लंबी कैद की रिमिशन पर जल्द फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने लंबे समय से जेल में बंद कैदियों की रिमिशन याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि सक्षम अधिकारी ऐसी अर्जियों का निपटारा तीन महीने में करें।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट ने लंबे समय से जेल में बंद कैदियों की रिमिशन याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि सक्षम अधिकारी ऐसी अर्जियों का निपटारा तीन महीने में करें।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि लंबे समय से जेल में बंद कैदियों की समय से पहले रिहाई में या सजा में छूट की याचिकाओं पर सक्षम अधिकारियों को बिना अनावश्यक देरी के फैसला करना होगा। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया है कि ऐसी अर्जियों पर मौजूदा रिमिशन नीति और कानून के प्रावधानों के अनुसार जल्द कार्रवाई जरूरी है।
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने कहा कि लंबे समय से सजा काट रहे कैदियों की सजा कम करने (रिमिशन) याचिकाओं पर तेजी से कार्रवाई करनी चाहिए। बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के पहले के स्वत: संज्ञान आदेश का हवाला देते हुए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की।
क्या है मामला?
यह मामला डकैती के एक केस में उम्रकैद की सजा पाए दो दोषियों मोहन बाबू और पलानी की अपील से जुड़ा था। सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई 2026 के अपने फैसले में उनकी सजा और दोषसिद्धि में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। लेकिन जेल में बिताए लंबे समय को देखते हुए उन्हें रिमिशन के लिए आवेदन करने की अनुमति दे दी।
दोनों दोषियों को साल 2006 में तमिलनाडु के तिंडिवनम स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय (फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर-2) ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ उनकी अपील को मद्रास हाईकोर्ट ने 2 जुलाई 2008 को खारिज कर दिया था।
'ट्रायल कोर्ट के फैसले में दखल का कोई आधार नहीं'
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने का कोई आधार नहीं है। हालांकि, अदालत ने माना कि दोनों कैदियों ने जेल में लंबा समय बिताया है। मोहन बाबू 14 साल से अधिक और पलानी 20 साल से ज्यादा समय जेल में बिता चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
पीठ ने 18 फरवरी 2025 के अपने स्वत: संज्ञान मामले के आदेश का हवाला देते हुए निर्देश दिया कि यदि दोनों दोषी रिमिशन के लिए आवेदन करते हैं या उनकी अर्जियां पहले से लंबित हैं। तो फिर संबंधित अधिकारियों को कानून के अनुसार तीन महीने के भीतर फैसला लेना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि रिमिशन पर विचार करते समय मौजूदा अपील खारिज होने के फैसले को आधार नहीं बनाया जाएगा।
मोहन बाबू के मामले में अदालत ने उन्हें पहले मिली अंतरिम जमानत को जारी रखने का आदेश दिया है, जब तक कि रिमिशन आवेदन पर फैसला नहीं हो जाता। वहीं, पलानी को निर्देश दिया गया कि अगर वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं तो उन्हें ट्रायल कोर्ट की शर्तों के अनुसार अंतरिम जमानत दी जाए। यह जमानत भी रिमिशन आवेदन पर फैसला होने तक जारी रहेगी।
लेखक के बारे मेंअभिषेक पाण्डेयअभिषेक पाण्डेय नवभारत टाइम्स में डिजिटल में पत्रकार हैं। वे जुलाई- 2025 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। वह वर्तमान में नेशनल और दिल्ली डेस्क से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं। पत्रकारिता में बतौर रिपोर्टर और डेस्क पर काम करने का 4 वर्षों का अनुभव है। नवभारत टाइम्स में जुड़ने से पहले वह दैनिक जागरण में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे। अभिषेक ने 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव 2024, महाकुंभ 2025 को काफी करीब से कवर किया है। अभी वह राष्ट्रीय स्तर पर हो रही सियासी उथल-पुथल, सामाजिक परिवर्तन और क्राइम से जुड़ी खबरों पर बारीकी से नजर रखते हैं।
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रामा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद अभिषेक पाण्डेय ने दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पत्रकारिता का शुरुआती ज्ञान लिया। इसके बाद उन्होंने कई संस्थानों के लिए फ्रीलांसिग की। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालयों के लिए जारी होने वाली धनराशि में घोटाले का खुलासा, सरकारी राशन वितरकों द्वारा 'राशन चोरी' का भंड़ाफोड़ किया, साथ ही किसान आंदोलन की ग्राउंड रिपोर्टिंग की। इसके बाद साल 2022 में दैनिक जागरण के डिजिटल विंग में बतौर सब एडिटर के पद पर अपने करियर की औपचारिक शुरुआत की। यहां उन्होंने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की डेस्क पर अपनी पकड़ मजबूत की। बेहतरीन लेखनी और कार्य के प्रति समर्पण को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने उन्हें 2024 में वरिष्ठ उप संपादक के पद पर प्रमोट किया। दैनिक जागरण में रहते हुए उन्होंने, खबरों का संपादन, एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया। इसके बाद अभिषेक पाण्डेय ने जुलाई 2025 में नवभारत टाइम्स के साथ अपनी पारी की शुरुआत की।
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मूल रूप से कानपुर से जुड़े अभिषेक पाण्डेय ने रामा यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है। दैनिक जागरण में उन्हें तीन बार बेस्ट परफॉर्मर ऑफ द मंथ से सम्मानित किया गया था।... और पढ़ें
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