होम›अपराध›सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस की जांच पर लगाई तीखी फटकार, CBI को सौंपने की माँग
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस की जांच पर लगाई तीखी फटकार, CBI को सौंपने की माँग

सुप्रीम कोर्ट ने घर में घुसकर मारपीट और छेड़छाड़ के मामले में यूपी पुलिस की कार्यवाही पर गंभीर आलोचना की, जहाँ आरोपी को मौके पर ही पकड़कर भी एफआईआर में अज्ञात लिखा गया और वाहन नंबर एवं समय में विसंगतियां पाई गईं। न्यायमूर्ति संजय कुमार और संजीव सचदेवा ने पुलिस को भंग कर सभी मामलों को CBI को सौंपने की सिफारिश की और अगली सुनवाई में संबंधित अधिकारी को स्पष्ट हलफना‑मा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

30 सितंबर 2026 को 03:04 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस की जांच पर लगाई तीखी फटकार, CBI को सौंपने की माँग

सौजन्य से:- Jagran

'उत्तर प्रदेश पुलिस को भंग कर सभी जांच CBI को दे दिया जाए', सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा ऐसा?

सुप्रीम कोर्ट ने छेड़छाड़ के एक मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई, जहां आरोपी को ...और पढ़ें

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को घर में घुसकर मारपीट और छेड़छाड़ के एक मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते कड़ी फटकार लगाई। कहा पुलिस ने आरोपी को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया था फिर भी अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया।

कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि बेहतर हो कि यूपी पुलिस को भंग कर दिया जाए और इसके सभी मामले सीबीआइ को जांच के लिए दे दिये जाएं।

ये तीखी टिप्पणियां न्यायमूर्ति संजय कुमार और संजीव सचदेवा की पीठ ने बुलंदशहर जिले में छेड़छाड़ के एक मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत रद करने की याचिका पर सुनवाई के दौरान कीं।

UP पुलिस को भंग कर सभी जांच CBI को दे दिया जाए: SC

कोर्ट ने थाना अध्यक्ष को अगली सुनवाई पर मौजूद रहने का निर्देश दिया है। पीठ ने कहा आप इसी तरह काम करते हैं। हमने कई मामलों में कमियां देखी हैं। आपका कोई न कोई एजेंडा होता है।

अगर आप मामलों को इस तरह संभालेंगे तो लोग आप पर कैसे भरोसा करेंगे। बेहतर होगा कि हम सीबीआई से कहें कि वह यूपी पुलिस की सभी जांचें अपने हाथ में ले ले। इससे तो अच्छा है कि हम यूपी पुलिस को भी भंग कर दें।

याचिकाकर्ता का दावा था कि पुलिस ने अज्ञात मोटरसाइकिल सवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की, जबकि संदिग्ध को मौके पर ही पकड़ कर स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया था।

यह भी कहा कि जिस मोटरसाइकिल की बात हो रही है, जब्त किये जाने के समय उस पर कोई नंबर प्लेट नहीं थी, लेकिन जांच के दौरान उसे रहस्यमय तरीके से रजिस्ट्रेशन नंबर दे दिया गया। आरोप लगाया कि उन्होंने सुबह शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन रिकार्ड में समय रात नौ बजे का दिखाया गया है।

कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस का पक्ष रख रहे वकील से सवाल किया कि अगर व्यक्ति को मौके पर ही पकड़ लिया गया था, तो आपने अज्ञात क्यों लिखा? लोग पुलिस पर भरोसा कैसे करेंगे?

FIR में क्यों नहीं लिखते आरोपी का नाम: सुप्रीम कोर्ट

बेंच ने पूछा कि आप आरोपी को मौके पर ही पकड़ लेते हैं लेकिन एफआईआर में उसका नाम नहीं लिखना चाहते। शायद, अगर बात बन जाए, तो आप नाम बदल सकते हैं, आपने अलग अलग एफआईआर में आरोपियों की लिस्ट रखी होगी, और जिस पर कम एफआईआर दर्ज हों, उसका नाम शामिल कर सकते हैं। क्या ऐसा ही होता है?

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यूपी पुलिस का हलफनामा बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं है। नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें यह बताया जाए कि एफआइआर में आरोपी का नाम क्यों शामिल नहीं किया गया था।

पीठ ने कहा कि अगली सुनवाई पर अधिकारी को पेश होना होगा और बेहतर हलफनामा देकर यह स्पष्ट करना होगा कि अज्ञात मोटरसाइकिल सवार के खिलाफ एफआइआर क्यों दर्ज की गई, जबकि यह सर्वविदित तथ्य है कि उक्त मोटरसाइकिल सवार को मौके पर ही पकड़ लिया गया था।

कोर्ट ने कहा कि हलफनामे में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि एफआईआर में शुरू में नाम क्यों नहीं लिखा गया और बाद में क्यों जोड़ा गया।

यह भी पढ़ें- एसिड अटैक पीड़ितों को ट्रेन में मिलेगी छूट, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में ड्राफ्ट तैयार करने की दी जानकारी

यह भी पढ़ें- भारत में 18 साल से कम उम्र वालों के लिए सोशल मीडिया पर लगेगा बैन? सरकार ने बताई सच्चाई

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस की ‘अज्ञात’ FIR पर की तीखी फटकार, आरोपी को मौके पर पकड़े जाने के बाद भी नाम नहीं लिखा गया
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस की ‘अज्ञात’ FIR पर की तीखी फटकार, आरोपी को मौके पर पकड़े जाने के बाद भी नाम नहीं लिखा गया

गुजरात हाईकोर्ट ने असरम को 20‑दिन की अस्थायी जमानत नहीं दी, वीडियो कॉल की सुविधा दी
अपराध

गुजरात हाईकोर्ट ने असरम को 20‑दिन की अस्थायी जमानत नहीं दी, वीडियो कॉल की सुविधा दी

गुजरात हाईकोर्ट ने असरम बापू को पत्नी से मिलने के लिए अंतरिम जमानत से इनकार, वीडियो कॉल की अनुमति दी
अपराध

गुजरात हाईकोर्ट ने असरम बापू को पत्नी से मिलने के लिए अंतरिम जमानत से इनकार, वीडियो कॉल की अनुमति दी

दिल्ली की अदालत ने महिला की शालीनता ठेस पहुँचाने वाले टिप्पणी के लिए पुरुष को दंडित किया
अपराध

दिल्ली की अदालत ने महिला की शालीनता ठेस पहुँचाने वाले टिप्पणी के लिए पुरुष को दंडित किया

सुप्रीम कोर्ट सर्वे में उजागर: हर 11 छात्रों में से 1 को आया आत्महत्या का विचार
अपराध

सुप्रीम कोर्ट सर्वे में उजागर: हर 11 छात्रों में से 1 को आया आत्महत्या का विचार

क़ानून तो कड़े, पर जमीन पर सुरक्षा का अभाव: दिल्ली से दूर‑दराज़ तक समान कहानी
अपराध

क़ानून तो कड़े, पर जमीन पर सुरक्षा का अभाव: दिल्ली से दूर‑दराज़ तक समान कहानी

SC ने फायरक्रैकर्स पर समय-सीमा तय करके पूर्ण प्रतिबंध से इंकार किया
अपराध

SC ने फायरक्रैकर्स पर समय-सीमा तय करके पूर्ण प्रतिबंध से इंकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने तय किया कि अभियुक्त को प्रॉसिक्यूशन के अप्रयुक्त दस्तावेज़ों की प्रतिलिपि हेतु उचित चरण में मांग का अधिकार
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने तय किया कि अभियुक्त को प्रॉसिक्यूशन के अप्रयुक्त दस्तावेज़ों की प्रतिलिपि हेतु उचित चरण में मांग का अधिकार

ताज़ा ख़बरें