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सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को सरेंडर से बचाने के लिये पाँच करोड़ की जमा शर्त रखी

सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को चेक बाउंस के सात मामलों में सरेंडर से छूट पाने के लिए कोर्ट रजिस्ट्री में पाँच करोड़ जमा करने का निर्देश दिया है, जबकि दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि और तीन महीने की जेल की सजा बरकरार रखी थी। अगली सुनवाई 15 सितंबर को तय हुई है और आत्मसमर्पण की अंतिम तिथि 10 सितंबर रखी गई है। हाईकोर्ट ने पहले ही लगभग दो करोड़ रुपये के भुगतान को मान्य किया था और प्रत्येक शिकायत पर एक करोड़ से अधिक की राशि का भुगतान करने का आदेश दिया था।

9 सितंबर 2026 को 01:32 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को सरेंडर से बचाने के लिये पाँच करोड़ की जमा शर्त रखी

सौजन्य से:- Hindustan

राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, सरेंडर से बचने के लिए देने होंगे इतने करोड़ रुपये

राजपाल यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट के 10 जुलाई के फैसले को चुनौती दी थी। उस फैसले में चेक बाउंस के सात मामलों में उनकी दोषसिद्धि और तीन महीने की जेल की सजा बरकरार रखी गई थी।

चेक बाउंस मामले में अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में सरेंडर से छूट पाने की शर्त के तौर कोर्ट की रजिस्ट्री में पांच करोड़ जमा करने का निर्देश दिया है।

मामला फिल्म निर्माता-फाइनेंसर मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट के 10 जुलाई के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें चेक बाउंस के सात मामलों में उनकी दोषसिद्धि और तीन महीने की जेल की सजा बरकरार रखी गई थी। जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने यादव की याचिका पर मौखिक रूप से सुनवाई किए जाने के बाद सशर्त नोटिस जारी किया। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। इससे पहले हाईकोर्ट ने आत्मसमर्पण की अंतिम तारीख 10 सितंबर तय की थी।

यह मामला मुरली प्रोजेक्ट्स की ओर से यादव, उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव और उनकी फिल्म प्रोडक्शन कंपनी के खिलाफ दायर सात शिकायतों से जुड़ा है। फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए जारी सात चेक बाउंस होने के बाद दर्ज यह शिकायत दर्ज कराई गई थीं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाया था फैसला

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराए जाने के फैसले को बरकरार रखते हुए उन्हें तीन महीने के कारावास की सजा सुनाई थी। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली याचिकाएं दायर करने में पांच साल से अधिक की 'असाधारण' देरी को माफ करने से इनकार कर दिया था। साथ ही उन्होंने यादव को सातों शिकायतों में शिकायतकर्ता को एक-एक करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करने का निर्देश दिया था।

हालांकि हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभिनेता द्वारा पहले ही अदा की जा चुकी लगभग दो करोड़ रुपये की राशि का समायोजन किया जाएगा। अदालत ने यादव को इस फैसले के खिलाफ अपीलीय अदालत का रुख करने के लिए दो महीने का समय भी दिया। जस्टिस शर्मा ने 108 पृष्ठों के फैसले में कहा कि यादव शिकायतकर्ता मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को भुगतान करने संबंधी अदालत को दिए गए अपने आश्वासनों का बार-बार पालन करने में विफल रहे। उन्होंने कहा कि हालांकि अदालत ने मामले का सौहार्दपूर्ण समाधान कराने के लिए गंभीर प्रयास किए, लेकिन अभिनेता ने अंततः कोई और भुगतान करने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया।

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