सुप्रीम कोर्ट ने जाम्बिया में रहने वाले NRI के विरुद्ध यौन उत्पीड़न FIR को रद्द किया, शादी के झूठे वादे को बेईमानी नहीं माना
सुप्रीम कोर्ट ने 7 सितंबर को यह आदेश दिया कि NRI के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द किया जाए, क्योंकि शिकायत में सहमति से बने संबंध का संकेत मिला और धोखा सिद्ध नहीं हुआ। मामले में महिला ने शादी के झूठे वादे का आरोप लगाया था, जिसके लिए भारतीय दण्ड संहिता की धारा 69 के तहत 10 साल की सजा निर्धारित थी, पर हाईकोर्ट ने इस वादे को असत्य नहीं माना।

सौजन्य से:- bhaskar.com
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सुप्रीम कोर्ट ने NRI को यौन-उत्पीड़न मामले में राहत दी:कहा-मां की असहमति पर शादी न होना बेईमानी नहीं; शादी के झूठे वादे का आरोप लगा था
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सुप्रीम कोर्ट ने जाम्बिया में रह रहे NRI व्यक्ति को यौन संबंध के मामले में राहत दी है। कोर्ट ने उसके खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी।
महिला ने आरोप लगाया कि व्यक्ति ने दिसंबर 2024 तक उससे शादी करने का वादा किया था। लेकिन जनवरी 2025 में उसने कहा कि उसकी मां इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं है। इसके बाद उसने शादी से इनकार कर दिया। उसके दावा किया कि पहली मुलाकात के बाद वे दो दिन होटल में रहे थे।
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 7 सितंबर के आदेश जारी कर कहा कि शिकायत में सहमति से बने संबंध का संकेत मिलता है। इसमें यह नहीं बताया गया कि व्यक्ति ने धोखे से महिला को यौन संबंध के लिए तैयार किया।
शादी का झूठा वादा करने पर 10 साल की सजा
यह मामला गुजरात के वडोदरा का है। FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 लगाई गई थी। इस धारा में धोखे या शादी का झूठा वादा करके बनाए गए यौन संबंध पर 10 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
शिकायत के अनुसार, महिला नवंबर 2022 में फेसबुक के जरिए व्यक्ति से जुड़ी थी। दोनों पहली बार फरवरी 2024 में वडोदरा में मिले।
महिला का आरोप था कि व्यक्ति उसे एक होटल में ले गया। दोनों वहां दो दिन रहे। महिला के अनुसार, व्यक्ति ने उससे शादी करने की बात कही और दोनों के बीच यौन संबंध बने।
गुजरात हाईकोर्ट का फैसला
गुजरात हाईकोर्ट ने मई में मामले में दखल देने और व्यक्ति के खिलाफ FIR रद्द करने से इनकार कर दिया था।
हाईकोर्ट ने कहा था कि शादी के उस वादे में अंतर करना होगा, जो अच्छे इरादे से किया गया लेकिन बाद में पूरा नहीं हो सका। दूसरे मामले में वादा शुरू से ही शादी करने के इरादे के बिना किया जाता है।
कोर्ट ने यह भी कहा था कि व्यक्ति की मां के शादी का विरोध करने वाली वजह को ‘सच्चा और उचित कारण’ नहीं माना जा सकता।
व्यक्ति का पक्ष
व्यक्ति ने इस आरोप से इनकार किया कि रिश्ता झूठे वादे पर आधारित था। उसके वकील ने गुजरात हाईकोर्ट में कहा था कि दोनों के बीच संबंध सहमति से बने थे।
वकील ने व्यक्ति की महिला की मां और मातृ पक्ष की मौसी से हुई बातचीत का भी हवाला दिया। हाईकोर्ट में दी गई दलीलों के अनुसार, व्यक्ति ने महिला की मां को 40 हजार रुपए भेजे थे। उसने मुंबई से करीब 32 हजार रुपए के मोबाइल फोन और कपड़े भी भेजे थे।
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