सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से मांगी रिपोर्ट, लखीमपुर हिंसा में जांच अधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठे
सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में नियुक्त जांच अधिकारी के कामकाज की जाँच के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से विस्तृत रिपोर्ट की मांग की है। अधिकारी पर एनडीपीएस और एससी/एसटी मामलों में आरोपियों को बरी करने का आरोप है, और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्यवाही तय होगी।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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लखीमपुर हिंसा मामला: सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट से मांगी रिपोर्ट, जांच अधिकारी की कार्यशैली पर उठे सवाल
Tue, 22 Sep 2026 01:09 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Tue, 22 Sep 2026 01:09 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में पीठासीन अधिकारी के कामकाज पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से रिपोर्ट मांगी है। अधिकारी पर एनडीपीएस और एससी/एसटी मामलों में आरोपियों को राहत देने के आरोप हैं।
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के पीठासीन अधिकारी के कामकाज पर रिपोर्ट मांगी। उन पर आरोप था कि उन्होंने एनडीपीएस और एससी/एसटी अत्याचार से जुड़े कई मामले खुद के पास ले लिए और आरोपियों को बरी कर दिया।
बेंच ने क्या आदेश दिया?
चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से कहा कि वे दावों की जांच करने और सुधारात्मक कार्रवाई करने के बाद सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंपें।
प्रशांत भूषण ने क्या तर्क दिया?
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में एक चश्मदीद गवाह की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि पीठासीन अधिकारी ने उनके मुवक्किल के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया, क्योंकि बीमारी के कारण वे अदालत में पेश नहीं हो पाए थे। भूषण ने कहा, 'पीठासीन अधिकारी का व्यवहार कोर्ट को हैरान कर देने वाला है। पीठासीन अधिकारी ने एनडीपीएस और एससी/एसटी मामलों को खुद अपने पास ले लिया और आरोपियों को जमानत दे दी या बरी कर दिया। कानून के तहत वह ऐसा नहीं कर सकते।'
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बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार से क्या कहा?
उन्होंने आगे कहा कि बीच में ही सरकारी वकील को भी बदल दिया गया। इसके साथ ही नए वकील के पास सिर्फ चार महीने का अनुभव है। बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि वह सबसे वरिष्ठ सरकारी वकील को ढूंढे, जिसे इस मामले में सेशन ट्रायल चलाने का काफी अनुभव हो, और दो हफ्ते में कोर्ट को जानकारी दे।
अगली सुनवाई कब है?
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद तय की। 6 अगस्त को, सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत शर्तों में और ढील देने से इनकार कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
3 अक्तूबर 2021 को, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे के खिलाफ किसानों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। एक एसयूवी ने चार किसानों को कुचल दिया था। इसके बाद, नाराज किसानों ने कथित तौर पर एक ड्राइवर और दो भाजपा कार्यकर्ताओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।
हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हो गई थी। दिसंबर 2023 में, ट्रायल कोर्ट ने मिश्रा और 12 अन्य लोगों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य अपराधों के आरोप तय किए, जिससे मुख्य मामले में ट्रायल शुरू होने का रास्ता साफ हो गया।
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बेंच ने क्या आदेश दिया?
चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से कहा कि वे दावों की जांच करने और सुधारात्मक कार्रवाई करने के बाद सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंपें।
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प्रशांत भूषण ने क्या तर्क दिया?
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में एक चश्मदीद गवाह की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि पीठासीन अधिकारी ने उनके मुवक्किल के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया, क्योंकि बीमारी के कारण वे अदालत में पेश नहीं हो पाए थे। भूषण ने कहा, 'पीठासीन अधिकारी का व्यवहार कोर्ट को हैरान कर देने वाला है। पीठासीन अधिकारी ने एनडीपीएस और एससी/एसटी मामलों को खुद अपने पास ले लिया और आरोपियों को जमानत दे दी या बरी कर दिया। कानून के तहत वह ऐसा नहीं कर सकते।'
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बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार से क्या कहा?
उन्होंने आगे कहा कि बीच में ही सरकारी वकील को भी बदल दिया गया। इसके साथ ही नए वकील के पास सिर्फ चार महीने का अनुभव है। बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि वह सबसे वरिष्ठ सरकारी वकील को ढूंढे, जिसे इस मामले में सेशन ट्रायल चलाने का काफी अनुभव हो, और दो हफ्ते में कोर्ट को जानकारी दे।
अगली सुनवाई कब है?
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद तय की। 6 अगस्त को, सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत शर्तों में और ढील देने से इनकार कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
3 अक्तूबर 2021 को, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे के खिलाफ किसानों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। एक एसयूवी ने चार किसानों को कुचल दिया था। इसके बाद, नाराज किसानों ने कथित तौर पर एक ड्राइवर और दो भाजपा कार्यकर्ताओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।
हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हो गई थी। दिसंबर 2023 में, ट्रायल कोर्ट ने मिश्रा और 12 अन्य लोगों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य अपराधों के आरोप तय किए, जिससे मुख्य मामले में ट्रायल शुरू होने का रास्ता साफ हो गया।
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