सुप्रीम कोर्ट ने वादियों को लिया फैसला, गाली-गलौज करने वालों को वर्चुअली पेश होना होगा
सुप्रीम कोर्ट ने हाल की घटना के बाद वादियों को फैसला दिया है, जिसमें खुद व्यक्तिगत तौर से पेश होने वाले वादियों को वर्चुअली पेश होने के लिए कहा जाएगा। उनके खिलाफ गाली-गलौज और केस फाइल फेंकने जैसे व्यवहार के बाद ही यह निर्णय लिया गया है।

सौजन्य से:- Jagran
'वादी के खुद केस लड़ने पर नहीं होगी सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग', हाल की घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट का फैसला
एक वादी के गाली-गलौज करने और कोर्ट रूम में अपनी केस फाइल फेंकने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि खुद पेश होने वाले वादियों को वर्चुअली पेश हो ...और पढ़ें
HighLights
- गाली-गलौज की हालिया घटना के बाद लिया फैसला
- ऐसे वादियों को वर्चुअली पेश होने के लिए कहा जाएगा
पीटीआई, नई दिल्ली। एक वादी के गाली-गलौज करने और कोर्ट रूम में अपनी केस फाइल फेंकने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि खुद पेश होने वाले वादियों को वर्चुअली पेश होने के लिए कहा जाएगा।
अगर वे व्यक्तिगत तौर से पेश होने पर जोर देंगे तो सुनवाई की कोई लाइव-स्ट्रीमिंग नहीं की जाएगी और वीडियो-रिकॉर्डिंग की भी अनुमति नहीं होगी।
यह फैसला गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की फुल कोर्ट मीटिंग में लिया गया। इसमें सुप्रीम कोर्ट के कामकाज को आसान बनाने के लिए कई और अहम फैसले लिए गए, जिसमें पुराने लंबित मामलों का निपटारा भी शामिल है।
बैठक में यह भी तय हुआ कि शीर्ष अदालत के सभी जज सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित की जा रही विशेष पहल 'समाधान समारोह' में हिस्सा लेंगे।
भागीदारी वाला न्याय और द्वार पर न्याय के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए शीर्ष अदालत 'सुप्रीम कोर्ट एक्शन फार मीडिएटेड एडज्यूडिकेशन एंड डिस्प्यूट्स हार्मोनाइजेशन अक्रास नेशन' या समाधान समारोह का आयोजन कर रही है, जो 21 अप्रैल से शुरू हुआ था और 21, 22 व 23 अगस्त को विशेष लोक अदालत के साथ खत्म होगा।
शीर्ष अदालत में बढ़ते लंबित मामलों को कम करने के लिए बैठक में अंतिम सुनवाई के लिए तैयार लगभग 9,177 मामलों का निपटारा करने का फैसला किया गया।
इन सभी मामलों को बिना बारी निपटाने के लिए उचित पीठों के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा। सबसे पुराने (नोटिस के बाद) मामलों की सुनवाई मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को की जाएगी।
क्रम से मामलों को सूचीबद्ध नहीं किए जाने की बार एसोसिएशनों और वकीलों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए फुल कोर्ट ने इन मुद्दों की जांच करने और सुझाव देने के लिए जजों की एक समिति बनाने का संकल्प लिया।
इसमें यह भी तय किया गया कि बहस करने वाले वकीलों को अंतिम सुनवाई के लिए उठाए जाने वाले मामलों में मौखिक दलील के लिए समयसीमा बतानी होगी।
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