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पेपर लीक पर सख्ती: नए कानून में क्या है खास, कितनी मिलेगी सजा?

पेपर लीक रोकने के लिए सरकार ने नया बिल पेश किया है, जिसमें सजा और जुर्माने की रकम बढ़ाई गई है। नए बिल में जांच और ट्रायल को लेकर सख्त नियम जोड़े गए हैं।

28 जुलाई 2026 को 12:53 pm बजे
पेपर लीक पर सख्ती: नए कानून में क्या है खास, कितनी मिलेगी सजा?

सौजन्य से:- Hindustan

Explainer: पेपर लीक रोकने वाला नया बिल पुराने कानून से कितना अलग? जानिए बड़े बदलाव और सख्त नियम

संसद में पेश हुआ पब्लिक एग्जामिनेशन अमेंडमेंट बिल 2026। जानिए 2024 के कानून में क्या बदला, अब पेपर लीक पर कितनी मिलेगी सजा और जुर्माना, फास्ट ट्रैक कोर्ट से कैसे होगी सुनवाई। पूरी खबर पढ़ें।

नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के कई मामले सामने आए हैं। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। सोमवार को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' पेश किया।

इस नए संशोधन बिल को मोदी कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद मॉनसून सत्र में लाया गया है। इसे सीधे तौर पर 'एंटी-पेपर लीक बिल 2026' कहा जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य 2024 में बने पुराने कानून की खामियों को दूर करना और पेपर लीक सिंडिकेट्स, परीक्षा कराने वाली एजेंसियों और धांधली करने वालों के खिलाफ कड़े सजा के प्रावधान लागू करना है। आइए समझते हैं कि पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2024 (पुराने बिल) और संशोधित बिल 2026 में क्या अहम बदलाव किए गए हैं।

पुराने बिल (2024) और नए बिल (2026) में क्या है अंतर?

सरकार ने सजा और जुर्माने की रकम को कई गुना बढ़ा दिया है। यहां देखिए पुराना कानून और नया कानून कैसे अलग हैं-

नए बिल 2026 की अन्य सबसे बड़ी खासियतें

सजा बढ़ाने के अलावा इस बिल में जांच और ट्रायल (अदालती कार्यवाही) को लेकर बहुत सख्त नियम जोड़े गए हैं, ताकि अपराधी सालों तक कोर्ट-कचहरी का फायदा उठाकर बच न सकें-

60 दिन में जांच पूरी करना अनिवार्य। नए बिल में सबसे बड़ा प्रावधान यह है कि अब पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसी या स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को पेपर लीक मामले की जांच हर हाल में 60 दिन (2 महीने) के भीतर पूरी करनी होगी।

स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट। राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को हाई कोर्ट के साथ मिलकर पेपर लीक मामलों के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने होंगे। इन अदालतों में हर दिन सुनवाई होगी और चार्जशीट दायर होने के महज 3 महीने के भीतर ट्रायल पूरा करना होगा।

स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन। अंतरराज्यीय पेपर लीक गिरोहों और संगठित माफियाओं को पकड़ने के लिए केंद्र सरकार के पास एक स्पेशल टास्क फोर्स (STF) बनाने का अधिकार होगा।

3 महीने में अपील का निपटारा। अगर कोई फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करता है, तो हाई कोर्ट की दो जजों की बेंच को भी उस अपील का निपटारा ज्यादा से ज्यादा 3 महीने के भीतर करना होगा।

इसकी जरूरत क्यों पड़ी?

हाल ही में NEET-UG और UGC-NET जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक के मामलों ने पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए थे। लाखों छात्रों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया था। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने और इन परीक्षाओं में ईमानदारी वापस लाने के लिए ही केंद्र सरकार यह सख्त 'एंटी-पेपर लीक बिल' लेकर आई है।

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लेखक के बारे में

Amit Kumarडिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे 'क्यों' और 'कैसे' को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव 'फैक्ट-चेकिंग' और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।

अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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