समय पर चार्जशीट दाखिल होने पर डिफॉल्ट बेल अधिकार समाप्त
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि जांच एजेंसी समय पर चार्जशीट दाखिल कर देती है, तो आरोपी को डिफॉल्ट बेल का अधिकार नहीं मिलेगा

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि जांच एजेंसी कानून द्वारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर देती है, तो केवल इस आधार पर कि उसकी प्रति आरोपी को बाद में मिली या अतिरिक्त प्रतियां समय पर उपलब्ध नहीं कराई गईं, आरोपी को डिफॉल्ट बेल का अधिकार प्राप्त नहीं होगा। सूत्र: समय पर चार्जशीट दाखिल होने पर डिफॉल्ट बेल का अधिकार समाप्त, सुप्रीम कोर्ट ने किया कानून स्पष्ट
न्यायालय ने कहा कि डिफॉल्ट बेल का उद्देश्य जांच एजेंसी को निर्धारित समय के भीतर जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल करने के लिए बाध्य करना है। यदि चार्जशीट समय-सीमा के भीतर दाखिल कर दी जाती है, तो डिफॉल्ट बेल का वैधानिक अधिकार समाप्त हो जाता है। चार्जशीट की प्रति उपलब्ध कराने में हुई देरी एक प्रक्रियात्मक पहलू हो सकता है, लेकिन इससे डिफॉल्ट बेल का अधिकार स्वतः उत्पन्न नहीं होता।
इस फैसले का असर
इस निर्णय से आपराधिक मामलों में डिफॉल्ट बेल संबंधी कानूनी स्थिति और अधिक स्पष्ट हो गई है। अब यह सिद्धांत दोहराया गया है कि यदि जांच एजेंसी ने वैधानिक समय-सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी है, तो आरोपी केवल इस आधार पर डिफॉल्ट बेल का दावा नहीं कर सकता कि उसे चार्जशीट की प्रति बाद में प्राप्त हुई। यह फैसला उन आरोपियों को प्रभावित करेगा जो समय पर चार्जशीट दाखिल होने पर डिफॉल्ट बेल का दावा करना चाहते हैं।
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