चुनावों में काले धन के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एक साल में जांच पूरी करने के दिए निर्देश - sc cracks down on black money in elections new directives
चुनावों में काले धन के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एक साल में जांच पूरी करने के दिए निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों में काले धन के इस्तेमाल को लोकतंत्र और कानून के शासन के लिए गंभीर खतरा बताया है। HighLights - काले…

सौजन्य से:- Jagran
चुनावों में काले धन के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एक साल में जांच पूरी करने के दिए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों में काले धन के इस्तेमाल को लोकतंत्र और कानून के शासन के लिए गंभीर खतरा बताया है।
HighLights
- काले धन का उपयोग लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा।
- अवैध धन बरामदगी की रिपोर्ट 24 घंटे में देनी होगी।
- चुनावी मामलों की जांच एक साल में पूरी करें।
पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों में काले धन के इस्तेमाल को लोकतंत्र और कानून के शासन के लिए गंभीर खतरा बताया है। सोमवार को जस्टिस संजय करोल और एनके सिंह की पीठ ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में गलत तरीके से कमाया गया पैसा मतदाताओं की स्वतंत्र पसंद को प्रभावित कर सकता है।
अदालत ने चुनाव के दौरान अवैध धन और संपत्ति की बरामदगी से जुड़े मामलों की जांच समय पर पूरी करने और मुकदमों का जल्द निपटारा सुनिश्चित करने के लिए कई निर्देश जारी किए।
लोकतंत्र की मूल भावना को नुकसान
पीठ ने कहा कि ऐसा कोई भी बाहरी कारक, जो मतदाताओं की पसंद को प्रभावित करता है, लोकतंत्र की मूल भावना को नुकसान पहुंचा सकता है। अगर इसमें गलत तरीके से कमाया गया पैसा शामिल हो तो मतदाता की पसंद स्वतंत्र नहीं रह जाती। वह पैसे, किसी दूसरे लाभ या कभी वास्तविक तो कभी भ्रामक वादों से प्रभावित हो सकती है।
बरामदगी पर 24 घंटे में रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि चुनाव के दौरान नकदी या संपत्ति जब्त करने वाला अधिकारी 24 घंटे के भीतर जिला मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट या संबंधित क्षेत्र की अदालत को इसकी रिपोर्ट देगा। अधिकारी को यह भी लिखित रूप से बताना होगा कि जब्त नकदी या संपत्ति का संदिग्ध चुनावी अपराध से प्रथम दृष्टया क्या संबंध है।
पीठ ने कहा कि एफआइआर दर्ज होने के बाद जांच अधिकारी को मामले की जांच एक साल के भीतर पूरी करने की हरसंभव कोशिश करनी चाहिए। अगर इसमें अधिक समय लगता है तो देरी के कारण दर्ज करने होंगे और इसकी जानकारी चुनाव आयोग को देनी होगी।
जांच अधिकारी को संबंधित जिले के एसएसपी या डीसीपी की मंजूरी के बाद नोडल अधिकारी के माध्यम से आयोग को हर तीन महीने में जांच की प्रगति की रिपोर्ट भी देनी होगी।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि स्टैटिक सर्विलांस टीम यदि जांच के दौरान 10 लाख रुपये से अधिक नकद बरामद करती है तो इसकी जानकारी आयकर अधिकारियों को दी जाए।
उम्मीदवारों के मामलों की जल्द सुनवाई
पीठ ने कहा कि चुनाव लड़ने वाले लोगों को चुनाव कराने की प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार नहीं बनाया जा सकता। अगर ऐसा हुआ तो चुनाव का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। अदालत ने चुनाव लगातार होने की प्रकृति को देखते हुए उम्मीदवारों, मौजूदा सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों के जल्द निपटारे पर जोर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट को ऐसे मामलों की शीघ्र सुनवाई और निपटारे के लिए विशेष अदालतें तय करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि किसी चुनावी चक्र में उम्मीदवारों के खिलाफ मामले वापस लेने के लिए संबंधित हाई कोर्ट की अनुमति जरूरी होगी।
यह आदेश कर्नाटक सरकार की उस याचिका पर आया है, जो 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान बेल्लारी जिले में बड़ी मात्रा में काला धन जब्त किए जाने से जुड़े मामले में दाखिल की गई थी।
अदालत ने चुनाव आयोग और राज्य सरकारों को 18 नवंबर तक अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
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