सुप्रीम कोर्ट ने तय किया: बिना अपील के अपीलीय अदालत नहीं बढ़ा सकती दोषी की सजा
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य, पीड़ित या शिकायतकर्ता द्वारा सजा वृद्धि के लिए अपील न की जाने पर अपीलीय अदालत स्वयं दोषी की सजा नहीं बढ़ा सकती। यह नियम ट्रिपल मर्डर मामले में लागू हुआ, जहाँ पूर्व कुलपति, उनकी पत्नी और सुरक्षा गार्ड की हत्या हुई थी और हाईकोर्ट के सजा बढ़ाने के आदेश को उलट दिया गया। न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और विजय बिश्नोई की पीठ ने इस दिशा‑निर्देश को दोहराया।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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ट्रिपल मर्डर मामला: क्या अदालत खुद से बढ़ा सकती है दोषी की सजा? सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया नियम, कही ये बात
Fri, 28 Aug 2026 07:51 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Fri, 28 Aug 2026 07:51 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने दोषी की सजा को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया कि अगर राज्य, पीड़ित या शिकायतकर्ता ने सजा बढ़ाने के लिए अपील नहीं की है, तो अपीलीय अदालत अपने स्तर पर दोषी की सजा नहीं बढ़ा सकती। यह फैसला एक चर्चित ट्रिपल मर्डर केस में आया, जिसमें पूर्व कुलपति, उनकी पत्नी और सुरक्षा गार्ड की हत्या हुई थी। अदालत ने सजा बढ़ाने के हाईकोर्ट के आदेश को क्यों पलटा?
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर राज्य, पीड़ित या शिकायतकर्ता की ओर से सजा बढ़ाने की अपील नहीं की गई है, तो अपीलीय अदालत खुद से दोषी की सजा नहीं बढ़ा सकती। इसके अनुसार, ऐसा करके दोषी को उस स्थिति से भी बदतर स्थिति में नहीं डाला जा सकता, जिसमें वह अपील से पहले था। न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने यह टिप्पणी एक ट्रिपल मर्डर मामले में की है।
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हाईकोर्ट ने दोषी की सजा क्यों बढ़ाई थी?
इसके अनुसार, इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने सह-दोषी गोपी की उम्रकैद की सजा को बढ़ाकर उसके बाकी जीवन तक जेल में रहने की सजा कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि सजा बढ़ाने के लिए राज्य, पीड़ित या शिकायतकर्ता की ओर से कोई अपील नहीं की गई थी। ऐसे में हाईकोर्ट ने खुद से सजा बढ़ाकर कानूनी गलती की।
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