को लेकर अदालत के पहले के फ़ैसलों में तय किए गए दिशा-निर्देशों में बदलाव की ज़रूरत पड़ सकती है.
पीठ ने यह भी कहा कि जब इस तरह के प्रदर्शन या ऐसी परिस्थितियां पैदा हों, तो उनसे निपटने के लिए एक प्रभावी व्यवस्था सक्रिय की जानी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, "लोकतंत्र में इस तरह के आंदोलन होते रहेंगे."
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि हाल के प्रदर्शनों के दौरान कथित ज़्यादतियों की घटनाओं की गहन और पारदर्शी जांच होनी चाहिए.
हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि वह इन आरोपों की खुद जांच नहीं कर सकती इसलिए अदालत ने कहा कि इन घटनाओं की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति (हाई-पावर्ड कमेटी) गठित की जानी चाहिए.
इस मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी.
सीजेपी का दावा- 'समझौते का उल्लंघन' हो रहा है
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने प्रदर्शन ख़त्म करने के बाद सोमवार को पहली बार प्रेस कॉन्फ़्रेंस की थी. इस दौरान सीजेपी ने दावा किया कि प्रदर्शन ख़त्म होने के बाद पुलिस की ओर से स्टूडेंट्स को निशाना बनाया जा रहा है.
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास और अन्य सदस्यों ने वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के साथ मिलकर प्रेस कॉन्फ़्रेंस की है.
सीजेपी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई न करने के 'समझौते का उल्लंघन' हो रहा है.
वहीं कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके बताया कि दिल्ली और बिहार में स्टूडेंट्स को चिन्हित करके उन्हें निशाना बनाया जा रहा है.
नीट पेपर लीक मामले के बाद सीजेपी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रही थी.
बीते शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े और अन्य मांगों को मानने के बाद सीजेपी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन ख़त्म कर दिया था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
लोकसभा में डिंपल यादव का सरकार पर हमला, सांसदों के दल बदल पर कानून लाने की मांग

पुलिस पहचान का अधिकार: क्या सादे कपड़ों में पुलिस लाठीचार्ज कर सकती है?

कलकत्ता उच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण फैसला

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: छात्रों को रिहा करने और डेटा सुरक्षित रखने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: जानें कब और कैसे किशोर पर वयस्क की तरह चलेगा मुकदमा

8 राज्यों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, जांच करें बलप्रयोग की बात

सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश, डिजिटल अरेस्ट को अलग कानूनी दायरे में लाने की तैयारी

भारत की शीर्ष अदालत ने विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए नाबालिगों को रिहा करने का आदेश दिया
ताज़ा ख़बरें
- संवैधानिक नैतिकता पर सवाल: इसे कम करने से एलजीबीटीक्यू+ अधिकारों की मांग करने वाली भविष्य की मुकदमेबाजी सीमित हो सकती है
- सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनों में पुलिस कार्रवाई पर जताई चिंता, निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर
- केंद्रीय मंत्री भगीरथ चौधरी को लौटानी पड़ी 99 लाख की सब्सिडी
- AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने एंटी-पेपर लीक कानून की आलोचना की, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को खत्म करने की मांग
- पेपर लीक पर सख्ती: नए कानून में क्या है खास, कितनी मिलेगी सजा?
- पेपर लीक मामलों पर राठौड़ का वार
- नीट पेपर लीक पर भी अब होगी सख्त सजा, केंद्र सरकार ने लोकसभा में पेश किया संशोधित नियम
- सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, छात्र प्रदर्शन पर पुलिस को कहा, 'शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हक़ नहीं छीन सकती'

