शाबान पर 20 वर्ष की कैद, नाबालिग से दुष्कर्म के लिए 1.12 लाख का जुर्माना
बदायूं की POCSO-02 अदालत ने शाबान को नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाने, दुष्कर्म, बंधक बनाना और मारपीट के मामलों में 20 साल की कठोर कैद तथा कुल 1.12 लाख रुपये का अर्थदंड दिया। अपहरण के लिये 7 वर्ष और दुष्कर्म के लिये 20 वर्ष की सजा के साथ जुर्माने का निर्णय भी लिया गया।

सौजन्य से:- Navbharat Times
बदायूं की POCSO-02 अदालत ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाने, दुष्कर्म, बंधक बनाने और मारपीट के मामले में दोषी शाबान को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने कुल 1.12 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
सुनील मिश्रा,बदायूं: उत्तर प्रदेश के बदायूं में नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाने, दुष्कर्म, बंधक बनाने और मारपीट के मामले में बदायूं की पॉक्सो-02 अदालत ने शनिवार को फैसला सुनाया। अदालत ने दोषी शाबान को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अलग-अलग अपराधों में अदालत ने उस पर कुल 1.12 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला पुलिस की ओर से चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी पैरवी के बाद आया।
अपहरण के मामले में सात साल की सजा
अदालत ने शाबान को नाबालिग के अपहरण के मामले में सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।
नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने शाबान को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। पॉक्सो एक्ट के तहत भी उसे 20 वर्ष की कठोर कैद और 50 हजार रुपये का अर्थदंड भुगतने का आदेश दिया गया।
बंधक बनाने और मारपीट में भी दोषसिद्धि
मामले में नाबालिग को बंधक बनाने और उसके साथ मारपीट करने के आरोप भी लगाए गए थे। अदालत ने बंधक बनाने के अपराध में एक वर्ष के कठोर कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
मारपीट के मामले में भी अदालत ने शाबान को एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी और एक हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
शबाना को कुछ आरोपों में मिली राहत
मामले में शाबान के साथ शबाना भी आरोपित थी। अदालत ने शबाना को कुछ आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। वहीं शाबान को भी एससी/एसटी एक्ट और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन अधिनियम से जुड़े आरोपों में दोषमुक्त किया गया।
इस तरह अदालत का फैसला उन्हीं आरोपों में दोषसिद्धि पर आधारित है, जिनमें अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में सफल रहा।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत हुई प्रभावी पैरवी
पुलिस के मुताबिक, मामले को ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत चिन्हित किया गया था। इसके बाद मॉनीटरिंग सेल, पैरोकार कांस्टेबल प्रमोद कुमार, विवेचक क्षेत्राधिकारी नगर आलोक मिश्र और लोक अभियोजक वीरेंद्र सिंह वर्मा ने मामले की पैरवी की।
पुलिस का कहना है कि अभियोजन पक्ष के साथ समन्वय करते हुए मामले में लगातार प्रभावी पैरवी की गई। इसी के परिणामस्वरूप अदालत ने दोषी शाबान को कठोर सजा सुनाई।
लेखक के बारे मेंदेवेश पांडेयदेवेश पांडेय नवभारतटाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत हैं। वे एनबीटी की उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड डिजिटल टीम के सदस्य हैं। देवेश के पास डिजिटल, वेब और ब्रॉडकास्ट पत्रकारिता का 9 साल का व्यापक अनुभव है। उन्होंने मई 2025 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन ज्वॉइन किया था। इससे पहले वे इंडिया न्यूज, भारत समाचार, न्यूज वन इंडिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों सहित कई डिजिटल चैनल में विभिन्न भूमिकाओं में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
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देवेश पांडेय ने लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। देवेश डिजिटल, वेब और ब्रॉडकास्ट मीडिया में 9 साल काम करने का अनुभव रखते हैं। उन्होंने ने 2016 के आखिर में यूपीटीवी लिमिटेड (भारत समाचार) के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां यूपी-उत्तराखंड में हुए 2017 विधानसभा चुनाव को डेस्क से महत्वपूर्ण खबरों और राजनीतिक घटनाक्रमों के साथ कवर किया। इसके बाद न्यूज वन इंडिया में असाइनमेंट डेस्क पर रहते हुए 2019 में हुए लोकसभा चुनाव को कवर किया। इसके बाद 2022 में उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनावों को इंडिया न्यूज सहित डिजिट चैनल्स में रहते हुए कवर किया।... और पढ़ें
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