'क्रीमी लेयर' का नियम SC-ST आरक्षण पर नहीं लागू होगा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि SC-ST कोटे में 'क्रीमी लेयर' का प्रयोग नहीं किया जाएगा। यह नियम OBC वर्ग के लिए होता है, जहां आर्थिक और सामाजिक रूप से सफल लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है। SC-ST वर्गों को सामाजिक बहिष्कार, जातिगत भेदभाव और ऐतिहासिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है और उनके लिए आरक्षण का आधार सामाजिक न्याय है।

सौजन्य से:- navbharattimes.indiatimes.com
SC-ST आरक्षण पर बड़ा संवैधानिक सवाल
'क्रीमी लेयर' का प्रयोग OBC समुदाय के उस तबके के लिए होता है, जो आर्थिक और सामाजिक रूप से समृद्ध हो चुका है। इस तबके को OBC आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला रमाशंकर प्रजापति और अश्विनी उपाध्याय की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं की मांग है कि SC और STआरक्षण से भी 'क्रीमी लेयर' को बाहर किया जाए। ऐसा न करना संविधान के समानता के अधिकार सहित अन्य मूल अधिकारों का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा था।SC/ST वर्गों को सामाजिक बहिष्कार, जातिगत भेदभाव और ऐतिहासिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। उनके लिए आरक्षण का आधार आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय है। यह भेदभाव इनकी आय या बेहतर आर्थिक स्थिति से समाप्त नही हो जाता।
कोर्ट को बदलाव का अधिकार नहीं: केंद्र केंद्र सरकार ने कहा कि SC/ST सूची में बदलाव संसद ही कर सकती है। न तो राज्य, न कोर्ट, न अन्य प्राधिकरण इन सूचियों में बदलाव का अधिकार रखता है। न्यायिक आदेश से आरक्षण की संरचना में बदलाव की मांग संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप नही है। याचिकाकर्ता ने कहा कि जिन्हें SC-ST कोटे का लाभ मिल गया, जिनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति बेहतर हो चुकी है, उन्हें इसका लाभ नही मिलना चाहिए।
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