होमअपराधगर्भ में जेंडर बताने के केस की सीधे जांच नहीं कर सकती पुलिस, PCPNDT एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
अपराध

गर्भ में जेंडर बताने के केस की सीधे जांच नहीं कर सकती पुलिस, PCPNDT एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने PCPNDT एक्ट के तहत भ्रूण का लिंग निर्धारित करने जैसे अपराधों की जांच को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस सामान्य तौर पर सीधे FIR दर्ज कर जांच नहीं कर सकती। शिकायत और जांच की जिम्मेदारी…

21 अगस्त 2026 को 03:54 am बजे
गर्भ में जेंडर बताने के केस की सीधे जांच नहीं कर सकती पुलिस, PCPNDT एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सौजन्य से:- Navbharat Times

सुप्रीम कोर्ट ने PCPNDT एक्ट के तहत भ्रूण का लिंग निर्धारित करने जैसे अपराधों की जांच को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस सामान्य तौर पर सीधे FIR दर्ज कर जांच नहीं कर सकती। शिकायत और जांच की जिम्मेदारी अधिकृत प्राधिकारी की है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक फैसले में कहा कि PCPNDT Act 1994 के तहत भ्रूण का लिंग निर्धारित करने जैसे अपराधों की पुलिस सामान्य तौर पर सीधे FIR कर जांच नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि इस कानून के तहत जांच और शिकायत दर्ज करने की जिम्मेदारी उचित प्राधिकारी की है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर पुलिस उचित प्राधिकारी की सहायता के लिए सीमित और सहायक भूमिका निभा सकती है।

कोर्ट ने यूपी से संबंधित एक मामले में फैसला देते हुए स्पष्ट किया कि PCPNDT Act तकनीकी और संवेदनशील विषय से जुड़ा विशेष कानून है। इसलिए कानून ने जांच और शिकायत की प्रक्रिया के लिए विशेष व्यवस्था बनाई है।

PCPNDT Act के तहत मुख्य जांच एजेंसी नहीं है पुलिस

कोर्ट ने कहा कि पुलिस इस कानून के तहत मुख्य जांच एजेंसी नहीं है और पुलिस का सहारा जहां तक संभव हो, टाला जाना चाहिए। हालांकि, संबंधित अथॉरिटी को जरूरत होने पर पुलिस की सहायता लेने से रोका नहीं गया है। कोर्ट ने यह भी अंतर स्पष्ट किया कि PCPNDT Act के अपराधों की जांच पर पुलिस की यह रोक सामान्य आपराधिक कानून के स्वतंत्र अपराधों पर लागू नहीं होगी।

कोर्ट ने कहा कि पुलिस इस कानून के तहत मुख्य जांच एजेंसी नहीं है और पुलिस का सहारा जहां तक संभव हो, टाला जाना चाहिए। हालांकि, संबंधित अथॉरिटी को जरूरत होने पर पुलिस की सहायता लेने से रोका नहीं गया है।

-सुप्रीम कोर्ट

FIR के बाद भी केस आगे कैसे बढ़ेगा?

कोर्ट ने कहा कि केवल PCPNDT Act के तहत FIR कर देने से पुलिस मामले को उस कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसके तार्किक निष्कर्ष तक नहीं ले जा सकती। क्योंकि, कानून ने शिकायत और अदालत के सज्ञान लेने की अलग प्रक्रिया निर्धारित की है। धारा 28 के तहत मैजिस्ट्रेट PCPNDT Act के अपराध का संज्ञान तभी ले सकता है जब कानून में बताए गए अधिकृत शख्स या अथॉरिटी शिकायत करें।

लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी 2007 से नवभारत टाइम्स से जुड़े हुए हैं। वह दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, निचली अदालत और सीबीआई से जुड़े विषयों को कवर करते हैं और स्पीड न्यूज में भी आपको इस बारे में खबर देते रहेंगे। यदि आपके पास कोर्ट से जुड़े मामलों की कोई सूचना है तो आप उनसे इस ईमेल अड्रेस - journalistrajesh@gmail.com - पर संपर्क कर सकते हैं।... और पढ़ें

कन्वर्सेशन शुरू करें

Indiaकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र | Supreme Court Weekly Round-Up, Supreme Court, Weekly Round-Up
अपराध

सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र | Supreme Court Weekly Round-Up, Supreme Court, Weekly Round-Up

आज, 23 अगस्त को, राष्ट्रीय सभा ने छह मसौदा कानूनों को मंजूरी देने के लिए मतदान किया।
अपराध

आज, 23 अगस्त को, राष्ट्रीय सभा ने छह मसौदा कानूनों को मंजूरी देने के लिए मतदान किया।

राष्ट्रीय विधानसभा ने कई महत्वपूर्ण कानूनों और संहिताओं को पारित करने के लिए मतदान किया।
अपराध

राष्ट्रीय विधानसभा ने कई महत्वपूर्ण कानूनों और संहिताओं को पारित करने के लिए मतदान किया।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बंद कमरे में जातिसूचक गाली देने पर SC/ST कानून लागू नहीं, जानिए ‘Public View’ की कानूनी शर्त
अपराध

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बंद कमरे में जातिसूचक गाली देने पर SC/ST कानून लागू नहीं, जानिए ‘Public View’ की कानूनी शर्त

राष्ट्रीय विधानसभा ने छह कानूनों को पारित करने के लिए मतदान किया और दंड संहिता में संशोधनों पर चर्चा की।
अपराध

राष्ट्रीय विधानसभा ने छह कानूनों को पारित करने के लिए मतदान किया और दंड संहिता में संशोधनों पर चर्चा की।

"गांवों को कानून की समझ" मॉडल का शुभारंभ समारोह: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गांवों तक कानून को पहुंचाना।
अपराध

"गांवों को कानून की समझ" मॉडल का शुभारंभ समारोह: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गांवों तक कानून को पहुंचाना।

झारखंड हाईकोर्ट में आपराधिक अपीलों का 'चौंकाने वाला पेंडिंग मामला': सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में 44 साल की देरी पर चिंता जताई
अपराध

झारखंड हाईकोर्ट में आपराधिक अपीलों का 'चौंकाने वाला पेंडिंग मामला': सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में 44 साल की देरी पर चिंता जताई

वकील मुवक्किल के खिलाफ गोपनीय जानकारी का इस्तेमाल सिर्फ इसलिए नहीं कर सकता क्योंकि वह विरोधी बन गई है: सुप्रीम कोर्ट
अपराध

वकील मुवक्किल के खिलाफ गोपनीय जानकारी का इस्तेमाल सिर्फ इसलिए नहीं कर सकता क्योंकि वह विरोधी बन गई है: सुप्रीम कोर्ट

ताज़ा ख़बरें