सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम की रिहाई याचिका को ठुकराया, 25‑साल की सजा बनी रही
सुप्रीम कोर्ट ने गैंगस्टर अबू सलेम की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें वह 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट मामले में समय से पहले रिहाई की मांग कर रहा था। कोर्ट ने कहा कि उसकी 25‑साल की सजा 11 नवंबर 2005 से शुरू हुई थी और अभी तक पूरा नहीं हुई। अबू सलेम ने हिरासत की शुरुआत 2002 को मानते हुए तर्क दिया था, पर यह तर्क अस्वीकृत कर दिया गया।

सौजन्य से:- Hindustan
अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, समय से पहले जेल से आना चाहता था बाहर
सुप्रीम कोर्ट ने गैंगस्टर अबू सलेम को बड़ा झटका दिया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने उसकी उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट मामले में रिहाई की मांग की थी।
Supreme Court on Abu Salem: सुप्रीम कोर्ट ने गैंगस्टर अबू सलेम को बड़ा झटका दिया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने उसकी उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट मामले में रिहाई की मांग की थी। सलेम का दावा था कि उसने सुप्रीम कोर्ट के 2022 के फैसले के अनुसार 25 साल की जेल की सजा पूरी कर ली है।
आपको बता दें कि इसी साल अप्रैल में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा रिहाई की याचिका खारिज किए जाने के बाद अबू सलेम ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। उसे 1995 में बिजनेसमैन प्रदीप जैन की हत्या के मामले में 2015 में और 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में 2017 में TADA की स्पेशल कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा, "साधारण हिसाब से भी देखें तो 11 नवंबर, 2005 को जेल जाने की तारीख से आपके 25 साल पूरे नहीं हुए हैं।"
अबू सलेम को मुंबई ब्लास्ट और प्रदीप जैन की हत्या के मामलों में मुकदमे का सामना करने के लिए भारत प्रत्यर्पित किया गया था, जब भारत सरकार ने यह पक्का भरोसा दिया था कि उसे 25 साल से ज्यादा जेल की सजा नहीं दी जाएगी। जब ट्रायल कोर्ट ने दोनों मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई तो सुप्रीम कोर्ट ने 13 जुलाई, 2022 को पुर्तगाल को दिए गए भारत के पक्के भरोसे के मुताबिक उसकी सजा को घटाकर 25 साल कर दिया।
क्या था अबू सलेम का तर्क?
सुप्रीम कोर्ट में पहले हुई कार्यवाही में केंद्र सरकार ने तर्क दिया था कि उसकी 25 साल की सजा 11 नवंबर, 2005 से शुरू हुई थी और यह नवंबर 2030 में खत्म होगी। वहीं, अबू सलेम ने तर्क दिया है कि सजा की अवधि की गिनती 18 सितंबर 2002 से की जानी चाहिए जब भारत के कहने पर इंटरपोल द्वारा जारी रेड कॉर्नर नोटिस के बाद उसे पुर्तगाल में हिरासत में लिया गया था। केंद्र सरकार का तर्क है कि अबू सलेम को पुर्तगाल में पासपोर्ट से जुड़े एक अपराध के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था और उसकी हिरासत का उस अपराध से कोई लेना-देना नहीं था जिसके लिए उसे प्रत्यर्पित किया गया था।
कौन है अबू सलेम?
अबू सलेम अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के सिंडिकेट का हिस्सा था। जून 2017 में अबू सलेम को 1993 के मुंबई धमाकों के मामले में दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सजा सुनाई गई। उसे सीरियल बम धमाकों में इस्तेमाल के लिए गुजरात से मुंबई हथियार ले जाने का दोषी पाया गया था। इन धमाकों में 257 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
दिल्ली हाई कोर्ट ने सौरव दास‑आशुतोष रांका को गौरव भाटिया के खिलाफ पोस्ट हटाने का दिया अवसर

हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को DA मामले में कड़ी चेतावनी, 10 दिनों में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम की समय से पहले रिहाई की मांग को नकारा, 25‑साल की कैद सीमा बनी रही

सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम की 25‑वर्षीय कैद पूरी होने के दावे पर याचिका डिनायल की

सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई खारिज, 1993 मुंबई बम हमले में उम्रकैद बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक बलात्कार के अपवाद पर फैसला सुनने की दिशा में कदम बढ़ाया, पति के खिलाफ अभियोजन की कानूनी जाँच

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के हॉस्टल हादसे को राष्ट्रीय मुद्दा बना कर सुनवाई शुरू की

हाई कोर्ट ने 'यारियां-2' के निर्माताओं को मिली बड़ी राहत, कृपाण दिखाने वाले FIR को रद्द किया
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने महावीर जी मंदिर प्रबंधन विवाद पर फैसला सुरक्षित रखा, दोनों संप्रदायों को लिखित दलीलें देने का आदेश
- सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार को विधायकों के विरुद्ध दर्ज मामलों को वापस लेने की स्वीकृति दी
- सुप्रीम कोर्ट ने उठाया सवाल‑ क्या मौजूदा क़ानून से पति‑पत्नी के यौन दुरुपयोग पर केस चल सकता है?
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा: राहुल गांधी VVIP नहीं, सभी मामले समान—जल्द सुनवाई के लिए अर्जी दायर करें
- सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: मैरिटल रेप अपवाद के बावजूद पति पर रेप का मुकदमा चलाना संभव?
- सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक दुष्कर्म के अपवाद पर सवाल उठाया, पति पर रेप केस चलाने की संभावना पर विचार किया
- संसद का अधिकार, सुप्रीम कोर्ट नहीं: वैवाहिक बलात्कार को अपराध मानने का फैसला संसद पर
- लोक अदालत में ट्रैफिक चालान निपटाने से पहले ये जरूरी कदम उठाएँ

