नारनौल में मोटर दुर्घटना दावे को असिद्ध घोषित कर अदालत ने याचिका खारिज
कोरियावास के मोनिका व अन्य द्वारा दायर मोटर दुर्घटना मुआवजा दावे में अदालत ने साक्ष्यों में विसंगति पाई। अस्पताल के रिकॉर्ड और देर से दर्ज FIR के कारण मृत्यु‑दुर्घटना का संबंध सिद्ध नहीं हो पाया, इसलिए याचिका को खारिज कर 2,000 रुपये की फीस भी लगाई गई।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Mahendragarh-Narnaul News: दुर्घटना का दावा साबित न होने पर अदालत ने मुआवजे की याचिका की खारिज
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नारनौल। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण की अध्यक्ष डॉ. रितु वाई. के. बहल की अदालत ने दुर्घटना मुआवजे से जुड़े एक मामले में याचिका खारिज कर दी। अदालत ने साक्ष्यों में विरोधाभास मिलने पर याचिकाकर्ताओं पर 2 हजार रुपये का अदालती शुल्क भी लगाया।
गांव कोरियावास निवासी मोनिका व अन्य ने याचिका दायर कर दावा किया था कि 28 फरवरी 2022 को मंजू देवी अपने बेटे प्रदीप के साथ मोटरसाइकिल पर गांव लौट रही थीं। एमएएसडी स्कूल के पास किसी अज्ञात वाहन ने उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। घायल मंजू देवी की इलाज के दौरान 11 मई 2022 को मौत हो गई।
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बीमा कंपनी द ओरिएंटल इंश्योरेंस ने दावे को गलत और मिलीभगत पर आधारित बताया। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने अस्पताल के रिकॉर्ड आए, जिनके अनुसार मंजू देवी को 28 फरवरी को नहीं, बल्कि 1 मार्च को अस्पताल लाया गया था। रिकॉर्ड में यह भी दर्ज था कि वह पिछले सात दिनों से दांत दर्द और चेहरे की सूजन का इलाज करा रही थीं।
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अदालत ने यह भी पाया कि घटना की तत्काल पुलिस शिकायत नहीं हुई और एफआईआर मृत्यु के बाद 11 मई को दर्ज हुई। मुख्य गवाह प्रदीप भी कथित वाहन का रंग या अन्य पहचान संबंधी जानकारी नहीं बता सका। पर्याप्त सबूत न मिलने पर अदालत ने दुर्घटना से मौत का संबंध सिद्ध नहीं माना और याचिका खारिज कर दी।
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