सुप्रीम कोर्ट ने SMA उपचार फंड की स्थापना और दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास केंद्रों की राज्यवार जानकारी की मांग की
कोर्ट ने स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (SMA) जैसे दुर्लभ रोग के महंगे उपचार के लिए स्थायी कॉर्पस फंड बनाने की सलाह दी, क्योंकि व्यक्तिगत चंदे व अस्थायी सरकारी मदद पर्याप्त नहीं हैं; CSR, संस्थागत दान और केंद्र सरकार के योगदान से नियमित फंड की व्यवस्था का प्रस्ताव किया। साथ ही, दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास केंद्रों के मानकों और निगरानी व्यवस्था के लिए सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों से विस्तृत आँकड़े और हलफनामा प्रस्तुत करने को कहा, और उल्लेख किया कि केवल दस क्षेत्रों ने न्यूनतम मानक अधिसूचित किए हैं।

सौजन्य से:- Amar Ujala
सुप्रीम कोर्ट अपडेट: महंगे इलाज से जूझ रहे एसएमए मरीजों को राहत, सर्वोच्च न्यायालय ने फंड बनाने पर दिया जोर
सुप्रीम कोर्ट ने स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (SMA) जैसी दुर्लभ और गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के इलाज के लिए स्थायी कॉर्पस फंड बनाने पर विचार किया। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि व्यक्तिगत चंदे और सरकार की अस्थायी मदद पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने सीएसआर, संस्थागत दान और केंद्र सरकार के योगदान से नियमित फंड बनाने का प्रस्ताव मांगा। साथ ही, फंड के बेहतर इस्तेमाल पर भी जोर दिया। मामला एसएमए मरीजों के महंगे इलाज और उनके लिए वित्तीय व्यवस्था की जरूरत से जुड़ा है। कोर्ट ने केंद्र से भी इस संबंध में हलफनामा मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास केंद्रों पर मांगा राज्यवार ब्योरा
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को देशभर में दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास केंद्रों के नियमन, मानकों और निगरानी व्यवस्था की राज्यवार जानकारी मांगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार से सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से जरूरी आंकड़े जुटाकर हलफनामा दाखिल करने को कहा। अदालत में अधिवक्ता राहुल बजाज ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 और मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के पालन में कमियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि केवल 10 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के न्यूनतम मानक अधिसूचित किए हैं। कोर्ट ने निरीक्षण और निगरानी व्यवस्था की जानकारी भी मांगी। मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी।
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