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कोर्ट का निर्णय: 60 वर्षीय बुजुर्ग को दुष्कर्म मामले में बरी करने का फैसला

पंचकूला अदालत ने चार साल पुराने दुष्कर्म मामले में 60 वर्षीय बुजुर्ग को बरी कर दिया। अदालत ने साक्ष्य अपर्याप्त पाए और गवाहों के बयानों में विरोधाभास के कारण आरोप साबित नहीं होने का निर्णय लिया। यह मामला रंजिश के चलते दर्ज किया गया था।

11 जुलाई 2026 को 06:59 am बजे
कोर्ट का निर्णय: 60 वर्षीय बुजुर्ग को दुष्कर्म मामले में बरी करने का फैसला

सौजन्य से:- Jagran

दुष्कर्म केस में 60 वर्षीय बुजुर्ग चार साल बाद बरी, पंचकूला Court का फैसला; रंजिश में दर्ज कराया था मुकदमा

पंचकूला अदालत ने चार साल पुराने दुष्कर्म मामले में 60 वर्षीय बुजुर्ग को बरी किया। अदालत ने साक्ष्य अपर्याप्त पाए और गवाहों के बयानों में विरोधाभास के ...और पढ़ें

HighLights

- पंचकूला कोर्ट ने सुनाया फैसला।

- आरोप साबित नहीं हुए, साक्ष्य अपर्याप्त।

- गवाहों के बयानों में विरोधाभास।

जागरण संवाददाता, पंचकूला। करीब चार साल पुराने दुष्कर्म मामले में पंचकूला की अदालत ने 60 वर्षीय आरोपित को बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा और प्रस्तुत साक्ष्य दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 26 मार्च 2022 को 13 वर्षीय किशोरी अपनी सहेली से मिलकर घर लौट रही थी। आरोप था कि आरोपित ने उसके पिता के 50 रुपये लौटाने का बहाना बनाकर उसे अपनी दुकान में बुलाया और दरवाजा बंद कर उसके साथ जबरदस्ती की।

शिकायत में यह भी कहा गया था कि बच्ची के शोर मचाने पर आसपास के लोगों ने दरवाजा खोलकर उसे बाहर निकाला। बचाव पक्ष के अधिवक्ता केतन खुराना ने अदालत में दलील दी कि घटना वाले दिन ही दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था, जिसके संबंध में थाने में कलंदरा दर्ज किया गया था।

उनका कहना था कि इसी रंजिश के चलते कुछ दिन बाद उनके मुवक्किल के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने शिकायतकर्ता और अन्य गवाहों के बयानों में कई महत्वपूर्ण विरोधाभास पाए।

अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों के समर्थन में विश्वसनीय और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों का मूल्यांकन करने के बाद अदालत ने आरोपित को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

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