सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून के विभाजनात्मक फैसले पर री‑काल याचिका स्वीकार की, सीजेआई को दी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने 2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून पर दो जजों के बंटे हुए फैसले को वापस लेने की माँग वाली याचिका पर विचार करने को मंज़ूरी दी। इस कारण मामला मुख्य चुनाव आयुक्त (सीजेआई) सूर्यकांत तथा दो न्यायाधीशों के समक्ष प्रशासनिक स्तर पर पहुँचा, जहाँ वरिष्ठ अधिवक्ता ने री‑काल अर्जी का उल्लेख किया और सीजेआई ने जांच कर निर्णय लेने का आश्वासन दिया।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून में नया मोड़: सीजेआई के सामने पहुंची रिकॉल अर्जी, मुख्य न्यायधीश बोले- देखेंगे
Wed, 07 Oct 2026 12:27 PM IST
प्रशांत तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Wed, 07 Oct 2026 12:27 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी और ईसी की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून पर आए दो जजों के बंटे फैसले को वापस लेने की मांग वाली अर्जी पर विचार करने पर सहमति जताई है। 23 सितंबर को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की राय अलग हो गई थी। अब रिकॉल अर्जी पर सीजेआई फैसला लेंगे।
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस याचिका पर विचार करने की हामी भर दी, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून पर आए हालिया बंटे हुए फैसले (स्प्लिट वर्डिक्ट) को वापस लेने की मांग की गई है। इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी संविधान पीठ के पास भेजा जाए या नहीं, इस सवाल पर 23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की पीठ की राय अलग-अलग हो गई थी।
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23 सितंबर को दो जजों की राय अलग-अलग हुई
23 सितंबर को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने इस सवाल पर अलग-अलग राय दी थी कि 2023 के उस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए या नहीं। इस कानून में सीईसी और ईसी की नियुक्ति करने वाले पैनल से भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) को बाहर रखा गया है।
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अब मामला सीजेआई के सामने प्रशासनिक स्तर पर पहुंचा
पीठ ने कहा था कि दोनों जजों की राय अलग होने के कारण मामला सीजेआई सूर्यकांत के सामने प्रशासनिक पक्ष में रखा जाए, ताकि उचित संख्या वाली पीठ का गठन किया जा सके और इस मुद्दे पर प्रभावी तथा आधिकारिक फैसला हो सके।
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सीजेआई की पीठ के सामने बुधवार को उठा मामला
बुधवार को सीजेआई और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने इस रिकॉल अर्जी का जिक्र किया। उन्होंने अदालत को बताया कि वह हालिया फैसले को वापस लेने की मांग वाली अर्जी पर सुनवाई चाहते हैं। सीजेआई ने इस पर कहा, 'हम इसकी जांच करेंगे और फैसला लेंगे।'
पहले जस्टिस दत्ता की पीठ के सामने हुआ था जिक्र
शंकरनारायणन ने पीठ को बताया कि रिकॉल अर्जी का जिक्र पहले जस्टिस दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने किया गया था। हालांकि, बाद में यह मामला उस पीठ से हटा दिया गया और उन्हें सीजेआई के सामने इसका जिक्र करने के लिए कहा गया। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, ‘सीईसी के मुद्दे पर स्प्लिट वर्डिक्ट आया है। हमने फैसले को वापस लेने के लिए एक अर्जी का जिक्र किया है।’
क्यूरेटिव याचिका भी दाखिल, लेकिन रिकॉल अर्जी अलग
जब सीजेआई ने पूछा कि क्या कोई दूसरी अंतरिम अर्जी (आईए) भी दाखिल की गई है, तो शंकरनारायणन ने बताया कि एक क्यूरेटिव पेटिशन भी दाखिल की गई है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि रिकॉल अर्जी उससे अलग है। उन्होंने कहा, ‘क्यूरेटिव पेटिशन दाखिल की गई है। वह अपने तरीके से चलेगी। वह सुनवाई योग्य है या नहीं, मुझे नहीं पता। हमारी अर्जी फैसले को वापस लेने के लिए है। क्यूरेटिव के लिए अक्सर रिव्यू की जरूरत होती है।’
ये भी पढ़ें: एसआईआर पर घमासान: मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी सांसदों को लंच पर बुलाया, सीईसी से मिलने के लिए लिखेंगे चिट्ठी
बड़ी पीठ को मामला भेजने की मांग पर भी बंटी थी राय
यह घटनाक्रम 23 सितंबर को जस्टिस दत्ता और जस्टिस शर्मा की दो सदस्यीय पीठ के उस फैसले के बाद हुआ है, जिसमें केंद्र ने 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी संविधान पीठ के पास भेजने की मांग की थी। जस्टिस दत्ता ने केंद्र की इस मांग को स्वीकार नहीं किया था, जबकि जस्टिस शर्मा ने मामले को बड़ी पीठ के सामने रखने के पक्ष में राय दी थी। दोनों की राय अलग होने के बाद अब यह मामला उचित संख्या वाली बड़ी पीठ के गठन के लिए सीजेआई के सामने है।
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