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सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक पर यौन उत्पीड़न केस में ठहराव, कहा‑‘एक बार दाग लगे तो स्थायी’

सुप्रीम कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज यौन उत्पीड़न मामले में शिक्षक की गिरफ्तारी पर रोक लगाई और कहा कि ऐसे कृत्यों में यौन मंशा स्पष्ट नहीं होती, इसलिए धारा 10 के अंतर्गत नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी बताया कि बाद में बरी हो जाने पर हुए नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती और शिक्षक पर हमेशा के लिए दाग रहेगा।

11 सितंबर 2026 को 04:04 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक पर यौन उत्पीड़न केस में ठहराव, कहा‑‘एक बार दाग लगे तो स्थायी’

सौजन्य से:- ABP News

यौन उत्पीड़न केस में टीचर को राहत, SC बोली- 'एक शिक्षक पर हमेशा के लिए..'

शिक्षक पर दर्ज एक यौन उत्पीड़न केस से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान माना है, कि इस तरह के एक्ट में यौन मंशा का पता नहीं चलता है.

शिक्षक को लेकर हुई एफआईआर पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज केस में सुनवाई हुई. इसमें आरोप लगाया गया था कि उसने क्लास में कई छात्राओं को गलत तरीके से छुआ था. इसमें पीठ पर हाथ रखना, कमर को टच करना जैसे गंभीर आरोप शामिल थे.

आरोप के सामने आने के बाद पुलिस ने टीचर्स के खिलाफ पॉक्सो एक्ट 2012 की धारा 10 के तहत केस दर्ज किया. इन्हीं आरोपों की लड़ाई में जुटे टीचर ने पहले हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, इसके बाद जब वहां से निराशा मिली तो वह सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर न्याय की गुहार लगाने पहुंचे.

मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'शारीरिक सजा देने का उनका तरीका भले ही गलत और असंवेदनशील रहा हो, लेकिन इससे यौन मंशा का पता नहीं चलता है. कोर्ट ने कहा है कि बाद में बरी हो जाने पर भी मुकदमे से हुए नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती है. एक टीचर पर हमेशा के लिए दाग लग जाएगा.'

जस्टिस भुइयां और जस्टिस अतुल एस की बेंच ने की सुनवाई

इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया था. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जवल भुइयां और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच इस मामले में सुनवाई कर रही थी. उनके तहत पॉक्सो की धारा 10 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी. महिला टीचरों ने हेडमास्टर से टीचर की शिकायत की थी. तब आरोप लगाया था कि उन्होंने 10वीं कक्षा की कुछ छात्राओं के शरीर को छुआ. इसके बाद बाल जिला संरक्षण इकाई ने स्कूल का दौरा किया, और जांच रिपोर्ट बनाई. फिर पूरे मामले में पुलिस ने संज्ञान लेते हुए, एफआईआर दर्ज की. शिक्षक ने हाईकोर्ट में इस FIR को रद्द करने की मांग की, और याचिका दाखिल की थी. लेकिन उसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया. इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहां माननीय सर्वोच्च अदालत ने रोक लगा दी.

बाल संरक्षण इकाई ने क्या बताया?

बाल संरक्षण इकाई ने बताया था कि छात्राओं ने कहा है कि जब वे क्लास में ध्यान नहीं देती थीं, तो टीचर उनकी पीठ के ऊपरी हिस्से पर मारते थे. ऐसे में वह जिस तरह से छूते थे, वह उनके Comfort स्थिति नहीं थी. इनके अलावा रिपोर्ट में बताया गया था कि छात्राओं की पीठ को रगड़ा जाता था, उनके कमर पर चुटकी काटते थे. एक दिन टीचर ने एक लड़की को मैप न लाने पर थप्पड़ मारा. उसकी गर्दन को गलत तरह से छुआ. अन्य स्टूडेंट्स ने शिकायत की कि भले ही टीचर ने छुआ नहीं, लेकिन वह इस तरह से देखते थे, जिससे उन्हें असहज महसूस होता था.

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कई तरह के प्रावधानों के बारे में पॉक्सो एक्ट के तहत बताया थआ. इसमें धारा 10 के तहत गंभीर यौन उत्पीड़न पांच से सात साल की कठोर सजा और जुर्माने का प्रावधान है. इस मामले में लागू धारा 9(f) में ऐसे लोग शामिल हैं, जो किसी भी तरह से टिचिंग प्रोफेशन से जुड़े हैं. कोर्ट ने माना है कि भले ही टीचर के तौर पर व्यवहार गलत था, लेकिन धारा 10 के दायरे में नहीं आता है.

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