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सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को फटकारा, बोले- जमानत के बाद भी मुकदमों की सुनवाई में तेजी नहीं लाई

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को जमानत का विरोध करते हुए भी मुकदमों की सुनवाई में तेजी नहीं लाने के लिए फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि राज्य में ट्रायल जल्द पूरा कराने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

11 जुलाई 2026 को 03:13 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को फटकारा, बोले- जमानत के बाद भी मुकदमों की सुनवाई में तेजी नहीं लाई

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र सरकार से बोला-आपको पब्लिक में बेनकाब करेंगे:मुकदमों की सुनवाई में तेजी नहीं लाने पर फटकारा, विदेशी नागरिक की जमानत का मामला

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सुप्रीम कोर्ट ने जमानत का विरोध करने, लेकिन मुकदमों की सुनवाई में तेजी नहीं लाने पर महाराष्ट्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार हर मामले में जमानत का विरोध करती है, लेकिन ट्रायल जल्द पूरा कराने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाती। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर यही स्थिति रही तो वह सरकार को पब्लिक में बेनकाब करेगा।

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की बेंच एक विदेशी नागरिक की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आरोपी अपहरण और हत्या के मामले में गिरफ्तार है। उसने कोर्ट को बताया कि वह पिछले चार साल से जेल में है और इस दौरान उसका मामला ट्रायल कोर्ट में 86 बार लिस्ट हुआ, लेकिन उसे 53 बार कोर्ट में पेश ही नहीं किया गया।

चार साल में सिर्फ दो गवाहों की गवाही

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी को ट्रायल कोर्ट में पेश नहीं करना महाराष्ट्र सरकार की गंभीर चूक है। अदालत ने कहा कि चार साल में 34 में से सिर्फ दो गवाहों की गवाही हो पाई है। यह स्थिति परेशान करने वाली है।

महाराष्ट्र ने कहा- अब हर तारीख पर पेश किए जा रहे आरोपी

महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि अब राज्य सभी आरोपियों को हर सुनवाई की तारीख पर ट्रायल कोर्ट में पेश कर रहा है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों को मुकदमों की सुनवाई तेज करने के लिए स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि हर सप्ताह कम से कम चार गवाहों की गवाही दर्ज की जाए और इस आदेश को रिकॉर्ड पर रखा जाए।

बेंच ने यह भी कहा कि अगर भविष्य में इस तरह के मामले अदालत के सामने आए तो ऐसे ही कड़े आदेश पारित किए जाएंगे।

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया कि तय फुटपाथ पर चलने का अधिकार एक बुनियादी अधिकार है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और एएस चंदुरकर की बेंच ने एक अहम फैसले में कहा कि तय रास्तों पर मोटर गाड़ियों के मुकाबले इस अधिकार को प्राथमिकता दी जाएगी। पढ़ें पूरी खबर…

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