सुप्रीम कोर्ट में फांसी सिस्टम खत्म करने की याचिका खारिज: मौत के लिए जहरीले इंजेक्शन या गोली मारने जैसे तरीकों की मांग की गई थी
- Hindi News - National - Supreme Court Rejects Plea To Abolish Hanging For Death Penalty | News सुप्रीम कोर्ट में फांसी सिस्टम खत्म करने की याचिका खारिज:मौत के लिए जहरीले इंजेक्शन या गोली मारने जैसे तरीकों की मांग की गई…

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
- Hindi News
- National
- Supreme Court Rejects Plea To Abolish Hanging For Death Penalty | News
सुप्रीम कोर्ट में फांसी सिस्टम खत्म करने की याचिका खारिज:मौत के लिए जहरीले इंजेक्शन या गोली मारने जैसे तरीकों की मांग की गई थी
- कॉपी लिंक
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मौत की सजा देने के लिए फांसी की मौजूदा व्यवस्था खत्म करने की याचिका खारिज कर दी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई आधार नहीं है, जिसके कारण फांसी को असंवैधानिक घोषित किया जाए।
याचिका में फांसी को क्रूर, अमानवीय और दर्दनाम बताया गया था। इसकी जगह जहरीले इंजेक्शन, गोली मारने जैसे चार वैकल्पिक तरीकों से मौत की सजा देने की मांग की गई थी।
SC बोला-केंद्र चाहे तो फांसी के तरीके की समीक्षा करा सकता है
कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिका खारिज करने का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में संवैधानिक समीक्षा का रास्ता बंद हो गया है। अगर ठोस वैज्ञानिक, मेडिकल या अनुभवजन्य सबूत सामने आते हैं, तो इस मुद्दे की दोबारा जांच की जा सकती है।
कोर्ट ने कहा- केंद्र सरकार विशेषज्ञों की समिति बनाकर मौजूदा फांसी की व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कर सकती है। समिति यह जांच सकती है कि क्या कोई वैकल्पिक तरीका अनावश्यक पीड़ा कम करने और दोषी की गरिमा बनाए रखने में बेहतर है।
याचिका में कहा था- कम दर्द देने वाले तरीके अपनाए जाएं
वरिष्ठ वकील ऋषि मल्होत्रा ने 2017 में यह याचिका दायर की थी। उन्होंने बताया था कि फांसी की प्रक्रिया में 40 मिनट से ज्यादा लग सकते हैं, जबकि गोली मारने में कुछ मिनट और जहरीले इंजेक्शन में करीब 5 मिनट लगने का दावा किया गया।
याचिका में CrPC की धारा 354(5) को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई थी। इसी धारा के तहत मौत की सजा पाए दोषी को गर्दन से तब तक लटकाया जाता है, जब तक उसकी मौत न हो जाए।
याचिकाकर्ता ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 में मिले जीवन और गरिमा के अधिकार के खिलाफ बताया गया। मल्होत्रा ने यह भी कहा था कि मौत की सजा पाए कैदी को फांसी और जहरीले इंजेक्शन में से कोई एक तरीका चुनने का विकल्प मिलना चाहिए।
केंद्र ने फांसी को ‘तेज और आसान’ तरीका बताया था
2018 में केंद्र ने मौजूदा व्यवस्था का बचाव किया था। गृह मंत्रालय ने हलफनामे में कहा था कि फांसी से मौत तेज और आसान होती है और इससे कैदी की पीड़ा अनावश्यक रूप से नहीं बढ़ती। केंद्र ने जहरीले इंजेक्शन और गोली मारने जैसे तरीकों को भी कम पीड़ादायक मानने से इनकार किया था।
SC ने फांसी के तरीके पर डेटा मांगा
मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी से होने वाली पीड़ा, मौत में लगने वाले समय और इससे जुड़ी व्यवस्थाओं पर केंद्र से बेहतर डेटा मांगा था। कोर्ट ने इस मुद्दे की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने पर भी विचार किया था।
मई 2023 में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने बताया था कि उन्होंने मौत की सजा के लिए बेहतर विकल्प की जांच करने वाली विशेषज्ञ समिति बनाने की सिफारिश की है। केंद्र सरकार समिति के सदस्यों पर विचार कर रही थी।
देश के 3 चर्चित मामले, जिनमें फांसी पर बहस हुई
- धनंजय चटर्जी केस (2004): हेतल पारेख के रेप-हत्या मामले में दोषी धनंजय को 14 अगस्त 2004 को अलीपुर जेल में फांसी दी गई। मानवाधिकार संगठनों और शिक्षाविदों ने मौत की सजा और फांसी के तरीके पर सवाल उठाए।
- अजमल कसाब केस (2012): 26/11 मुंबई हमले के दोषी अजमल कसाब को 21 नवंबर 2012 को यरवदा जेल में फांसी दी गई। मामले में आतंकवाद के लिए मौत की सजा और इसे लागू करने के तरीके को लेकर बहस हुई।
- निर्भया केस (2020): 2012 गैंगरेप-हत्या मामले के चार दोषियों को 20 मार्च 2020 को तिहाड़ जेल में फांसी दी गई।दया याचिकाओं और कानूनी विकल्पों के चलते फांसी कई बार टली, जिससे मौत की सजा की प्रक्रिया पर बहस हुई।
- दिल्ली पुलिस बोली- CJP का संसद मार्च गैरकानूनी था: सुप्रीम कोर्ट में कहा- हिस्ट्रीशीटर शामिल हुए, बैरिकेड तोड़े, लेकिन हमने ज्यादा बल प्रयोग नहीं किया
- LIVEUP के 25 शहरों में बारिश, घर-थाने-अस्पताल में पानी भरा: बंगाल के आसनसोल में बाढ़; राजस्थान-दिल्ली समेत 14 राज्यों में अलर्ट
- जंतर-मंतर प्रदर्शन पर रिजिजू बोले- गोली कहां चली: जेन-जी हमारे बच्चे, उनसे बातचीत जरूरी; अभिजीत दीपके AAP कार्यकर्ता, छात्र नेता कैसे बन गए
- मोहाली- पीड़िता ने बताई रेप की कहानी: डॉक्टर ने काम पर बुलाया, कमरे में बंद कर जबरन शारीरिक संबंध बनाए, पीरिएड्स न आने से डरा, अबॉर्शन किया
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र | Supreme Court Weekly Round-Up, Supreme Court, Weekly Round-Up

आज, 23 अगस्त को, राष्ट्रीय सभा ने छह मसौदा कानूनों को मंजूरी देने के लिए मतदान किया।

राष्ट्रीय विधानसभा ने कई महत्वपूर्ण कानूनों और संहिताओं को पारित करने के लिए मतदान किया।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बंद कमरे में जातिसूचक गाली देने पर SC/ST कानून लागू नहीं, जानिए ‘Public View’ की कानूनी शर्त

राष्ट्रीय विधानसभा ने छह कानूनों को पारित करने के लिए मतदान किया और दंड संहिता में संशोधनों पर चर्चा की।

"गांवों को कानून की समझ" मॉडल का शुभारंभ समारोह: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गांवों तक कानून को पहुंचाना।

झारखंड हाईकोर्ट में आपराधिक अपीलों का 'चौंकाने वाला पेंडिंग मामला': सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में 44 साल की देरी पर चिंता जताई

वकील मुवक्किल के खिलाफ गोपनीय जानकारी का इस्तेमाल सिर्फ इसलिए नहीं कर सकता क्योंकि वह विरोधी बन गई है: सुप्रीम कोर्ट
ताज़ा ख़बरें
- यमुना पर्यावरणः आर्ट ऑफ लिविंग पर लगा था 5 करोड़ जुर्माना, लौटाने का सुप्रीम आदेश - Supreme court orders refund rs 5 crore fine sri sri ravishankars art of living yamuna environment - Satya Hindi
- ‘जब तक वकील चाहेंगे, मैं BCI चेयरमैन रहूंगा’, सुप्रीम कोर्ट में याचिका के बीच मनन मिश्रा का करारा पलटवार
- मां की गवाही से दोषी ठहरा बेटा, धनबाद की अदालत ने भाई की पत्नी पर कुल्हाड़ी से हमले के आरोपी को दी 7 साल की सजा - dhanbad court benu gorai gets 7 years for axe attack on sister in law
- रियल एस्टेट व्यापार कानून: रियल एस्टेट बाजार में हेरफेर करने के सख्त निषिद्ध कृत्य
- सऊदी नहीं इन देशों का कानून है सबसे सख्त, छोटी सी गलती पर मिलती है मौत!
- सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्रार के खिलाफ मामला रद्द किया, कहा- एफआईआर के पीछे गुटीय विवाद आपराधिक दोषी नहीं | आपराधिक कानून का इस्तेमाल गुटीय झगड़ों को निपटाने के लिए नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामला रद्द किया
- कांग्रेस देश के कानून और संविधान से ऊपर नहीं : नितिन नवीन
- 2008 के रंगदारी मामले में दिल्ली पुलिस को बड़ी सफलता, 15 साल बाद कानून के शिकंजे में आया 72 साल का भगोड़ा

