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रजिस्ट्री से नहीं मिलती स्वचालित मालिकाना हक – खरीद से पहले पूरी टाइटल जाँच जरूरी

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार रजिस्टर्ड सेल डीड केवल हस्तांतरण का औपचारिक दस्तावेज है, लेकिन यह साबित नहीं करता कि विक्रेता के पास वैध मालिकाना हक था। खरीदार को पूरी टाइटल चेन, एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट, म्यूटेशन एवं भवन अनुमतियों सहित सभी संबंधित रिकॉर्ड की जाँच करनी चाहिए, तभी सुरक्षित निवेश कहा जा सकता है।

8 अक्टूबर 2026 को 01:06 pm बजे
रजिस्ट्री से नहीं मिलती स्वचालित मालिकाना हक – खरीद से पहले पूरी टाइटल जाँच जरूरी

सौजन्य से:- Navbharat Times

रजिस्टर्ड सेल डीड जरूरी तो है, लेकिन यह अकेले अंतिम सबूत नहीं

Transfer of Property Act, 1882 के तहत बिक्री से मालिकाना हक का वैध हस्तांतरण सामान्यतः विधिवत निष्पादित और रजिस्टर्ड सेल डीड से होता है। लेकिन रजिस्ट्रेशन अधिकारी आम तौर पर यह न्यायिक फैसला नहीं करता कि विक्रेता वास्तव में उस संपत्ति का निर्विवाद मालिक है या नहीं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने K. Gopi v. The Sub-Registrar मामले में 2025 में कहा कि रजिस्ट्रार का काम टाईटल का अंतिम फैसला करना नहीं है। इसलिए किसी व्यक्ति की ओर से दस्तावेज रजिस्टर्ड हो जाना अपने-आप यह साबित नहीं करता कि उसके पास पहले से साफ और वैध मालिकाना हक था।

सुप्रीम कोर्ट ने Registration और Ownership का फर्क बताया

नवंबर 2025 के Samiullah v. State of Biharफैसले में सुप्रीम कोर्ट ने Registration Act की मौजूदा व्यवस्था को अनुमानित मालिकाना हक व्यवस्था के रूप में समझाया। अदालत ने कहा कि कानून में दस्तावेज़ों का रजिस्ट्रेशन और मालिकाना हक के बीच अंतर बना हुआ है और रजिस्ट्रेशन से पैदा होने वाली धारणा अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

पूरी Title Chain देखना सबसे जरूरी कानूनी कदम

खरीदार को सिर्फ मौजूदा विक्रेता की सेल डीड नहीं, बल्कि पिछले मालिकों तक पहुंचने वाली पूरी title chain यानी मालिकाना हक की जांच करनी चाहिए। पुराने सेल डीड, इनहेरिटेंस डॉक्यूमेंट, पार्टीशन डीड, गिफ्ट डीड या अन्य ट्रांसफर डॉक्यूमेंट में कहीं ओनरशिप का गैप या विवाद तो नहीं है, यह देखना जरूरी है। यदि विक्रेता को खुद टाइटल किसी ऐसे व्यक्ति से मिला था जिसका अधिकार संदिग्ध था, तो केवल विक्रेता की रजिस्टर्ड सेल डीड उस पुराने दोष को स्वतः खत्म नहीं करती। सुप्रीम कोर्ट ने भी मौजूदा व्यवस्था में संभावित खरीदार पर मेहनत से टाइटल सर्च की जिम्मेदारी को भी साफ किया है।

Encumbrance Certificate और कर्ज या कानूनी दावे जरूर जांचें

खरीदार को यह पता करना चाहिए कि प्रॉपर्टी पर पहले से mortgage, registered charge या अन्य दर्ज दायित्व तो नहीं है। इसके लिए संबंधित रिकॉर्ड और उपलब्ध Encumbrance Certificate (EC) की जांच महत्वपूर्ण है, हालांकि EC को अकेले सम्पूर्ण मालिकाना हका का पक्का दस्तावेज नहीं माना जाना चाहिए।

Mutation से नाम चढ़ता है, लेकिन इससे नया मालिकाना हक नहीं

दरअसल, रजिस्ट्री के बाद mutation कराने से राजस्व या स्थानीय रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम अपडेट किया जाता है। लेकिन यह अपने-आप title पैदा नहीं करती; सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले में भी इस सिद्धांत को रेखांकित किया गया था। इसलिए खरीदार को sale deed के साथ संबंधित राजस्व रिकॉर्ड, प्रॉपर्टी कार्ड या 7/12 जैसे रिकॉर्ड भी मिलाकर देखने चाहिए।

फ्लैट खरीदने वालों को सिर्फ जमीन का Title नहीं, Building Approvals भी देखने होंगे

अपार्टमेंट या मकान खरीदते समय title के अलावा अप्रूव किया हुआ भवन निर्माण योजना, Completion Certificate (CC) और जहां लागू हो Occupancy Certificate (OC) जैसे दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए। खरीदार को यह भी देखना चाहिए कि जिस यूनिट को बेचा जा रहा है उसकी पहचान, क्षेत्रफल, मंजूर प्लान और वास्तविक निर्माण में कोई महत्वपूर्ण अंतर तो नहीं है। .

मतलब साफ है...प्रॉपर्टी खरीदने में रजिस्ट्री हो गई यानी मालिकाना हक पूरी तरह सुरक्षित है, जैसी धारणा से बचना चाहिए। रजिस्टर्ड sale deed संपत्ति के हस्तांतरण का महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज है, लेकिन खरीदार को विक्रेता का टाइटल, पूरी टाइटल चेन, एन्कम्ब्रेन्स, रेवेन्यू/म्यूटेशन रिकॉर्ड और बिल्डिंग अप्रूवल की अलग-अलग जांच करनी चाहिए। इन सबके बाद ही आप सुरक्षित निवेश की बात सोट सकते हैं, या फिर चैन की नींद ले सकते हैं।

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