जज ने सौरभ दास को दी सच्ची सीख‑‘सही‑गलत की जाँच किए बिना कोर्ट में न फंसें’
दिल्ली हाई कोर्ट ने भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया के विरुद्ध दायर मानहानि के मुकदमे में सीजेपी नेता सौरभ दास को यह समझाया कि बिना पुष्टि किए पोस्ट करना उचित नहीं है। जस्टिस तुषार राव गेडेला ने उन्हें विवादित एआई‑जनित सामग्री स्वयं हटाने का अवसर दिया और कहा कि युवा होने के कारण उन्हें सही‑गलत की परख करनी चाहिए। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि वे अपना समय अदालतों में न बिताएँ, बल्कि जिम्मेदारियों को समझकर कार्य करें।

सौजन्य से:- Hindustan
क्यों अदालतों में बिताना चाहते हैं अपना समय? सौरभ दास को जज साहब ने खूब समझाया
दिल्ली हाई कोर्ट ने गौरव भाटिया की ओर से दायर किए गए मानहानि के मुकदमे की सुनवाई करते हुए सीजेपी नेता सौरभ दास को काफी समझाया। अदालत ने कहा कि वे युवा हैं, व्यग्र हैं… लेकिन सही गलत परखे बिना कुछ कहना या करना ठीक नहीं है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता गौरव भाटिया को लेकर 'फेक न्यूज' कांड में घिरे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरभ दास को अदालत ने सुनवाई के दौरान कई सीख और नसीहतें दीं। अदालत ने उन्हें बताया कि विरोध के कई तरीके हैं, लेकिन ऐसा करते हुए सही-गलत की परख कर लेना आवश्यक है। कोर्ट ने 'ऑफ द रिकॉर्ड' भी समझाया और सीजेपी नेताओं को विवादों से बचने की सलाह देते हुए कहा कि क्यों वे अपना समय अदालतों में बिताना चाहते हैं?
दरअसल,सौरभ दास ने पिछले दिनों गौरव भाटिया का बयान बताते हुए एक फर्जी न्यूज कार्ड को शेयर कर दिया। इसमें सौरभ दास को जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान एक दलित व्यक्ति से मारपीट करने वाले स्वतंत्र भारद्वाज को दिमागी नक्सल कहते हुए दिखाया गया था। भाटिया ने इसका खंडन करते हुए फर्जी करार दिया था। बाद में सौरभ दास ने भी माना कि यह एआई से बनाया गया था और उन्होंने इसे डिलीट कर दिया है। भाजपा नेता ने उन्हें डिलीट करने के साथ माफी मांगने को भी कहा था और ऐसा ऐसा नहीं करने पर मानहानि का मुकदमा करने की चेतावनी दी थी। सौरभ दास के माफी मांगने से इनकार पर भाटिया ने 2 करोड़ रुपये का हर्जाना मांगते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में मुकदमा दायर किया है।
जस्टिस तुषार राव गेडेला ने गुरुवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए सौरव दास और सीजेपी के दूसरे सह संयोजक आशुतोष रांका को मौका दिया कि वे विवादित पोस्ट को खुद हटा लें। जब दास के वकील ने पोस्ट पहले ही डिलीट करने की सूचना अदालत को दी तो जस्टिस गेडेला ने कहा कि उन्होंने कुछ और भी पोस्ट किए हैं, उन्हें भी हटाया जाए। अदालत ने उन्हें खुद ही विवादित पोस्ट हटाने का मौका देते हुए कहा कि यदि वे खुद ऐसा कर लेते हैं तो इसको लेकर आदेश नहीं पारित किया जाएगा।
सही-गलत परखने की समझाइस
जंतर-मंतर पर आंदोलन करके केंद्रीय शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर चुके सीजेपी नेताओं को जस्टिस गेडेला ने समझाया कि विरोध के कई तरीके हैं, लेकिन पहले सही-गलत की जांच करना जरूरी है। उन्होंने कहा, 'विरोध करने के अलग-अलग तरीके हैं। लेकिन क्या आपको ऐसा करने की आवश्यकता है? आप युवा हैं। आपकी अपनी व्यग्रता है। इसे समझा जा सकता है, लेकिन पुष्टि किए बिना इस तरह हमला करना ठीक नहीं हैं। हम आदेश नहीं देना चाहते कि आप इसे हटाइए। आप खुद ऐसा कर सकते हैं।'
दास के वकील ने बताया कि फर्जी पोस्ट को पहले ही डिलीट किया जा चुका है। इस पर अदालत ने भाटिया की एक आपत्तिजनक तस्वीर पोस्ट किए जाने की ओर इशारा करते हुए एक बार फिर समझाने की कोशिश की। अदालत ने कहा, 'हम यह कहना चाहते हैं कि बहुत अधिक व्यग्रता है। हम समझते हैं। हम भी इस उम्र से गुजरे हैं। ऐसा नहीं है कि मिस्टर भाटिया इस उम्र से नहीं गुजरे हैं। लेकिन अभिव्यक्ति...।'
क्यों अदालतों में बिताना चाहते हैं समय
गौरव भाटिया ने अदालत से कहा कि मुकदमा दायर किे जाने के बाद भी उनके खिलाफ ट्वीट किए गए। उन्होंने कहा कि इसका एक इकोसिस्टम है जो उस व्यक्ति को टारगेट करता है जो कह रहा है कि फर्जी तस्वीर शेयर की गई है। अदालत ने कहा कि उन्हें सलाह दी गई है और कहा गया है कि खुद ही हटा लें। इसके बाद जस्टिस गेडेला ने कहा, 'आप युवा हैं, आपको अभी बहुत लंबी दूरी तय करनी है। आप क्यों अपना समय अदालतों में बिताना चाहते हैं।'
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने कहा: झूठे शादी वादे से उत्पन्न यौन संबंध पर बीएनएस धारा 69 का कोई दण्ड नहीं

सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर ने कहा, सीजेपी धरने पर नोटिस जारी करने वाले अधिकारी को निलंबित किया गया

सुप्रीम कोर्ट ने BNS धारा 69 के तहत धोखे से शादी का वादा करके सेक्स को आपराधिक नहीं माना, FIR रद्द की

प्रांतीय सामाजिक बीमा एजेंसी ने स्वास्थ्य बीमा धोखाधड़ी पर कानूनी नियमों का प्रसार किया

विधायक अब्बास अंसारी ने सुरक्षा की मांग के साथ चित्रकूट जेल अवैध मुलाकातों की सुनवाई में पेश

ब्राज़ील के सर्वोच्च न्यायालय में तनाव बढ़ा, दो लगातार सत्र रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने 14 साल के दलित प्रदर्शनकारी पर हमले की कड़ी निंदा, FIR व सुरक्षा रिपोर्ट की माँग की

सुप्रीम कोर्ट ने FIR दर्ज करने का अधिकार केवल खुद तक सीमित किया, कमेटी सीधे आदेश नहीं दे सकती
ताज़ा ख़बरें
- हरियाणा में बिगड़ती सुरक्षा पर भाजपा पर अभय सिंह चौटाला का कड़ा सवाल
- सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के अपहरण‑तस्करी रोकने को तेज करने के लिए केंद्र‑राज्य सरकारों से जवाब मांगा
- सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के अपहरण‑तस्करी पर केंद्र‑राज्य सरकारों से विस्तृत जवाब की मांग
- विदेशी ड्राइविंग लाइसेंस भारत में चलाने का स्वचालित अधिकार नहीं देता, कहा पंजाब‑हरियाणा उच्च न्यायालय ने
- सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिगों की सोशल मीडिया सुरक्षा पर केंद्र सरकार को जवाब देने को कहा
- सुप्रीम कोर्ट ने गैंगस्टर अबू सलेम की रिहाई याचिका खारिज, दोहरी हिरासत की गणना अमान्य
- सुप्रीम कोर्ट ने 14 वर्षीय छात्रा के खिलाफ धमकी देने वाले असामाजिक तत्वों पर तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया
- गांगुली ने कहा शमी को नहीं किया जा रहा है नजरअंदाज़, घरेलू सफलता को सराहा

