सुप्रीम कोर्ट में हंगामे की निंदा
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने अदालत में हुए हंगामे की कड़ी निंदा की है और अदालत की गरिमा बनाए रखने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने की मांग की है। एसोसिएशन ने कहा कि अदालत की कार्यवाही में बाधा डालने और अपमान करने का कोई भी प्रयास अस्वीकार्य है।

सौजन्य से:- Live Law Hindi
सुप्रीम कोर्ट में हंगामे की घटना की SCBA ने की निंदा, अदालत की कार्यवाही के वीडियो प्रसार पर दिशा-निर्देश बनाने की मांग
Amir Ahmad
11 July 2026 4:24 PM IST
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने सुप्रीम कोर्ट की एक अदालत में सुनवाई के दौरान एक पक्षकार द्वारा कथित रूप से अभद्र व्यवहार, कागजात फेंकने और हंगामा करने की घटना की कड़ी निंदा की है। एसोसिएशन ने कहा कि अदालत की गरिमा और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान हर हाल में बनाए रखा जाना चाहिए।
यह घटना जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान हुई थी।
SCBA ने जारी बयान में कहा कि अदालत के भीतर कथित रूप से किया गया यह व्यवहार अपमानजनक और न्यायालय की गरिमा के प्रतिकूल है।
एसोसिएशन ने कहा,
"अदालत की गरिमा और प्रतिष्ठा का हर समय सम्मान किया जाना चाहिए। न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालने, अदालत का अपमान करने या धमकाने का कोई भी प्रयास पूरी तरह अस्वीकार्य है। ऐसा आचरण न्याय व्यवस्था की नींव पर प्रहार करता है और उससे कानून के अनुसार सख्ती से निपटा जाना चाहिए।"
SCBA ने न्यायालय की कार्यवाही की पवित्रता बनाए रखने पर जोर देते हुए अदालत की रिकॉर्डिंग, वीडियो क्लिप बनाने, संपादन और प्रसार को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने की मांग की।
एसोसिएशन का कहना है कि ऐसे दिशा-निर्देश इसलिए आवश्यक हैं ताकि अदालत की रिकॉर्डिंग का दुरुपयोग रोका जा सके और न्यायपालिका की गरिमा तथा न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित न हो।
SCBA ने केंद्र सरकार से भी आग्रह किया कि वह ऐसे वीडियो या संपादित क्लिप के प्रसार पर रोक लगाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी उपायों पर विचार करे, जिनका इस्तेमाल न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने या जनता का विश्वास कमजोर करने के उद्देश्य से किया जाता है।
उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को सुनवाई के दौरान एक पक्षकार ने अदालत कक्ष में कागजात फेंक दिए और कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए हंगामा किया था। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित व्यक्ति की मानसिक स्थिति को देखते हुए उसके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने से इनकार कर दिया।
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