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लाइक्स की चाह में सड़क पर स्टंट करने वाले नाबालिग को नहीं मिली जमानत, बॉम्बे हाई कोर्ट ने सत्र न्यायालय का आदेश बरकरार रखा

बॉम्बे हाई कोर्ट ने 17 साल के नाबालिग की बेमेल जमानत याचिका को खारिज कर दिया और उसे सुधार‑केंद्र भेजने का निर्देश दिया। कोर्ट ने बताया कि इंस्टाग्राम पर दिखाए गए खतरनाक स्टंट और उनके अभिभावकों की अनदेखी जानबूझकर लापरवाही का प्रमाण हैं, जिससे घातक कार‑टक्कर हुई जिसमें एक की मौत और दूसरे को दिव्यांग बना दिया। इस कारण सार्वजनिक सुरक्षा और न्याय में बाधा के मद्देनज़र जमानत से इंकार किया गया।

27 सितंबर 2026 को 05:04 pm बजे
लाइक्स की चाह में सड़क पर स्टंट करने वाले नाबालिग को नहीं मिली जमानत, बॉम्बे हाई कोर्ट ने सत्र न्यायालय का आदेश बरकरार रखा

सौजन्य से:- Jagran

'लाइक्स और व्यूज के लिए सड़क पर स्टंट करने वाले नाबालिग को जमानत नहीं', बॉम्बे HC ने सत्र अदालत का फैसला रखा बरकरार

बॉम्बे हाई कोर्ट ने इंटरनेट मीडिया पर 'लाइक्स' के लिए स्टंट करने वाले नाबालिग की जमानत याचिका खारिज करने के सत्र न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा है।

HighLights

- बॉम्बे हाई कोर्ट ने नाबालिग स्टंटमैन की जमानत याचिका खारिज की।

- कोर्ट ने नाबालिग को सुधार-केंद्र भेजने का सख्त निर्देश दिया।

- इंटरनेट मीडिया पर स्टंट करना जानबूझकर बरती गई लापरवाही।

विनोद कुमार मेनन, मुंबई। इंटरनेट मीडिया पर 'लाइक्स' और 'व्यूज' बटोरने के लिए सड़कों पर स्टंट करने वाले नाबालिगों और उनके लापरवाह अभिभावकों को बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ा सबक सिखाया है।

जस्टिस शिवकुमार डिगे ने मुंबई के घाटकोपर में हुए जानलेवा कार हादसे के आरोपित 17 साल आठ महीने के नाबालिग की जमानत याचिका खारिज करने के सत्र न्यायालय के आदेश को सही ठहराया है और निर्देश दिया कि आरोपित को सुधार-केंद्र भेजा जाए।

कोर्ट ने कहा कि सड़क पर खतरनाक स्टंट करने वाले इस आरोपित को यदि बाहर रखा गया, तो वह समाज और खुद के लिए फिर से खतरा बन सकता है।

हाई कोर्ट के नौ सितंबर को दिए गए इस फैसले के बाद स्पष्ट हो गया है कि इंटरनेट मीडिया पर इस तरह स्टंट दिखाना महज बचकानी शेखी या नादानी नहीं, बल्कि जानबूझकर बरती गई लापरवाही के पक्के साक्ष्य हैं। स्टंट कर बेगुनाहों की जान लेने आरोपित नाबालिग होने की आड़ लेकर बच नहीं सकेंगे।

दरअसल पांच फरवरी 2026 की रात घाटकोपर के सोमैया गेट (विद्याविहार) के पास तेज रफ्तार में एसयूवी चला रहे किशोर ने स्कूटी को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी हमेशा के लिए दिव्यांग हो गईं।

आरोपित को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) से आसानी से जमानत मिल गई थी, लेकिन पीड़ित परिवार और पुलिस ने इसे सत्र न्यायालय में चुनौती दी। सत्र न्यायालय ने जमानत रद कर दी।

पुलिस और पीड़ित पक्ष के वकीलों ने कोर्ट में आरोपित के इंस्टाग्राम अकाउंट के स्क्रीनशाट और वीडियो साक्ष्य के तौर पर पेश किए। कोर्ट में पेश किए गए स्क्रीनशाट से पता चला कि आरोपित अपने पब्लिक इंस्टाग्राम अकाउंट ‘रयानकेलफंडेबाज’ पर कार और स्कूटर का खतरनाक स्टंट पोस्ट करता था।

प्रोफाइल से जानलेवा स्टंट का रिकार्ड सामने आया। इनमें चलती गाड़ियों की बोनट पर सवारी करना, बिना लाइसेंस के सड़कों पर तेज रफ़्तार वाहन चलाना शामिल है। वह सड़कों पर कारों और बाइकों के साथ खतरनाक स्टंट करते हुए रील्स पोस्ट करता था।

आरोपित के माता-पिता का उस पर कोई नियंत्रण नहीं था। वे जानते थे कि उनका बेटा बिना उम्र के गाड़ियां चलाकर स्टंट करता है, फिर भी उन्होंने उसे नहीं रोका। कोर्ट ने कहा कि आरोपित के मन में कानून के प्रति कोई सम्मान नहीं है। हादसे के तुरंत बाद आरोपित के इंस्टाग्राम अकाउंट से वो सभी स्टंट वीडियो डिलीट कर दिए गए थे। कोर्ट ने इसे साक्ष्यों को नष्ट करने का प्रयास माना।

इसलिए रद की गई जमानत

कानून के अनुसार किशोरों को जमानत देना अनिवार्य है, लेकिन उन मामलों में जमानत से इन्कार किया जा सकता है जहां रिहाई न्याय के विरुद्ध हो। उच्च न्यायालय ने माता-पिता के नियंत्रण की कमी, डिलीट किए गए पोस्ट और जमानत की शर्तों के उल्लंघन का हवाला देते हुए जमानत रद करने के फैसले को बरकरार रखा।

पीड़ित मीनल पटेल की ओर से पेश हुए वकील रूबेन मस्कारेन्हास ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि किशोर न्याय कानून की धारा 12 के तहत ज़मानत का अधिकार असीमित नहीं है। जमानत पर रिहाई से सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा हो या न्याय में बाधा आए, तो नाबालिगों के संरक्षण से जुड़े नियमों में कानूनी अपवाद लागू होते हैं।

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