होमवकीलबॉम्बे हाईकोर्ट में न्यायिक अधिकारी घुमारे के आक्रामक स्वर पर सुप्रीम कोर्ट ने राहत नहीं दी
वकील

बॉम्बे हाईकोर्ट में न्यायिक अधिकारी घुमारे के आक्रामक स्वर पर सुप्रीम कोर्ट ने राहत नहीं दी

सेप्टेंबर की सुनवाई में 179 नए पदों की रिक्तियों से जुड़े हलफनामे पर प्रश्न उठाते हुए न्यायिक अधिकारी दिलीप एस. घुमारे ने कोर्ट में ऊँची आवाज़ में प्रतिक्रिया दी, जिससे उन्हें अवमानना का नोटिस मिला। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि माइक्रोफ़ोन न होने के कारण आवाज़ तेज़ करनी पड़ी, पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को रोकने से इनकार कर दिया और अगले सुनवाई तक फैसला स्थगित नहीं किया।

11 सितंबर 2026 को 03:04 pm बजे
बॉम्बे हाईकोर्ट में न्यायिक अधिकारी घुमारे के आक्रामक स्वर पर सुप्रीम कोर्ट ने राहत नहीं दी

सौजन्य से:- Navbharat Times

179 पदों को लेकर हुआ था विवाद

मामला एक सितंबर को बॉम्बे हाई कोर्ट में हुई सुनवाई से जुड़ा है। जस्टिस ए.एस. गडकरी और जस्टिस कमल खाता की पीठ फास्ट ट्रैक अदालतों के लिए स्वीकृत 179 नए पदों की रिक्तियों से संबंधित हलफनामे पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने राज्य सरकार के वकील से हलफनामे में दी गई जानकारी के संबंध में सवाल किया। उस समय अदालत में मौजूद घुमारे से स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया। हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक, घुमारे ने कथित तौर पर आक्रामक और ऊंची आवाज में जवाब दिया तथा 179 पदों को नहीं भरने के लिए हाई कोर्ट प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। हाई कोर्ट ने उनके व्यवहार को गंभीरता से लेते हुए उनके खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया था। अदालत ने कहा था कि उनका “अनावश्यक आक्रोश और आक्रामक रवैया” खुले कोर्ट में प्रदर्शित हुआ और इससे अदालत की गरिमा तथा अधिकार को कमजोर करने का प्रयास हुआ।

‘माइक पर नहीं था, इसलिए आवाज ऊंची करनी पड़ी’

घुमारे की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उनके मुवक्किल ने हाई कोर्ट पर चिल्लाया नहीं था। वह माइक के पास खड़े नहीं थे, इसलिए अपनी बात सुनाने के लिए उन्होंने आवाज ऊंची की थी। सिंह ने यह भी बताया कि घुमारे ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली है, लेकिन तबादले के कारण उन्हें तीन महीने उस इलाके में सेवा देनी होगी, जिसे उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि वह इलाका करीब 1,000 किलोमीटर दूर है और घुमारे को वहां जाना पड़ेगा।

‘आप इतने गुस्सैल हैं तो न्यायिक सेवा के योग्य नहीं’

पीठ ने घुमारे के इस्तीफे पर सवाल उठाते हुए कहा कि उचित रास्ता बिना शर्त माफी मांगना था। कोर्ट ने टिप्पणी की, “आपने इस्तीफा क्यों दिया? अगर आप इतने गुस्सैल हैं तो न्यायिक सेवा के योग्य नहीं हैं। हम हाई कोर्ट के आदेश पर रोक नहीं लगाएंगे। सिंह ने कहा कि घुमारे हाई कोर्ट के समक्ष पहले ही माफी मांग चुके हैं और हाई कोर्ट के आदेश में भी इसका उल्लेख है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

हाई कोर्ट को अंतिम फैसला सुनाने से रोका

घुमारे के तबादले को लेकर सिंह ने कहा कि जिस तरीके से कार्रवाई हुई, उससे गलत संदेश जाएगा। उन्होंने कहा कि अधिकारी को अगले ही दिन नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी न्यायिक अधिकारी को अदालत में खड़े होकर हाई कोर्ट से यह कहने का अधिकार नहीं है कि उसने पद नहीं भरे हैं। पीठ ने इसे “घोर अनुशासनहीनता” करार दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक अवमानना मामले में अंतिम फैसला न सुनाया जाए। पीठ ने मामले को 28 सितंबर को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
आज 13 बेंचों के साथ राष्ट्रीय लोक अदालत का सत्र, 10 बजे से शुरू
वकील

आज 13 बेंचों के साथ राष्ट्रीय लोक अदालत का सत्र, 10 बजे से शुरू

त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने राजमार्गों के 'मौत के जाल' पर चौंकाने वाली चेतावनी जारी की
वकील

त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने राजमार्गों के 'मौत के जाल' पर चौंकाने वाली चेतावनी जारी की

बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुणे के 10‑दिन के शराब प्रतिबंध पर सवाल उठाया
वकील

बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुणे के 10‑दिन के शराब प्रतिबंध पर सवाल उठाया

सारण के बंगरा गांव से पटना हाई कोर्ट तक: अवधेश कुमार सिंह की नई नियुक्ति
वकील

सारण के बंगरा गांव से पटना हाई कोर्ट तक: अवधेश कुमार सिंह की नई नियुक्ति

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अवमानना कार्यवाही को न ठहराया, हाईकोर्ट को दिया जवाब का आदेश
वकील

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अवमानना कार्यवाही को न ठहराया, हाईकोर्ट को दिया जवाब का आदेश

बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुणे में गणेश उत्सव के 10‑दिन के शराब प्रतिबंध को अनुचित कहा, वापस लेने का आदेश दिया
वकील

बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुणे में गणेश उत्सव के 10‑दिन के शराब प्रतिबंध को अनुचित कहा, वापस लेने का आदेश दिया

राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर दुर्घटना मामलों का त्वरित निपटारा
वकील

राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर दुर्घटना मामलों का त्वरित निपटारा

सुप्रीम कोर्ट ने सत्य निकेतन मामले में हाई कोर्ट की निगरानी को बरकरार रखा
वकील

सुप्रीम कोर्ट ने सत्य निकेतन मामले में हाई कोर्ट की निगरानी को बरकरार रखा

ताज़ा ख़बरें