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Legal news: 326 सांसदों और 14 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले, सुप्रीम कोर्ट में पेश हुई रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट के अनुसार लोकसभा और राज्यसभा के 776 सदस्यों में 326 के खिलाफ आपराधिक मामले हैं। इनमें 210 गंभीर मामले हैं। रिपोर्ट में 14 मुख्यमंत्रियों द्वारा भी आपराधिक मामले घोषित करने की जानकारी दी गई…

18 अगस्त 2026 को 06:55 am बजे
Legal news: 326 सांसदों और 14 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले, सुप्रीम कोर्ट में पेश हुई रिपोर्ट

सौजन्य से:- Navbharat Times

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट के अनुसार लोकसभा और राज्यसभा के 776 सदस्यों में 326 के खिलाफ आपराधिक मामले हैं। इनमें 210 गंभीर मामले हैं। रिपोर्ट में 14 मुख्यमंत्रियों द्वारा भी आपराधिक मामले घोषित करने की जानकारी दी गई है। सांसद विधायकों के 4192 मामले लंबित हैं।

नई दिल्ली: राजनीति में आपराधिक मामलों की मौजूदगी पर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट ने गंभीर तस्वीर सामने रखी है। इसके अनुसार, लोकसभा और राज्यसभा के 776 सदस्यों में से 326 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें 210 गंभीर अपराधों से संबंधित हैं, जिनमें 5 साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है। वहीं, 14 मुख्यमंत्रियों ने भी आपराधिक मामले घोषित किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में सीनियर वकील विजय हंसारिया ने रिपोर्ट पेश की है।

हंसारिया को इस मामले में कोर्ट सलाहकार बनाया गया है।

रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि मौजूदा और पूर्व सांसदों, विधायकों के खिलाफ कुल 4,192 आपराधिक मामले लंबित हैं।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि लोकसभा के 543 सदस्यों में से 251 के खिलाफ आपराधिक मामले हैं।

इनमें 170 गंभीर श्रेणी के मामले हैं। राज्यसभा के 233 सदस्यों में से 75 यानी करीब 33 प्रतिशत सांसद आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं।

इनमें 40 सांसदों के खिलाफ गंभीर मामले हैं। यह मामला एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका से जुड़ा है।

2016 में उन्होंने अर्जी दाखिल कर कहा था कि MLA और MP के खिलाफ पेंडिंग केसों की सुनवाई फास्ट ट्रैक किया जाना चाहिए।

210 केस में 5 साल या उससे अधिक की हो सकती है सजा

14 मुख्यमंत्रियों ने घोषित किए आपराधिक मामले

रिपोर्ट के मुताबिक, 28 राज्यों में से 14 के मुख्यमंत्रियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है। इनमें तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी के खिलाफ सबसे अधिक 89 मामले बताए गए हैं। पश्चिम बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ 29 और कर्नाटक के सीएम डी.के. शिवकुमार के खिलाफ 19 मामले दर्ज हैं। 2023 में SC ने सांसदों-विधायकों से जुड़े लंबित मामलों के जल्द निपटारे के लिए सभी हाई कोर्ट को विशेष पीठ बना निगरानी करने का निर्देश दिया था।

लंबित मामले स्थिर

एमिकस क्यूरी ने कहा कि वर्ष 2018 से सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की संख्या लगभग समान है। हाई कोर्ट से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 1,243 मामलों का निपटारा हुआ, जबकि 1,050 नए मामले आए। हंसारिया ने मांग की कि सांसदों और विधायकों के लिए नामित विशेष अदालतें प्राथमिकता के आधार पर केवल उन्हीं के खिलाफ लंबित मामलों की सुनवाई करें।

राज्यवार आंकड़े

केरल के 20 में से 19 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले हैं। तेलंगाना के 17 में से 14 सांसद, ओडिश के 21 में से 16, झारखंड के 14 में से 10, तमिलनाडु के 39 में से 26 सांसद आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। यूपी, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, कर्नाटक, आंध्र में करीब आधे सांसदों पर ऐसे मामले हैं। हरियाणा के 10 सांसदों में केवल एक, छत्तीसगढ़ के 11 सांसदों में एक पर आपराधिक मामला है।

लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी, नवभारत टाइम्स में लीगल एडिटर हैं। वह 22 साल से भी ज्यादा वर्षों से लीगल रिपोर्टिंग कर रहे हैं। शुरुआत में वह दिल्ली की निचली अदालत और सीबीआई कवर करते थे और बाद में वह दिल्ली हाई कोर्ट और फिर लगातार डेढ़ दशक से सुप्रीम कोर्ट कवर कर रहे हैं। इस दौरान राजेश ने देश के तमाम हाई प्रोफाइल केस नीतीश कटारा मर्डर केस, जेसिक लाल केस, बोफोर्स केस, उपहार केस, पार्लियामेंट अटैक केस, प्रिय दर्शनी मट्टू केस से लेकर तमाम संवैधानिक मसले कवर किए जिनमें अनुच्छेद-370, तीन तलाक, निजता का अधिकार, होमो सेक्सुअलिटी को अपराध से बाहर करने का मामला और राम मंदिर मसले अहम है। राजेश ने इस 22 साल के करियर के दौरान दो साल 2006 से लेकर 2007 के सितंबर तक सहारा समय टीवी चैनल में भी बतौर लीगल संवावददाता काम किया। इसके बाद दोबारा वह नवभारत टाइम्स आए और उसके बाद लगातार कानूनी अफेयर्स को कवर करते रहे। नेशनल ब्यूरो में रहते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और कानून मंत्रालय को कवर करने के साथ साथ कानून के विषय पर लगातार एडिट पेज पर लिख रहे हैं। साथ ही लगातार ऑनलाइन माध्यम के लिए भी सक्रिय रिपोर्टिंग करते रहे हैं और ..कोर्ट रूम..नाम के एक साप्ताहिक विडियो इंटरव्यू भी लगातार देते हैं जिनमें सप्ताह भर के मुख्य कानूनी मसले पर उनका साक्षात्कार प्रसारित होता है। इसके अलावा वह लगातार लीगल मसले पर लीगल फोरम नामक कॉलम भी लिखते रहे हैं। उन्होंने दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से केमिस्ट्री में एमएससी किया है। साथ ही उन्होंने जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया और एलएलबी भी कर रखा है।... और पढ़ें

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