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'अगर आप वफादार हैं..': तलाक विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने महिला से पूछा- बच्चे के पैटरनिटी टेस्ट पर आपत्ति क्यों

सु्प्रीम कोर्ट ने तलाक के एक विवाद में बच्चे के पैटरनिटी टेस्ट का विरोध करने वाली पत्नी की याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने महिला से सवाल किया है कि अगर वह वफादार है तो फिर जांच से दिक्कत क्यों है। नई दिल्ली: एक व…

20 अगस्त 2026 को 04:55 am बजे
'अगर आप वफादार हैं..': तलाक विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने महिला से पूछा- बच्चे के पैटरनिटी टेस्ट पर आपत्ति क्यों

सौजन्य से:- Navbharat Times

सु्प्रीम कोर्ट ने तलाक के एक विवाद में बच्चे के पैटरनिटी टेस्ट का विरोध करने वाली पत्नी की याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने महिला से सवाल किया है कि अगर वह वफादार है तो फिर जांच से दिक्कत क्यों है।

नई दिल्ली: एक वैवाहिक विवाद में बच्चे के पैटरनिटी टेस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी लाइन खींच दी है और डीएनए टेस्ट के लिए महिला की आपत्ति को यह कहकर ठुकरा दिया है कि अगर वह अपने वैवाहिक जीवन में वफादार रही तो फिर उसे अपने बच्चे के पैटरनिटी टेस्ट कराने पर ऐतराज क्यों है।

वफादार हैं तो पैटरनिटी टेस्ट पर आपत्ति क्यों-सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वैवाहिक जीवन में पैदा हुए बच्चे की वैद्यता पर सवाल नहीं उठाया जाता। लेकिन, अगर पति अपनी पत्नी के कथित अनैतिक चरित्र की वजह से तलाक लेना चाहता है और दावा करता है कि विवाह के दौरान पैदा हुए बच्चे का वह बायोलॉजिकल पिता नहीं है, तो उसका पैटरनिटी टेस्ट कराया जा सकता है। हमारे सहयोगी अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने यह रिपोर्ट दी है।

अगर आप वफादार हैं तो आपको टेस्ट से आपत्ति क्यों होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट

तलाक केस में पत्नी ने पैटरनिटी टेस्ट का विरोध किया था

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना भालचंद्र वरले की बेंच ने महिला की वह याचिका खारिज कर दी है, जिसमें उसने अपने बच्चे के पैटरनिटी टेस्ट का विरोध किया था।

महिला की दलील थी कि यह कानून का स्थापित सिद्धांत है कि किसी भी पार्टी को डीएनए टेस्ट के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

उसने अदालत से गुहार लगाई थी कि उसके पति की तलाक याचिका पर बिना पैटरनिटी टेस्ट के फैसला सुनाया जाए।

पति का तर्क था कि चरित्र पर लगे आरोपों को सिर्फ डीएनए टेस्ट से ही साबित किया जा सकता है।

पति की इस दलील पर पुणे की फैमिली कोर्ट ने डीएनए टेस्ट का निर्देश दिया था, जिसपर बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी मुहर लगाई थी।

अब सुप्रीम कोर्ट ने भी बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है।

पति ने निजी तौर पर पहले करवा लिया था डीएनए टेस्ट

इस मामले में पति ने निजी तौर पर डीएनए टेस्ट पहले ही करा लिया, जिसका रिजल्ट निगेटिव आया था।

इसी रिपोर्ट के आधार पर पति को विश्वास हो गया कि वह उस बच्चे का बायोलॉजिकल पिता नहीं है।

इसी रिपोर्ट के आधार पर उसने पत्नी से तलाक की याचिका दायर की और अपने आरोपों को साबित करने के लिए कोर्ट से डीएनए टेस्ट का निर्देश देने की गुहार लगाई।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा था?

बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पति ने हैदराबाद की एक लैब की जो डीएनए रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखी है, उससे प्राथमिक तौर पर यह निष्कर्ष निकलता है कि उसके पिता होने की संभावना 'शून्य' है।

हाई कोर्ट ने कहा कि पहला नतीजा ये है कि इस आधार पर डीएनए टेस्ट कराने का निर्देश दिया जा सकता है।

अदालत के मुताबिक याचिका में दिए गए बयानों से यह भी पता चलता है कि पत्नी के चरित्रहीन होने का संदेह ही पति की ओर से तलाक मांगे जाने का मुख्य आधार है।

हाई कोर्ट ने कहा कि डीएनए टेस्ट से यह साबित हो सकता है कि याचिका में बताए गए बेटे का वह बायोलॉजिकल पिता है या नहीं।

इसी आधार पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपों को देखते हुए इसे साबित करने के लिए डीएनए टेस्ट के बिना निर्णायक सबूत जुटाना मुश्किल है।

इसलिए, मेरी राय में डीएनए जांच का आदेश देते समय अदालत की ओर से ध्यान में रखे जाने वाले 'अति आवश्यक जरूरत' के पैमाने को पति ने पूरा किया है।

बॉम्बे हाई कोर्ट

लेखक के बारे मेंअंजन कुमारअंजन कुमार, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में असिस्टेंट एडिटर हैं और पिछले 24 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता कर रहे हैं। अंजन अप्रैल 2025 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़े और बीते 10 वर्षों से डिजिटल मीडिया में राजनीति,चुनाव, जुडिशरी, डिफेंस, विदेश,करेंट अफेयर्स और बिजनेस जैसे विषयों पर लिख रहे हैं। डिजिटल मीडिया से जुड़ने के शुरुआती वर्षों में ये देश की एक टॉप लीडरशिप के आधिकारिक और राजनीतिक भाषणों और उनके पुस्तकों के संपादन कार्यों में भी योगदान दे चुके हैं। इन्होंने करियर का आरंभ टेलीविजन पत्रकारिता से किया और 14 वर्षों तक विभिन्न टीवी न्यूज चैनलों में सेवाएं दीं। इस कार्यकाल में इन्होंने सहारा समय नेशनल न्यूज चैनल पर 2006 में कन्या भ्रूण हत्या पर किए गए एक ऐतिहासिक स्टिंग ऑपरेशन पर बने'कोख में कत्ल' प्रोग्राम सीरीज को प्रोड्यूस किया, जो उन दिनों भारतीय संसद में भी छाया रहा। यहीं पर इन्होंने अगले ही साल पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े कार्यक्रमों पर न्यूज सीरीज बनाए, जिसकी देश की मीडिया में काफी चर्चा हुई। आगे के वर्षों में इसी चैनल पर 'मुर्दा, मवेशी, माफिया' प्रोग्राम सीरिज को भी पेश किया, जो दिल्ली-एनसीआर में मरे हुए मवेशियों का मांस बेचने वाली माफिया के खतरनाक स्टिंग ऑपरेशन पर आधारित था। ये 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव और 2004 के आम चुनावों से लेकर 2024 के आम चुनावों और 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव तक को टीवी और डिजिटल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म के लिए कवर कर चुके हैं।... और पढ़ें

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