पुलिस PCPNDT एक्ट के तहत लिंग जांच से जुड़े अपराधों की जांच नहीं कर सकती: सुप्रीम कोर्ट
पुलिस PCPNDT एक्ट के तहत लिंग जांच से जुड़े अपराधों की जांच नहीं कर सकती: सुप्रीम कोर्ट बेंच ने कहा, एक्ट के मकसद के लिए पुलिस को जांचकर्ता नहीं होना चाहिए, जहाँ तक हो सके, पुलिस की मदद लेने से बचना चाहिए. By Sumit Saxen…

सौजन्य से:- ETV Bharat
पुलिस PCPNDT एक्ट के तहत लिंग जांच से जुड़े अपराधों की जांच नहीं कर सकती: सुप्रीम कोर्ट
बेंच ने कहा, एक्ट के मकसद के लिए पुलिस को जांचकर्ता नहीं होना चाहिए, जहाँ तक हो सके, पुलिस की मदद लेने से बचना चाहिए.
By Sumit Saxena
Published : August 20, 2026 at 12:55 PM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि पुलिस आम तौर पर 'प्री-कन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्नीक्स (प्रोहिबिशन ऑफ सेक्स सिलेक्शन) एक्ट, 1994' (PCPNDT एक्ट) के तहत भ्रूण के लिंग का पता लगाने वाले अपराधों की जांच नहीं कर सकती. इस तरह कोर्ट ने लिंग चयन के मामलों में पुलिस की जांच शक्तियों को सीमित कर दिया है.
यह फैसला जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन.के. सिंह की बेंच ने सुनाया. बेंच ने कहा कि इस एक्ट के मकसद के लिए पुलिस को जांचकर्ता नहीं होना चाहिए और जहाँ तक हो सके, पुलिस की मदद लेने से बचना चाहिए. बेंच ने कहा कि यह एक्ट तकनीकी मामलों से जुड़ा है, जिनमें मेडिकल जानकारी और संवेदनशीलता की जरूरत हो सकती है. बेंच ने यह भी कहा कि इस एक्ट में बताए गए अपराधों की मुख्य जांचकर्ता पुलिस नहीं होनी चाहिए.
हालांकि बेंच ने साफ किया कि जब भी इस तरह के मामलों में शिकायत दर्ज करने के लिए एक्ट के तहत अधिकृत उचित प्राधिकरण (AA) को जरूरत हो तो पुलिस की भूमिका सीमित और सहायक हो सकती है. बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की इस राय से सहमति जताई कि पुलिस गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम (PCPNDT) के तहत उल्लंघनों की जांच नहीं कर सकती और न ही प्राथमिकी दर्ज कर सकती है. बेंच ने यह भी कहा कि सेक्शन 17(4) के तहत AA के कामों में साफ तौर पर एक्ट के तहत अपराधों की शिकायत दर्ज करने और उनकी जांच करने की जिम्मेदारी शामिल है.
बेंच ने कहा कि यह रोक सिर्फ इस एक्ट के तहत आने वाले अपराधों पर लागू होती है और यह पुलिस की जांच करने या मुख्य आपराधिक कानूनों में बताए गए अलग अपराधों पर मुकदमा चलाने की शक्ति को सीमित नहीं करती है. बेंच ने यह भी कहा कि संबंधित नियमों के अनुसार, जहाँ तक हो सके पुलिस की कार्रवाई से बचना चाहिए. पुलिस मुख्य जांच एजेंसी नहीं हो सकती और वह केवल तभी सहायक भूमिका निभा सकती है जब इस एक्ट के प्रावधानों के तहत AA (अथॉरिटी) को इसकी जरूरत हो.
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