भारत में अमेरिकी नियमों का पालन नहीं, मेटा को दी सरकार की दो-टूक
केंद्र सरकार ने मेटा और अन्य टेक कंपनियों को स्पष्ट किया है कि भारत में अमेरिकी कानूनों के अनुसार नहीं चला जा सकता। सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारतीय समाज और कानूनों के प्रति जवाबदेही बनानी होगी।

सौजन्य से:- Aaj Tak News
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भारत सरकार ने मेटा और बाकी टेक कंपनियों को लेकर अपना रुख और सख्त कर लिया है. केंद्र सरकार ने Meta को साफ शब्दों में कहा है कि भारत में कोई भी डिजिटल प्लेटफॉर्म अमेरिकी कानूनों के हिसाब से नहीं चलाया जा सकता.
सरकार का मानना है कि बाकी सभी संस्थाओं की तरह इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भी भारतीय समाज और यहां के कानूनों के प्रति पूरी जवाबदेही बनती है.
सरकारी सूत्रों ने बताया कि ये पूरी तरह से तकनीकी मामला है और इसके हर पहलू को गहराई से समझना जरूरी है. मेटा और सरकार के अधिकारियों के बीच हुई बैठकों में टेक्निकल डिटेल्स और डेटा लॉग्स पर भी विस्तार से चर्चा की गई.
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भरोसा बनाए रखने पर जोर
सूत्रों ने बताया कि संविधान का आर्टिकल 19 अभिव्यक्ति की आजादी देता है, लेकिन साथ ही ये तर्कसंगत पाबंदियों का भी प्रावधान करता है. इसी तरह रोजगार से जुड़े अधिकारों पर भी नियम लागू होते हैं. भारत सरकार का मानना है कि समाज विश्वास पर चलता है, इसलिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को इस भरोसे को हर हाल में बनाए रखना होगा.
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बैठक के दौरान सरकार ने इंटरनेट पर डीपफेक कंटेंट की क्वालिटी में आए सुधार पर भी गंभीर चिंता जताई. सरकार ने बताया कि मेटा के अलावा 'एक्स' और टेलीग्राम जैसे सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ भी इन मामलों को लेकर लगातार बातचीत चल रही है.
वहीं, दूसरी तरफ मेटा के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग ने अपने प्लेटफॉर्म पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटीरियल (CSAM), डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म रेगुलेशन में हुई गड़बड़ियों को लेकर माफी मांगी है. मेटा ने माना है कि उसके प्लेटफॉर्म पर कई अवैध कंटेंट को बढ़ावा दिया गया था और एक खास कम्युनिटी तक पहुंच बनाने के लिए पैसे लेकर कंटेंट को बूस्ट किया है.
यह भी पढ़ें: डीपफेक कंटेंट को लेकर मेटा सीईओ मार्क जकरबर्ग ने मांगी माफी
मेटा को 'सेफ हार्बर' का फायदा नहीं मिलेगा
इसके साथ ही अधिकारियों ने मेटा को साफ कर दिया है कि वो अब सूचना प्रौद्योगिकी एक्ट के तहत 'इंटरमीडियरी' के दायरे में नहीं आते, क्योंकि वो खुद तय करते हैं कि कंटेंट किसे दिखेगा. इसलिए उन्हें IT एक्ट के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा यानी 'सेफ हार्बर' का फायदा नहीं दिया जा सकता.
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