क़ानून तो कड़े, पर जमीन पर सुरक्षा का अभाव: दिल्ली से दूर‑दराज़ तक समान कहानी
2012 के बाद महिला सुरक्षा के लिये कई कड़े कानून बनाए गए, फिर भी दिल्ली, पंजाब से लेकर छोटे कस्बों तक यौन अपराधों में कोई स्पष्ट गिरावट नहीं आई। हाल ही में दिल्ली के विश्वविद्यालयों में छात्रों ने बेहतर सुरक्षा की मांग करते हुए मार्च किया, जबकि ग्रेटर नोएडा, जमुई, बंगा और समस्तीपुर जैसे स्थानों में नई‑नई अत्याचार की घटनाएँ सामने आईं, जो दिखाती हैं कि कागज़ी कानून और वास्तविक सुरक्षा के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है।

सौजन्य से:- Prabhat Khabar
कागजों में कड़े कानून, जमीन पर असुरक्षा : दिल्ली से दूर-दराज तक एक ही हाल
देश भर में महिला सुरक्षा पर बहस तेज है. सितंबर के अंत में एक सप्ताह के भीतर दो बार राजधानी दिल्ली की सड़कों पर छात्राओं समेत सैकड़ों छात्रों ने मार्च निकाला, नारे लगाये और तख्तियां पकड़ीं, जिनमें मजबूत सुरक्षा उपायों की मांग के दर्ज थी...
Women's Safety in India 2026 : सितंबर के अंत में एक सप्ताह के दरमियान देश के सबसे बड़े उच्च शिक्षा संस्थानों में शुमार दिल्ली यूनिवर्सिटी के दो प्रमुख कॉलेजों में छात्राओं ने महिला सुरक्षा की मांग लेकर मार्च निकाला. सितंबर की 23 तारीख को लेडी श्रीराम कॉलेज की छात्राओं ने मार्च निकाला और 28 सितंबर को फिर डीयू के ही मिरांडा हाउस से कला संकाय तक 3,000 से अधिक छात्रों ने मार्च निकाला. राजधानी दिल्ली, पंजाब से लेकर छोटो शहरों-कस्बों तक अपनी सुरक्षा की मांग और सुरक्षा के नाम पर घर में कैद रहने की नसीहतों के खिलाफ उठ रही छात्राओं की यह आवाज बताती है कि 2012 के बाद से अब तक कहीं कुछ नहीं बदला है. दिल्ली में 14 साल पहले 16 दिसंबर, 2012 को घटित जघन्य निर्भया कांड के बाद हुए देश भर में हुए ऐतिहासिक जनआंदोलन के चलते बेशक महिला सुरक्षा कानून सख्त हुआ, पर यौन अपराध में कोई खास गिरावट नहीं आई.
जमुई से लेकर दिल्ली तक जारी महिला अपराधों का सिलसिला
- 8 अगस्त- ग्रेटर नोएडा के परी चौक से कश्मीरी गेट जा रही स्लीपर बस में 16 वर्षीय छात्रा के साथ ड्राइवर और कंडक्टर द्वारा दुष्कर्म की घटना सामने आई.
- 18 सितंबर- राजधानी दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में तीन युवकों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर एक 17 वर्षीय नाबालिग के साथ सामूहिक दुर्ष्कम किया.
- बिहार के जमुई में 19 सितंबर, 2026 को मोरल पुलिसिंग के नाम पर कोचिंग से लौट रही 10वीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा और उसके दोस्त के साथ भीड़ ने बेहद बर्बर और शर्मनाक व्यवहार किया .
- बांका के मंदार हिल में मोरल पुलिसिंग करने आये युवकों द्वारा एक युवती के साथ सार्वजनिक तौर पर अभद्रता, मारपीट और उत्पीड़न का वीडियो वायरल हुआ.
- समस्तीपुर में बूढ़ी गंडक नदी बांध, बाइपास (जगतसिंहपुर गांव) के पास एक नाबालिग लड़की के साथ सरेआम छेड़खानी और बदसलूकी की घटना सामने आई.
महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हैं कई सख्त कानून
भारत में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई सख्त और विशेष कानून हैं-
- क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) एक्ट, 2013 और 2018 (निर्भया कानून) : इसके जरिये यौन अपराधों के खिलाफ और अधिक कठोर दंड का प्रावधान किया गया, जिसमें 12 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ बलात्कार के मामलों में मृत्युदंड (फांसी) सहित कठोरतम सजा का प्रावधान प्रावधान शामिल है.
- पोक्सो अधिनियम, 2012 : 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों और बच्चों को यौन शोषण, उत्पीड़न व पोर्नोग्राफी से बचाने के लिए विशेष रूप से लागू किये गये इस कानून में फास्ट-ट्रैक अदालतों के जरिए तुरंत सुनवाई और कड़ी सजा का प्रावधान है.
- स्टॉकिंग और वॉयरिज्म : किसी महिला का पीछा करना और उसकी निजता का उल्लंघन कर तस्वीरें/वीडियो बनाना भारतीय न्याय संहिता के तहत गैर-जमानती और कठोर अपराध हैं.
- घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005 : यह कानून महिलाओं को शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, आर्थिक और मौखिक उत्पीड़न से बचाता है. इसके तहत पीड़िता को घर से बेदखल होने से रोकने, सुरक्षा आदेश पाने और गुजारा भत्ता प्राप्त करने का सीधा कानूनी अधिकार मिलता है.
- दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 : इसमें कुल 10 धाराएं हैं. दहेज लेना, देना या इसके लेन-देन में सहयोग करना कानूनी अपराध है. दहेज प्रताड़ना (बीएनएस सेक्शन 85/आइपीसी 498ए) और दहेज मृत्यु (बीएनएस सेक्शन 80 /आइपीसी 304बी) के मामलों में सख्त जेल की सजा का प्रावधान है.
- स्त्री अशिष्ट रूपण (प्रतिषेध) अधिनियम, 1986 : यह मीडिया, विज्ञापनों, फिल्मों, पत्रिकाओं या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर महिलाओं को अश्लील या अपमानजनक रूप में प्रदर्शित करने पर रोक लगाता है.
- अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 : महिलाओं और बच्चों की तस्करी और यौन शोषण के व्यावसायिक उपयोग को रोकने के लिए बनाया गया यह कानून अपराधी को कड़ी सजा और पीड़ित को पुनर्वास का कानूनी ढांचा प्रदान करता है.
- कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न निवारण अधिनियम, 2013 : भारत में महिलाओं को कार्यस्थल पर सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल देने वाला मुख्य कानून है, जो 9 दिसंबर 2013 से लागू है.
अब बेटों के सुधार पर ध्यान देने का समय
महिला अधिकार कार्यकर्ता और पीपल अगेंस्ट रेप इन इंडिया संस्थापक योगिता भयाना कहती हैं, बेशक देश में कानून के स्तर पर बहुत काम हो चुका है, अब बेटों के सुधार पर ध्यान देने का समय है. बहुत जरूरी है कि बेटों की परवरिश और सामाजिक चेतना में सुधार हो. स्कूलों में नैतिक शिक्षा में एक चैप्टर शामिल किया जाना चाहिए, जो महिलाओं के लिए एक खुला, सम्मानजनक और सुरक्षित समाज बनने का सबक सिखाये. योगिता कहती हैं,'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के अब तक 138 एपिसोड आ चुके हैं, मैं उनसे गुजारिश करूंगी कि कभी इस कार्यक्रम में पीएम समाज में बेटों की सही परवरिश और उचित व्यवहार पर भी कोई संदेश दें.' योगिता भयाना का मानना है कि लड़कियों के लिए समाज में संवेदनशीलता का अभाव ऐसे अपराध का कारण बनता है और अब घटनाओं के वीडियों के जरिये पीड़िता की निजता का हनन भी हो रहा है. वह कहती हैं- बीते दिनों घटित कई मामलों में सोशल मीडिया में वीडियो आने के बाद कार्रवाई हुई, लेकिन अपराध के वीडियो या फोटो सार्वजनिक होने से पीड़िता की पहचान उजागर होती है, जो उसकी सामाजिक स्थिति को और खराब करती है. उच्च स्तर पर बैठे नेताओं का भी ऐसी तस्वीरों को साझा करना कानूनी समझ और संवेदनशीलता की भारी कमी को दर्शाता है. ऐसा क्यों नहीं हो सकता कि पुलिस जवाबदेही के साथ रिपोर्ट दर्ज करे और शासन में पीड़िता की निजता के प्रति संवेदनशीलता आये. मोरल पुलिसिंग के नाम पर लड़कियों के पहनावे और निजता पर पहले भी हमले होते रहे हैं और अब तो ये हमले यौन हमले में तब्दील होते जा रहे हैं. जबकि, भारतीय कानून में 'मोरल पुलिसिंग' का कोई कानूनी आधार नहीं है.
संकट की स्थिति में ऐसे बचाएं खुद को
• तुरंत आपातकालीन नंबर 112 पर कॉल करें, शोर मचाएं और नजदीकी सुरक्षित स्थान की ओर भागने का प्रयास करें.
• घटना के बाद अगर स्थानीय पुलिस शिकायत दर्ज करने से मना करती है, तो आप भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173(4) के तहत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, जैसे एसएसपी एवं एसपी के पास लिखित शिकायत भेज सकती हैं या सीधे मजिस्ट्रेट की अदालत का रुख कर सकती हैं.
• यदि घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया जाता है , तो बीएनएस एवं आइटी एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.
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