AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने एंटी-पेपर लीक कानून की आलोचना की, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को खत्म करने की मांग
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने मंगलवार को प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार हो रहे पेपर लीक को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि मौजूदा एंटी-पेपर लीक कानून बिना दम का है. उन्होंने नई शिक्षा नीति (NEP) की भी आलोचना की और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को खत्म करने की मांग की.

सौजन्य से:- ThePrint Hindi
नई दिल्ली: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने मंगलवार को प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार हो रहे पेपर लीक को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि मौजूदा एंटी-पेपर लीक कानून “बिना दम का” है और यह व्यवस्था की असली समस्याओं को हल नहीं करता.
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए नेहा बोरा ने कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को खत्म किया जाना चाहिए, या फिर उसके पूरे ढांचे में कानूनी बदलाव कर उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए.
उन्होंने नई शिक्षा नीति (NEP) की भी आलोचना की. उनका आरोप था कि NEP के जरिए मेडिकल, इंजीनियरिंग और विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षाओं का देशभर में केंद्रीकरण किया गया, जिससे पेपर लीक की संभावना और बढ़ गई.
उन्होंने कहा, “अगर सच में इस समस्या को खत्म करना है, तो NTA जैसी संस्था को खत्म किया जाना चाहिए. अगर ऐसा नहीं करना चाहते, तो संसद के कानून के जरिए इसे वैधानिक संस्था बनाया जाए, ताकि इसकी जवाबदेही तय हो सके.”
उन्होंने आगे कहा, “इनमें से कुछ भी नहीं किया गया. सरकार ने आसान रास्ता चुना. यह ऐसा है जैसे पूरे पेपर लीक सिस्टम को बिना दम वाले कानून से रोकने की कोशिश की जा रही हो.”
नेहा बोरा ने कहा कि सिर्फ सजा बढ़ा देने से समस्या खत्म नहीं होगी. उन्होंने कहा कि तीन साल की सजा को पांच साल और 1 करोड़ रुपये के जुर्माने को 5 करोड़ रुपये कर देना सिर्फ संख्या बढ़ाना है, इससे पेपर लीक अपने आप बंद नहीं हो जाएगा.
उन्होंने कहा, “हम इसे बिना दम का कानून इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इसमें किए गए सभी बदलाव सिर्फ संख्या बढ़ाने वाले हैं. जहां तीन साल की सजा थी, उसे पांच साल कर दिया गया. जहां 1 करोड़ रुपये का जुर्माना था, उसे 5 करोड़ रुपये कर दिया गया. क्या सिर्फ सजा बढ़ाने से पेपर लीक रुक जाएगा?”
नेहा बोरा ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह सिर्फ यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि वह सख्त कार्रवाई कर रही है, जबकि जमीन पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा.
उन्होंने कहा, “हम समझते हैं कि सरकार ऐसा दिखाना चाहती है कि वह बहुत कुछ कर रही है, लेकिन वास्तव में कुछ नहीं कर रही. इसलिए पेपर लीक का पूरा नेटवर्क ज्यों का त्यों बना रहेगा.”
गौरतलब है कि नेहा बोरा ने कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ जंतर-मंतर पर हुए 37 दिन के छात्र आंदोलन के दौरान 23 दिन तक भूख हड़ताल की थी. इस आंदोलन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी.
शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने “छात्रों के हित में” और परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर चल रहे आंदोलन का “राष्ट्रविरोधी ताकतों द्वारा फायदा न उठाया जाए” यह कहते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.
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