समय पर चार्जशीट दाखिल होने पर डिफॉल्ट बेल अधिकार समाप्त
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि जांच एजेंसी समय पर चार्जशीट दाखिल कर देती है, तो आरोपी को डिफॉल्ट बेल का अधिकार नहीं मिलेगा

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि जांच एजेंसी कानून द्वारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर देती है, तो केवल इस आधार पर कि उसकी प्रति आरोपी को बाद में मिली या अतिरिक्त प्रतियां समय पर उपलब्ध नहीं कराई गईं, आरोपी को डिफॉल्ट बेल का अधिकार प्राप्त नहीं होगा। सूत्र: समय पर चार्जशीट दाखिल होने पर डिफॉल्ट बेल का अधिकार समाप्त, सुप्रीम कोर्ट ने किया कानून स्पष्ट
न्यायालय ने कहा कि डिफॉल्ट बेल का उद्देश्य जांच एजेंसी को निर्धारित समय के भीतर जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल करने के लिए बाध्य करना है। यदि चार्जशीट समय-सीमा के भीतर दाखिल कर दी जाती है, तो डिफॉल्ट बेल का वैधानिक अधिकार समाप्त हो जाता है। चार्जशीट की प्रति उपलब्ध कराने में हुई देरी एक प्रक्रियात्मक पहलू हो सकता है, लेकिन इससे डिफॉल्ट बेल का अधिकार स्वतः उत्पन्न नहीं होता।
इस फैसले का असर
इस निर्णय से आपराधिक मामलों में डिफॉल्ट बेल संबंधी कानूनी स्थिति और अधिक स्पष्ट हो गई है। अब यह सिद्धांत दोहराया गया है कि यदि जांच एजेंसी ने वैधानिक समय-सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी है, तो आरोपी केवल इस आधार पर डिफॉल्ट बेल का दावा नहीं कर सकता कि उसे चार्जशीट की प्रति बाद में प्राप्त हुई। यह फैसला उन आरोपियों को प्रभावित करेगा जो समय पर चार्जशीट दाखिल होने पर डिफॉल्ट बेल का दावा करना चाहते हैं।
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट: बरी करने का आदेश तभी उलटा जा सकता है जब ट्रायल कोर्ट का दृष्टिकोण विकृत हो

सुप्रीम कोर्ट ने डीएलएफ प्राइमस में ब्रोशर‑उल्लेखित योजना के उल्लंघन पर सीबीआई को प्रारम्भिक जांच का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों पर हिंसा करने वाले राजनेताओं को तुरन्त हिरासत में रखने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ में अवैध इमारतों की धीमी सीलिंग पर कड़ी नाराज़गी जताई

सुप्रीम कोर्ट ने डीएलएफ प्राइमस में ब्रोशर के अनुसार निर्माण का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट की टीम ने लखनऊ में 51 अवैध व्यावसायिक निर्माणों का सर्वे किया

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफ़ारिश पर केंद्र ने 8 हाईकोर्ट में नए चीफ जस्टिस नियुक्त किये

सुप्रीम कोर्ट को HPC की अनुपालन रिपोर्ट: अरावली की सीमा 100 मीटर ऊंचाई से नहीं, इकोसिस्टम‑आधारित निर्धारण होगा
ताज़ा ख़बरें
- बारिश की बूँदों में भी शास्त्रीनगर की महिलाओं ने धरना नहीं छोड़ा, 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय
- 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत: ट्रैफिक जुर्माना, बिजली‑पानी के बिल सहित कई मुद्दों का त्वरित निपटारा
- बारिश में भी शास्त्रीनगर की महिलाएँ धरना देती रहीं, 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय
- भारत‑रूस ने न्यायिक सहयोग को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई
- अरावली संरक्षण में नई मांग: सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने रिपोर्ट का समय 28 फ़रवरी 2027 तक बढ़ाने की याचिका दायर की
- सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की रिपोर्ट न जमा करने पर कड़ा इशारा किया
- सुप्रीम कोर्ट ने एनएसई के ‘अनुचित पहुंच’ विवाद में नियामक की याचिका खारिज की
- सुप्रीम कोर्ट ने थाने में जब्त गाड़ियों को जर्जर होने से पहले मालिकों को लौटाने का निर्देश दिया

