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सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के PA सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज किया

सालबोनी में जमीन हड़पने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस सांसद के पर्सनल असिस्टेंट सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका पर विचार नहीं किया। न्यायमूर्ति बागची और अन्य सदस्यों ने तथ्यों को देखते हुए राहत देने से इंकार किया और पिछले आदेश को रद्द कर रॉय को अब हिरासत में ले कर पूछताछ की संभावना बनी। रॉय के वकील ने कोई धोखाधड़ी या अवैध धन का सबूत न होने का दावा किया।

10 सितंबर 2026 को 10:05 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के PA सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज किया

सौजन्य से:- ETV Bharat

सालबोनी जमीन विवाद: अभिषेक बनर्जी के PA सुमित रॉय को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका! जानिए क्या है मामला

सालबोनी जमीन विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के PA सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है.

By Sumit Saxena

Published : September 10, 2026 at 2:34 PM IST

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के पर्सनल असिस्टेंट सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया. यह मामला सालबोनी में कथित तौर पर जमीन हड़पने से जुड़ा हुआ है. मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने की. वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने सुमित रॉय का पक्ष रखा.

पीठ ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए वह राहत देने के पक्ष में नहीं है. मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की, "जांच के दौरान सवालों पर आपके द्वारा दिए गए जवाब खुद ऐसी परिस्थितियां बना रहे हैं कि आपको, जांच में कोई बाधा उत्पन्न नहीं करनी चाहिए."

शंकरनारायणन ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल ने बार-बार कहा है कि उनके व्यक्तिगत खाते में पैसे डालने से जुड़े सवाल उन्हें कभी दिखाए या उनके सामने नहीं रखे गए और अब तक नहीं दिखाए गए हैं. शंकरनारायणन ने कहा कि कभी कोई धोखाधड़ी नहीं हुई है और न ही धोखाधड़ी पर कोई सवाल पूछे गए हैं, और वे मुझे एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि मुझसे राजनीतिक दल के किसी व्यक्ति का नाम उगलवाया जा सके, और ऐसा लगता है कि यही उनका उद्देश्य और ध्यान है.

जस्टिस बागची ने टिप्पणी की कि ऐसा कोई मामला नहीं है कि आपके हाथ में आए पैसे का अंतिम उपयोग आपके खुद के निजी उपभोग के लिए है, और यह किसी अन्य इकाई के उपभोग के लिए हो सकता है जिसमें एक राजनीतिक दल भी शामिल है. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अदालत रॉय की याचिका पर विचार करने के पक्ष में नहीं है.

पीठ ने राजनीतिक दल के खाते में उसी समय के दौरान जमा की गई नकदी की भी जांच की. जस्टिस बागची ने ध्यान दिलाया कि बैंक स्टेटमेंट से पता चलता है कि जमा की गई रकम रॉय से जुड़े एक पैन (PAN) से संबंधित थी, जबकि बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि यह खाता तृणमूल कांग्रेस का है और इसमें सदस्यता शुल्क सहित कई स्रोतों से फंड आता है.

पीठ ने पूछा कि क्या इस तरह की जमा राशि अपराध की कमाई की जांच में महत्व रख सकती है, क्योंकि ऐसे आरोप हैं कि अवैध पैसा रॉय के पास भेजा गया था. रॉय के वकील ने दलील दी कि एफआईआर में उनके मुवक्किल को आरोपी के रूप में नामजद नहीं किया गया है.

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जो यह दिखाए कि सरकारी जमीन से जुड़े लेन-देन से कथित तौर पर कमाया गया पैसा उनके निजी खाते से होकर गुजरा था. पीठ ने 6 अगस्त के अपने उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया जिसके तहत उसने रॉय की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी. नतीजतन, रॉय को अब इस मामले में हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए गिरफ्तार किया जा सकता है.

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