हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को DA मामले में कड़ी चेतावनी, 10 दिनों में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय करने को कहा
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश की अनदेखी पर फटकार लगाते हुए बताया कि अपील का अधिकार अनुपालन को टाल नहीं सकता। अदालत ने अपील में मौजूद खामियों को दूर कर जल्द सुनवाई सुनिश्चित करने और 10 दिनों के भीतर सुप्रीम कोर्ट में अपील की सुनवाई करवाने का निर्देश दिया, जबकि मामला 95 वर्ष तक के बुजुर्गों को भी सम्मिलित करता है।

सौजन्य से:- Jagran
DA मामले में हाईकोर्ट की पंजाब सरकार को दो टूक, कहा- खेल खेलना और कानूनी प्रक्रिया में चालें चलना बंद करें
DA मामले में आदेश की पालना न होने पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाई। सरकार को अपील की ...और पढ़ें
HighLights
- हाईकोर्ट ने DA मामले में पंजाब सरकार को सख्त फटकार लगाई।
- अदालत ने कहा, अपील के बावजूद आदेशों का पालन जरूरी है।
- सरकार को 10 दिन में सुप्रीम कोर्ट में अपील सुनवाई का निर्देश।
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कोर्ट के आदेश के बाद भी DA मामले में रिपोर्ट फाइल न करने ओर कोर्ट के आदेश की अनदेखी पर पंजाब सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने राज्य पक्ष को स्पष्ट किया कि किसी न्यायिक आदेश को चुनौती देने का उसे पूरा अधिकार है, लेकिन अपील दाखिल करने के बावजूद पहले से जारी आदेश के अनुपालन को लंबित नहीं रखा जा सकता।
अदालत ने राज्य पक्ष को अपील में लगी खामियां दूर कर उसे जल्द सुनवाई के लिए पेश कराने को कहा। सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि मामले में आवेदकों की उम्र 95 वर्ष तक है। अदालत ने राज्य पक्ष से कहा कि यदि वह 90 दिन की अपील अवधि का हवाला देता है तो उसे यह भी बताना होगा कि इस अवधि में अदालत के पहले से जारी निर्देशों का क्या होगा।
न्यायालय ने साफ किया कि अपील का अधिकार अपनी जगह है, लेकिन आदेश के अनुपालन से बचने के लिए इस अधिकार का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अदालत ने सरकार को सख्त लहजे में कहा कि वह अदालत के साथ खेल खेलना और कानूनी प्रक्रिया में चालें चलना बंद करे।
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अपील में खामियां दूर करे राज्य
राज्य पक्ष की ओर से बताया गया कि अपील दाखिल की जा चुकी है और उसमें लगी खामियां दूर करने की प्रक्रिया चल रही है। इस पर अदालत ने कहा कि अपील को आगे बढ़ाया जाए और खामियां दूर कर जल्द सुनवाई सुनिश्चित की जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी पक्ष के अपील के अधिकार को सीमित नहीं करना चाहती, लेकिन कानून के अनुसार उपलब्ध उपाय का इस्तेमाल करना जरूरी है।
सुनवाई के दौरान राज्य पक्ष ने मामले में पहले से लंबित अवमानना कार्यवाही का भी हवाला दिया। बताया गया कि मूल याचिकाकर्ताओं की ओर से अवमानना याचिका दाखिल की जा चुकी है और उस पर सुनवाई लंबित है। राज्य पक्ष ने आशंका जताई कि अलग-अलग कार्यवाहियों के कारण मामले में अनावश्यक रूप से कई मुकदमे खड़े हो सकते हैं।
बुजुर्गों के हित में जल्द हो सुनवाई
इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य को मूल आदेश पर आपत्ति है तो वह अपनी अपील की सुनवाई कराए। अदालत ने कहा कि किसी पक्ष को न्यायिक आदेश के अनुपालन से केवल इसलिए नहीं रोका जा सकता कि उसने उसके खिलाफ अपील दायर कर दी है। अदालत ने राज्य पक्ष को मामले में गंभीरता दिखाने और अपील की खामियां दूर करने पर जोर दिया।
सुनवाई के दौरान आवेदकों की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि मामले में 95 वर्ष तक के बुजुर्ग लोग शामिल हैं। ऐसे में मामले की कार्यवाही में अनावश्यक देरी उनके लिए परेशानी का कारण बन सकती है। अदालत ने सभी पक्षों को कानून के मुताबिक आगे बढ़ने और लंबित कार्यवाही को जल्द निपटाने की दिशा में कदम उठाने को कहा।
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कार्रवाई करे सरकार
हाईकोर्ट ने इस रवैये पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि सरकार को हाईकोर्ट के फैसले से आपत्ति है तो वह कानून के तहत उचित मंच पर उसका विरोध करे। अदालत ने यह भी कहा कि ट्वीट के जरिये हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के बजाय सरकार को ठोस कार्रवाई करके दिखानी चाहिए।
10 दिन में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कराने का निर्देश
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को दस दिन का समय दिया है। अदालत ने कहा कि इस अवधि में सरकार सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी अपील पर सुनवाई करवाए। यदि दस दिन के भीतर सुप्रीम कोर्ट में मामले पर सुनवाई नहीं होती है तो हाईकोर्ट इसके बाद मामले को अपने स्तर पर आगे सुनेगा।
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