सुप्रीम कोर्ट की पार्श्वनाथ डेवलपर्स को चेतावनी: एक सप्ताह में बकाया जमा करो, नहीं तो जेल
सुप्रीम कोर्ट ने पार्श्वनाथ डेवलपर्स को एक सप्ताह का समय दिया है बकाया राशि जमा करने के लिए, नहीं तो कंपनी के जिम्मेदार लोगों को जेल भेजा जाएगा। अदालत ने कंपनी और उसके निदेशकों पर कड़ी टिप्पणी भी की।

सौजन्य से:- Amar Ujala
SC Update: अदालत की पार्श्वनाथ डेवलपर्स को अंतिम मोहलत, कहा- एक हफ्ते में बकाया जमा करें, नहीं तो अगला कदम जेल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने कहा कि अगर कंपनी ने तय समय में आदेश का पालन नहीं किया तो उसके जिम्मेदार लोगों को जेल भेजा जाएगा। अदालत ने कंपनी और उसके निदेशकों पर कड़ी टिप्पणी भी की।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, "इन्होंने पूरे देश को ठगा है। अगर आप (रियल एस्टेट कंपनी और उसके निदेशक) एक सप्ताह के भीतर आदेश का पालन नहीं करते हैं तो आपको जेल भेज दिया जाएगा। ये पूरी व्यवस्था का मजाक बना रहे हैं।" उन्होंने कहा, "यूनिटेक के निदेशकों के साथ जो हुआ था, वही इनके (पार्श्वनाथ डेवलपर्स) साथ भी होगा। पूरी व्यवस्था पर कब्जा कर लिया गया है।"
यह मामला रीटा टिक्कू और लोकेश टिक्कू की याचिका से जुड़ा है। कैंसर से उबर चुकीं रीटा टिक्कू और उनके परिवार ने गुरुग्राम के सेक्टर-53 स्थित 'पार्श्वनाथ एक्सोटिका' परियोजना में अपनी जीवनभर की जमा पूंजी निवेश की थी। पीठ ने कहा, "वे हरियाणा रेरा के आदेशों का पालन न करने का कारण बताएं। गैर-जमानती वारंट लागू करने से पहले हम बिल्डर को अंतिम अवसर दे रहे हैं कि वह एक सप्ताह के भीतर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित पूरी वसूली योग्य राशि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करे।" अदालत ने आदेश दिया कि मामले की अगली सुनवाई अगले सोमवार को होगी।
सुधार की संभावना को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म के दोषी की सजा घटाई, उम्रकैद की जगह 20 साल की जेल
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वर्ष 2016 के सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति की सजा प्राकृतिक जीवन के शेष हिस्से तक के कठोर कारावास से घटाकर 20 वर्ष कर दी। अदालत ने कहा कि अपराध के समय दोषी की उम्र केवल 25 वर्ष थी और उसके सुधार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि दोषी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और जेल में उसका आचरण भी अच्छा रहा है।
पीठ ने कहा, "इस मामले में दोषी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। अपराध के समय उसकी उम्र केवल 25 वर्ष थी। कम उम्र होने के कारण उसके सुधार की संभावना है।" अदालत ने कहा, "राज्य सरकार ने ऐसा कोई रिकॉर्ड पेश नहीं किया है जिससे यह साबित हो कि उसका सुधार संभव नहीं है। न ही उसने दोषी की ओर से किए गए इस दावे का खंडन किया है कि लगभग 10 वर्षों (रिमिशन सहित) के दौरान जेल में उसका आचरण अच्छा रहा है।"
पीठ ने सुनवाई के दौरान की क्या टिप्पणी?
निचली अदालत ने दोषी को जीवन के शेष प्राकृतिक काल तक कठोर कारावास की सजा सुनाई थी और पीड़िता को 25 हजार रुपये जुर्माना देने का भी आदेश दिया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकता कि यह जघन्य अपराध है, जो केवल पीड़िता ही नहीं बल्कि पूरे समाज के खिलाफ है। पीठ ने कहा, "सामाजिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर पितृसत्तात्मक सोच से बाहर निकलने की दिशा में काफी बदलाव आने के बावजूद ऐसी घटनाएं बिना किसी झिझक के लगातार हो रही हैं।"
अदालत ने कहा कि समय-समय पर कानून में कई संशोधन किए गए हैं। इनका कुछ सकारात्मक असर भी पड़ा है, लेकिन जब तक ऐसी घटनाएं केवल इतिहास का हिस्सा नहीं बन जातीं और समाज उन्हें पूरी तरह अस्वीकार नहीं करता, तब तक ऐसे अपराधों को खत्म करने की जरूरत कम नहीं आंकी जा सकती। पीठ ने न्यायमूर्ति के. रामास्वामी की टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था, "सजा तय करने की प्रक्रिया में जहां सख्ती जरूरी हो, वहां सख्त रहें और जहां दया की गुंजाइश हो, वहां दया भी बरती जानी चाहिए।"
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने रिक्शा चालक को 20 साल की सजा सुनाई, टोक दी उम्रकैद!

दिल्ली उच्च न्यायालय ने टेलीग्राम प्रतिबंध को स्वीकार किया, डिजिटल अधिकारों और सुरक्षा के बीच संतुलन पर कायम रखा

राम मंदिर चोरी का राजनीतिकरण न करें: SC ने याचिकाकर्ताओं को चेतावनी दी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- रेप के लिए सख्त सजा के बाद भी कोई कमी नहीं, अपराधी को दंडित करने के तीन उद्देश्य होते हैं

पलक्कड़ जुड़वां हत्याकांड: केरल कोर्ट का निर्णय, चेंथमरा को मौत की सजा

सुधरने की गुंजाईश, सुप्रीम कोर्ट ने 20 साल की सजा में कैदी को मिला फायदा, 25 साल का था जब मिली थी उम्रकैद

सुप्रीम कोर्ट: गैरेज से चलते लॉ कॉलेजों की मान्यता चिंताजनक

लाइव लॉ डेली: सुप्रीम कोर्ट की बड़ी फैसले, अभिषेक पोरेल निरोध आदेश और अस्पताल स्थानांतरण याचिका पर अपडेट
ताज़ा ख़बरें
- अपने आप पर भरोसा करने का जादू! दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद से मिली बड़ी राहत
- मध्य प्रदेश में बड़ा कदम, UCC का राज्य में लागू होगा, CM ने कहा, 'राम-रहीम-रॉबिन सबके लिए एक समान कानून'
- UCC या समान नागरिक संहिता : क्यों नहीं मिलेगी अनुसूचित जनजाति को छूट?
- कुछ राज्यों ने विशेष एनआईए अदालतों की स्थापना को प्रभावी कदम नहीं उठाए: सुप्रीम कोर्ट
- दिल्ली दंगा मामले में देवांगना कलिता को अविश्वसनीय दस्तावेजों का निरीक्षण करने की अनुमति देने वाले उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी गई
- अदालत ने आरोपी की मानसिक जांच का दिया आदेश, जमानत देने से किया इनकार
- सुप्रीम कोर्ट ने चेताया राम मंदिर चंदा चोरी केस का राजनीतिकरण नहीं होने देंगे
- वियतनाम में प्रकाशन कानून को संशोधित करने का प्रस्ताव

