सुप्रीम कोर्ट में यूपीआई‑एमडीआर को चुनौती का मुक़दमा
सुप्रीम कोर्ट ने आज उस याचिका पर सुनवाई शुरू की जिसमें ₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर लागू किए जाने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट को बिना पारदर्शिता और कानूनी सुरक्षा के लागू करने पर सवाल उठाया गया है। याचिका में 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007' की संशोधित धारा 10‑ए की संवैधानिक वैधता तथा इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के लिए शुल्क‑मुक्त सुरक्षा के मानदंडों को चुनौती दी गई है।

सौजन्य से:- livehindustan.com
यूपीआई-एमडीआर पर आज सुनवाई करेगी शीर्ष अदालत
नई दिल्ली में, सुप्रीम कोर्ट यूपीआई-एमडीआर मामले पर सुनवाई करेगा। याचिका में 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने को चुनौती दी गई है। याचिका का कहना है कि यह शुल्क पारदर्शिता और कानूनी सुरक्षा के बिना लागू किया गया है।
नई दिल्ली, एजेंसी। शीर्ष अदालत सोमवार को यूपीआई-एमडीआर मामले पर सुनवाई करेगी। याचिका में केंद्र सरकार के 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट की 28 सितंबर की कार्यसूची के अनुसार, सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची व वी. मोहना की पीठ सुनवाई करेगी। अधिवक्ता अंजन दत्ता की ओर से यह याचिका दायर की गई है। इसमें 15 अक्तूबर से लागू होने जा रहे एमडीआर को चुनौती दी गई है। याचिका के अनुसार, यह शुल्क बिना किसी उचित कानूनी सुरक्षा, पारदर्शिता या सार्वजनिक परामर्श के लागू किया गया है।
इसमें ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007’ की संशोधित धारा 10-ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। आरोप है कि यह धारा कार्यपालिका को बिना किसी स्पष्ट गाइडलाइन के यह तय करने की शक्ति देती है कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान तरीकों को बिना शुल्क वाली सुरक्षा मिलेगी।याचिका में यूपीआई लेनदेन और रुपे डेबिट कार्ड भुगतान के बीच अंतर पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया है कि केंद्र सरकार की अधिसूचना में रुपे डेबिट कार्ड के लिए बिना किसी मौद्रिक सीमा के ‘नो-चार्ज प्रोटेक्शन’ जारी रखा गया है। इस मामले में केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सहित को भी पक्षकार बनाया गया है।
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