दिल्ली हाईकोर्ट: अनियंत्रित डिजिटल मीडिया के लिए विधायिका बनाए नियामक ढांचा, अदालत ने दिया सुझाव
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया युग में कई लोग बिना प्रशिक्षण और जवाबदेही के खुद को रिपोर्टर बताकर सनसनीखेज सामग्री बनाते हैं। अदालत ने विधायिका से ऐसे अनियंत्रित डिजिटल मीडिया के लिए उचित नियामक ढांचा बनाने का सुझाव दिया है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
{"_id":"6a597bfd13e44d8241078583","slug":"delhi-high-court-legislature-should-frame-a-regulatory-framework-for-unregulated-digital-media-2026-07-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi High Court: अदालत ने कहा- अनियंत्रित डिजिटल मीडिया के लिए विधायिका बनाए नियामक ढांचा, इसलिए दिया सुझाव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi High Court: अदालत ने कहा- अनियंत्रित डिजिटल मीडिया के लिए विधायिका बनाए नियामक ढांचा, इसलिए दिया सुझाव
Fri, 17 Jul 2026 06:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा
गौरव बाजपेई, नई दिल्ली
गौरव बाजपेई, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 17 Jul 2026 06:19 AM IST
सार
हाईकोर्ट बृहस्पतिवार को सीमापुरी थाना क्षेत्र में दो यूट्यूब चैनल से जुड़े फ्रीलांस रिपोर्टरों पर कथित हमले के मामले में दो युवकों अभिद अली उर्फ आबी और फुरकान को नियमित जमानत पर सुनवाई कर रही थी।
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रेस की स्वतंत्रता पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतंत्र में प्रेस की स्वतंत्रता अहम है, लेकिन सोशल मीडिया युग में कई लोग बिना प्रशिक्षण और जवाबदेही के खुद को रिपोर्टर बताकर सनसनीखेज सामग्री बनाते हैं। अदालत ने विधायिका से ऐसे अनियंत्रित डिजिटल मीडिया के लिए उचित नियामक ढांचा बनाने का सुझाव भी दिया है।
विज्ञापन
हाईकोर्ट बृहस्पतिवार को सीमापुरी थाना क्षेत्र में दो यूट्यूब चैनल से जुड़े फ्रीलांस रिपोर्टरों पर कथित हमले के मामले में दो युवकों अभिद अली उर्फ आबी और फुरकान को नियमित जमानत पर सुनवाई कर रही थी। न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि मामले में पुलिस की जांच एजेंसी की भूमिका लापरवाही भरी रही है और आरोपियों की पहचान को लेकर भी कई विरोधाभास हैं। अदालत ने दोनों को 10 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके और समान राशि के एक-एक जमानती पर जमानत दी।
विज्ञापन
मीडिया से हैं कहकर यूट्यूबर कर रहे थे रिकार्डिंग
मामला चार जुलाई 2025 का है, जब दो व्यक्ति (जो खुद को मीडिया से बताते हुए) सीमापुरी की अनाधिकृत कॉलोनी में रिकॉर्डिंग कर रहे थे। स्थानीय लोगों ने उन पर हमला कर दिया। एफआईआर में आरोप लगाया गया कि भीड़ ने पीटा, मोबाइल, कैमरा बैटरी छीनी और मोटरसाइकिल क्षतिग्रस्त की। अदालत ने फैसले में कहा कि वीडियो फुटेज में आरोपियों की भूमिका स्पष्ट नहीं है।
विज्ञापन
एक सुनवाई में जांच अधिकारी ने दावा किया था कि आबिद अली बस में घुसा लेकिन बाद में यह दावा गलत साबित हुआ। फुरकान के कपड़ों के रंग को लेकर भी जांच अधिकारी के बयानों में अंतर पाया गया। अदालत ने कहा कि टिप्पणियां केवल जमानत के संदर्भ में हैं और अंतिम फैसला ट्रायल कोर्ट सबूतों के आधार पर करेगा।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
59K views · 1K reactions | पाकिस्तानी लड़की की हत्या से जुड़े मामले पर जब अदालत का फ़ैसला आया, तब पीएम मेलोनी ने क्या कहा? | BBC News हिन्दी

पाकिस्तान में हत्या मामले के फ़ैसले पर PM मेलोनी का बड़ा बयान, जानें क्या है खास

सुप्रीम कोर्ट ने 3 भाषा नीति पर रोक लगाने से इनकार किया

पाकिस्तान में हत्याकांड: पीएम मेलोनी की प्रतिक्रिया

पाक मामले में शाहिदा बसरा की हत्या की जाँच में बड़ा खुलासा, PM मेलोनी ने दिया यह बयान

पाकिस्तानी नागरिक हत्याकांड पर आया अदालत का फ़ैसला, पीएम मेलोनी ने जताई आश्चर्यचकितता!

पाकिस्तानी युवती की हत्या से जुड़े मामले पर फ़ैसले के बाद मेलोनी की प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने समयपूर्व रिहाई के मामले में निर्देश दिया
ताज़ा ख़बरें
- राज्य के संदेह और नागरिकों की गरिमा
- सुप्रीम कोर्ट ने साझा कानूनी परामर्श के बिना लाइव स्ट्रीम पर सुनवाई पर रोक लगाई
- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पक्षकारों को वर्चुअल माध्यम से बहस करने का विकल्प
- बुलडोजर न्याय: उच्च न्यायालयों में अवमानना याचिकाओं को स्थानांतरित करने के आदेश
- पाकिस्तानी लड़की की हत्या के दोषियों को न्याय देना जरूरी था: इटली की पीएम
- सुप्रीम कोर्ट ने भगवंत मान के खिलाफ विरोध मार्च से जुड़े मामले पर सुनवाई से किया इनकार
- बुलडोजर की सख्त नसीहत और सवाल- सुप्रीम कोर्ट ने बताया मकान मिटाने का नियम क्यों नहीं
- सुप्रीम कोर्ट ने वादियों को लिया फैसला, गाली-गलौज करने वालों को वर्चुअली पेश होना होगा

