होमअपराधसुप्रीम कोर्ट में SIR नोटिस विवाद पर प्रशांत भूषण ने किया गंभीर आरोप, EC से मांगा विस्तृत जवाब
अपराध

सुप्रीम कोर्ट में SIR नोटिस विवाद पर प्रशांत भूषण ने किया गंभीर आरोप, EC से मांगा विस्तृत जवाब

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने दिल्ली में जारी SIR नोटिस को चौंकाने वाला बताया और नोटिस जारी करने की यांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए। अदालत ने चुनाव आयोग से विसंगति के कारण स्पष्ट करने और FAQ जारी करने की मांग की, जबकि आयोग ने 30 लाख नोटिस और 14,000 BLO के आंकड़े प्रस्तुत किए।

22 सितंबर 2026 को 11:05 am बजे
सुप्रीम कोर्ट में SIR नोटिस विवाद पर प्रशांत भूषण ने किया गंभीर आरोप, EC से मांगा विस्तृत जवाब

सौजन्य से:- AajTak

Sign In

Advertisement

X

दिल्ली में SIR के तहत जारी किए गए नोटिस को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने मामले को गंभीर और चौंकाने वाला बताया. उन्होंने कहा कि जो कुछ हुआ है, वह बेहद चौंकाने वाला है और कोर्ट को यह देखना होगा कि आखिर क्या हो रहा है.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नियमों में सुधार की जरूरत दिखाई दे रही है. कोर्ट ने यह भी कहा कि नोटिस मैकेनिकल तरीके से जारी किए जा रहे हैं और ऐसा लगता है कि ये कंप्यूटर से तैयार किए गए नोटिस हैं. कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से पूछा कि क्या नोटिस में कुछ बदलाव की जरूरत है और क्या विसंगति का कारण स्पष्ट रूप से बताया जा सकता है.

निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दिल्ली में जारी किए गए नोटिस में विसंगति के कारण दिए गए हैं और नोटिस से जुड़ी पूरी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध करा दी गई है. आयोग ने यह भी कहा कि शिकायतों के समाधान के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. आयोग ने कहा कि दूसरे राज्यों में भी इस तरह के मुद्दे उठाए गए हैं.

Advertisement

प्रशांत भूषण ने क्या कहा?

प्रशांत भूषण ने सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 90 फीसदी आवेदक दोबारा वोटर लिस्ट में आ गए थे. उन्होंने यह भी कहा कि मामले की सुनवाई में करीब 12 साल लग सकते हैं. उन्होंने कहा कि नोटिस मिलने के बाद व्यक्ति को अपने दस्तावेज लेकर जाना होता है और ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ को लेकर लोगों को यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें कौन से दस्तावेज दिखाने होंगे.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे. बागची ने सवाल किया कि अगर नोटिस में सिर्फ ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ लिखा जा रहा है तो विसंगति का कारण क्यों नहीं बताया जाता. इस पर CJI ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति 2019 में दिल्ली आया हो, तो उसे यह नोटिस मिल सकता है कि वह 2019 से पहले मैप नहीं है. उन्होंने पूछा कि नोटिस में कारण स्पष्ट क्यों नहीं दिया जाता.

प्रशांत भूषण ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति और उसके माता-पिता की उम्र में अंतर को लेकर विसंगति है, तो नोटिस के साथ दिए गए 12 दस्तावेजों की सूची में माता-पिता से जुड़ी जानकारी नहीं है. ऐसे में व्यक्ति उम्र के अंतर को कैसे स्पष्ट करेगा. उन्होंने भाई-बहनों की उम्र में 9 महीने से कम अंतर होने की स्थिति का भी जिक्र किया और सवाल उठाया कि अगर कोई बच्चा समय से पहले पैदा हुआ हो तो ऐसी स्थिति को कैसे समझाया जाएगा.

Advertisement

33 लाख लोगों के नोटिस पर सवाल

सुनवाई के दौरान 33 लाख लोगों को नोटिस जारी किए जाने का मुद्दा भी उठा. जस्टिस जे. बागची ने पूछा कि क्या 33 लाख नोटिस भेजे गए हैं. इस पर निर्वाचन आयोग की ओर से 30 लाख का आंकड़ा बताया गया. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि इस प्रक्रिया के लिए कितने BLO तैनात किए गए हैं. निर्वाचन आयोग ने बताया कि 14,000 BLO तैनात किए गए हैं.

कोर्ट ने सुधार के लिए उपलब्ध समय को लेकर भी सवाल किया. निर्वाचन आयोग की ओर से कहा गया कि दिल्ली फिलहाल चुनावी राज्य नहीं है, इसलिए पर्याप्त समय है. आयोग ने 29 अक्टूबर की तारीख बताई. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि 29 अक्टूबर तक यह पूरी प्रक्रिया कैसे पूरी होगी. आयोग ने कहा कि किसी एक व्यक्ति का नाम हटाया नहीं जाएगा और जरूरत पड़ने पर समय बढ़ाने के लिए वह तैयार है.

सुप्रीम कोर्ट ने FAQs जारी करने का सुझाव दिया

CJI ने कहा कि अलग-अलग राज्यों और याचिकाओं में अब करीब 20 से 25 तरह के सामान्य सवाल सामने आ रहे हैं. उन्होंने निर्वाचन आयोग से कहा कि इन सवालों के जवाब FAQ के जरिए दिए जा सकते हैं, ताकि लोगों को पता हो कि उन्हें क्या करना है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि लोगों को आसान भाषा में समझाया जाना चाहिए कि उन्हें क्या करना है. CJI ने मतदाताओं को भरोसा दिलाने की जरूरत पर भी जोर दिया.

Advertisement

माइग्रेशन और ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ का मुद्दा

CJI ने उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली के बहुत से लोग मूल निवासी होंगे, जिनके माता-पिता के नाम या उनके अपने नाम 2002 की वोटर लिस्ट में हो सकते हैं. वहीं, उनके जैसे लोग जो बाद में दिल्ली आए हैं, उन्हें यह साबित करना पड़ सकता है कि वे दूसरे शहर से दिल्ली आए हैं. CJI ने अपने उदाहरण में कहा कि वह 2019 में दिल्ली आए थे और ऐसे में उनका नाम ‘अनमैप्ड’ के तौर पर सामने आ सकता है. उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि ऐसे मामलों की जांच कैसे की जाएगी.

कपिल सिब्बल ने भी एक मामले का जिक्र किया, जिसमें एक व्यक्ति को नोटिस मिला था. बताया गया कि उसकी मां की मौत 60 साल की उम्र में हुई थी और वह व्यक्ति अब 65 साल का है, फिर भी उसे उम्र के अंतर को लेकर नोटिस मिला. इस पर ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ की जांच के तरीके को लेकर सवाल उठाया गया.

BLO के घर-घर जाने को लेकर भी सवाल

सुनवाई के दौरान BLO के घर-घर जाकर जानकारी जुटाने को लेकर भी सवाल उठे. यह मुद्दा उठाया गया कि दिल्ली में कई इमारतों में लिफ्ट नहीं हैं और ऐसे में BLO हर घर तक कैसे पहुंचेंगे. जस्टिस जे. बागची ने कहा कि दिल्ली में इसे लागू करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, जबकि पश्चिम बंगाल के दूरदराज इलाकों में लोगों तक पहुंचना ज्यादा मुश्किल हो सकता है. उन्होंने सुझाव दिया कि नोटिस वार्ड कार्यालयों में उपलब्ध कराकर लोगों को वहां सहायता लेने के लिए कहा जा सकता है.

Advertisement

CJI ने कहा कि दिल्ली में BLO का नाम और नंबर लोगों को दिया जा सकता है और उन्हें BLO से मिलने या वार्ड कार्यालय जाने के लिए कहा जा सकता है. निर्वाचन आयोग ने कहा कि वह ऐसा पहले से कर रहा है. प्रशांत भूषण ने कहा कि रिटायर्ड जजों, ब्यूरोक्रेट्स और मंत्रियों को भी नोटिस मिले हैं. उन्होंने कहा कि कुछ लोग इसे निष्पक्ष प्रक्रिया बता रहे हैं क्योंकि नोटिस सभी वर्गों के लोगों को मिले हैं.

---- समाप्त ----

Latest News in Hindi »

Advertisement

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने वंदे मातरम् के अनिवार्य गायन पर सजा न देने का आदेश दिया, सरकार को जवाबदेही का नोटिस भेजा
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने वंदे मातरम् के अनिवार्य गायन पर सजा न देने का आदेश दिया, सरकार को जवाबदेही का नोटिस भेजा

क्या वंदे मातरम् न गाना बन सकता है दंडनीय? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा
अपराध

क्या वंदे मातरम् न गाना बन सकता है दंडनीय? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से मांगी रिपोर्ट, लखीमपुर हिंसा में जांच अधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठे
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से मांगी रिपोर्ट, लखीमपुर हिंसा में जांच अधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठे

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली SIR में 33 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजने की प्रक्रिया पर EC से मांगा स्पष्टीकरण
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली SIR में 33 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजने की प्रक्रिया पर EC से मांगा स्पष्टीकरण

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्य बार परिषद में दो महिला वकीलों का सह-नियुक्ति किया
अपराध

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्य बार परिषद में दो महिला वकीलों का सह-नियुक्ति किया

अर्बिट्रेशन काउंसिल ऑफ इंडिया क्यों नहीं बन पाई?
अपराध

अर्बिट्रेशन काउंसिल ऑफ इंडिया क्यों नहीं बन पाई?

ED और NCB की संकीर्ण 'पुलिस अधिकारी' परिभाषा से बंधक कबूलनामों की रोक से बचाव: दिल्ली HC का अहम निर्णय
अपराध

ED और NCB की संकीर्ण 'पुलिस अधिकारी' परिभाषा से बंधक कबूलनामों की रोक से बचाव: दिल्ली HC का अहम निर्णय

सुप्रीम कोर्ट: धार्मिक कारणों से वंदे मातरम् न गाने पर कोई दण्ड नहीं
अपराध

सुप्रीम कोर्ट: धार्मिक कारणों से वंदे मातरम् न गाने पर कोई दण्ड नहीं

ताज़ा ख़बरें