सिख पैनल के सहयोग से बेअदबी कानून संशोधन पर सात सदस्यीय कमेटी की लगातार मुलाक़ातें
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने धर्म की पवित्रता और कानून की मूल भावना को बनाए रखते हुए बेअदबी कानून में सुधार के लिये सात सदस्यीय कमेटी बनाई है। इस कमेटी को श्री अकाल तख्त साहिब के पैनल के साथ नियमित रूप से बैठकें करके प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा कर समाधान निकालने का निर्देश दिया गया है।

सौजन्य से:- Hindustan
बेअदबी कानून में संशोधन पर श्री अकाल तख्त साहिब के पैनल से चर्चा करेगी कमेटी
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बेअदबी कानून में सुधार के लिए सात सदस्यीय कमीटी का गठन किया है। इस प्रक्रिया में श्री अकाल तख्त साहिब के पैनल के साथ लगातार बैठकें होंगी, ताकि धर्म की पवित्रता और कानून की मौलिकता का संरक्षण किया जा सके।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता की रक्षा के लिए बनाए गए कानून में संशोधन को लेकर सात सदस्यीय कमेटी को श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से गठित पैनल के साथ नियमित बैठकें करने के निर्देश दिए हैं। रविवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में कानून की कुछ धाराओं को लेकर उठी चिंताओं और आपसी सहमति से समाधान निकालने पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेअदबी के दोषियों के लिए उम्रकैद और भारी जुर्माने का प्रावधान कानून का मुख्य आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित संशोधनों पर विचार करते समय कानून की मूल भावना और उद्देश्य से समझौता नहीं किया जाएगा।
संशोधनों पर बनेगी सहमति
मुख्यमंत्री ने कमेटी को निर्देश दिया कि वह कानून की संबंधित धाराओं की समीक्षा करे और श्री अकाल तख्त साहिब के पैनल के सुझावों पर विचार करे। उन्होंने कहा कि सभी कानूनी, संवैधानिक और अन्य संबंधित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए समाधान निकालने के लिए लगातार बैठकें जरूरी हैं।
भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य सरकार ने धार्मिक क्षेत्र से जुड़ी शख्सियतों, बुद्धिजीवियों और कानूनी विशेषज्ञों को शामिल करते हुए सात सदस्यीय कमेटी बनाई है। यह कमेटी कानून के हर पहलू की समीक्षा करने के बाद सरकार को उचित सुझाव देगी।
मुख्यमंत्री ने नोडल अधिकारी और पीसीएस अधिकारी हरजीत सिंह संधू को भविष्य की बैठकों के लिए समन्वय सुनिश्चित करने और कमेटी को जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने कहा कि सरकार ने नया कानून लाने के बजाय मौजूदा कानून में संशोधन करने का रास्ता चुना है, ताकि संशोधित कानून को मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा जा सके। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस प्रक्रिया में वैध कानूनी और संवैधानिक चिंताओं का समाधान भी किया जाएगा।
सख्त सजा पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधेयक कानूनी विशेषज्ञों से विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया था, ताकि इसकी प्रभावशीलता कमजोर न पड़े। उन्होंने कहा कि बेअदबी की घटनाओं से सिख संगत की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचती है और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता तथा मर्यादा की रक्षा करना सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों पक्षों के बीच चर्चा से ऐसा समाधान निकलेगा, जो सिख पंथ की भावनाओं के अनुरूप हो और कानून को प्रभावी बनाए रखे। मुख्यमंत्री ने कहा कि संशोधन की प्रक्रिया धार्मिक भावनाओं के प्रति सम्मान रखते हुए कानूनी और संवैधानिक सिद्धांतों के अनुसार आगे बढ़ाई जाएगी।
बैठक में श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह, दमदमी टकसाल के प्रतिनिधि बाबा साहिब सिंह, संत बाबा सेवा सिंह रामपुर खेड़ा, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति जसपाल सिंह और गुरबीर सिंह, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी जतिंदर सिंह औलख तथा कानून अधिकारी प्रीत इंदर पाल सिंह शामिल हुए। दमदमी टकसाल के प्रमुख संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा ने ऑनलाइन भाग लिया।
पंजाब ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के निदेशक एलके यादव, अधिवक्ता जीएस घुम्मण और जीपीएस घुम्मण सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे।
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