कुछ राज्यों ने विशेष एनआईए अदालतों की स्थापना को प्रभावी कदम नहीं उठाए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कुछ राज्यों द्वारा गंभीर अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष एनआईए अदालतें स्थापित न करने पर अफसोस व्यक्त किया है। अदालत ने एक महीने के भीतर इन अदालतों की स्थापना करने का निर्देश दिया है।

सौजन्य से:- Jagran
कुछ राज्यों ने विशेष NIA कोर्ट की स्थापना को प्रभावी कदम नहीं उठाए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कुछ राज्यों द्वारा गंभीर अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष एनआईए अदालतें स्थापित न करने पर अफसोस जताया है। ...और पढ़ें
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने विशेष एनआईए अदालतें न होने पर अफसोस जताया।
- जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, हरियाणा में अदालतों की कमी।
- न्यायालय ने एक महीने में विशेष अदालतें स्थापित करने का निर्देश दिया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस बात अफसोस व्यक्त किया कुछ राज्यों ने गंभीर अपराधों की सुनवाई के लिए एनआईए की विशेष अदालतें स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और वी. मोहना की पीठ ने कहा कि न्यायिक बुनियादी ढांचे में प्रगति के दावों के बावजूद जमीनी हकीकत निराशाजनक बनी हुई है।
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा- "हमने पाया है कि कुछ राज्यों में विशेष एनआईए अदालतों की स्थापना के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सिर्फ एक अदालत की स्थापना ऐसे लंबित मामलों के बोझ से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है।"
शीर्ष अदालत ने स्वत: संज्ञान लेते हुए पाया कि एनआईए से जुड़े मुकदमे, जिनमें अक्सर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत आरोप होते हैं, वर्षों से लंबित पड़े हैं और इससे आरोपितों और पीड़ितों दोनों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को बताया कि इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और अब तक 14 विशेष एनआईए अदालतें स्थापित की जा चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि झारखंड में एनआइए के 27 मामले लंबित हैं और वहां सात एनआईए अदालतें मौजूद हैं। हालांकि, प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि केवल अदालतों का नामकरण करना ही पर्याप्त नहीं है।
पीठ ने पंजाब और हरियाणा की स्थिति की भी समीक्षा की, जहां एनआईए के 32 मामले लंबित हैं, लेकिन केवल एक एनआईए अदालत है। न्यायालय ने निर्देश दिया कि विशेष अदालतों की स्थापना एक महीने के भीतर की जाए। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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