हिस्ट्रीशीटर की केस फाइल गायब, मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा
राजस्थान हाईकोर्ट की रजिस्ट्री के क्रिमिनल ब्रांच से एक हिस्ट्रीशीटर और दो अन्य आरोपियों के रिकॉर्ड गायब हो जाने की खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल से संपर्क करके लंबित मामलों की जल्द सुनवाई का मार्ग सुझाया है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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राजस्थान: हाईकोर्ट की रजिस्ट्री से गायब हुई हिस्ट्रीशीटर की केस फाइल, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
Fri, 28 Aug 2026 09:52 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Fri, 28 Aug 2026 09:52 PM IST
सार
राजस्थान हाईकोर्ट की रजिस्ट्री की क्रिमिनल ब्रांच से हिस्ट्रीशीटर और दो अन्य आरोपियों से जुड़े रिकॉर्ड गायब होने का मामला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड नहीं मिलने की स्थिति में रजिस्ट्रार जनरल से संपर्क करने और लंबित मामले की जल्द सुनवाई का रास्ता सुझाया है।
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विस्तार
वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में आरोपी एक हिस्ट्रीशीटर से जुड़ी केस फाइल राजस्थान हाईकोर्ट की रजिस्ट्री से गायब होने का मामला सामने आया है। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को लंबित प्रकरण की जल्द सुनवाई के लिए राजस्थान हाईकोर्ट का रुख करने की अनुमति दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की कार्रवाई में नहीं किया हस्तक्षेप
सुप्रीम कोर्ट ने 10 अगस्त को मामले की सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) खारिज कर दी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट में लंबित मामले की जल्द सुनवाई का अनुरोध करने की अनुमति दी।
रिकॉर्ड नहीं मिले तो रजिस्ट्रार जनरल से संपर्क का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में संबंधित रिकॉर्ड नहीं मिलते हैं तो याचिकाकर्ता रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष आवेदन कर सकता है, ताकि रिकॉर्ड की तलाश कर उन्हें हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कराया जा सके।
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10 अप्रैल को क्रिमिनल ब्रांच से गायब मिले रिकॉर्ड
मामला ज्ञान चंद अग्रवाल और दो अन्य आरोपियों से जुड़ा है, जिन्होंने अपने खिलाफ दर्ज मामले को रद्द कराने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका के अनुसार, 10 अप्रैल को राजस्थान हाईकोर्ट की रजिस्ट्री की क्रिमिनल ब्रांच में क्वैशिंग याचिकाओं से जुड़े रिकॉर्ड नहीं मिले।
हाईकोर्ट ने मांगी थी विस्तृत रिपोर्ट
रिकॉर्ड गायब मिलने के बाद हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) को मामले में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया कि 22 अप्रैल को मामले की सुनवाई के दौरान रजिस्ट्री की ओर से पेश की गई रिपोर्ट संतोषजनक नहीं पाई गई।
2023 की SOG FIR से जुड़ा है मामला
यह मामला 2023 में स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप की ओर से दर्ज एफआईआर से संबंधित है। आरोपियों पर धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और आपराधिक साजिश सहित कई आरोप हैं।
अग्रवाल पर करीब 298 मामलों का जिक्र
याचिका में ज्ञान चंद अग्रवाल को ‘हिस्ट्रीशीटर’ बताया गया है। इसमें कहा गया है कि राजस्थान पुलिस ने उसके खिलाफ दर्ज करीब 298 मामलों का सत्यापन किया था। प्रवर्तन निदेशालय की एक प्रेस विज्ञप्ति का भी हवाला दिया गया है, जिसमें जयपुर में अग्रवाल के खिलाफ 300 से अधिक एफआईआर दर्ज होने और राजस्थान पुलिस द्वारा उसे हिस्ट्रीशीटर घोषित किए जाने की बात कही गई थी।
यह भी पढ़ें: मकराना का बीजेपी को अल्टीमेटम, बोले- मांग नहीं मानी तो चुनाव में करेंगे विरोध
हाईकोर्ट में जांच में शामिल नहीं होने का आरोप
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के पहले के निर्देश के बावजूद अग्रवाल जांच में शामिल नहीं हुआ, जबकि उसे गिरफ्तारी से संरक्षण मिलता रहा। हालांकि, इस मामले की रिकॉर्ड गुम होने की घटना को सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश और अधिवक्ता संगठनों की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली को लेकर लगाए गए हालिया आरोपों से जोड़ने का कोई आधार नहीं है।
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सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की कार्रवाई में नहीं किया हस्तक्षेप
सुप्रीम कोर्ट ने 10 अगस्त को मामले की सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) खारिज कर दी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट में लंबित मामले की जल्द सुनवाई का अनुरोध करने की अनुमति दी।
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रिकॉर्ड नहीं मिले तो रजिस्ट्रार जनरल से संपर्क का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में संबंधित रिकॉर्ड नहीं मिलते हैं तो याचिकाकर्ता रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष आवेदन कर सकता है, ताकि रिकॉर्ड की तलाश कर उन्हें हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कराया जा सके।
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10 अप्रैल को क्रिमिनल ब्रांच से गायब मिले रिकॉर्ड
मामला ज्ञान चंद अग्रवाल और दो अन्य आरोपियों से जुड़ा है, जिन्होंने अपने खिलाफ दर्ज मामले को रद्द कराने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका के अनुसार, 10 अप्रैल को राजस्थान हाईकोर्ट की रजिस्ट्री की क्रिमिनल ब्रांच में क्वैशिंग याचिकाओं से जुड़े रिकॉर्ड नहीं मिले।
हाईकोर्ट ने मांगी थी विस्तृत रिपोर्ट
रिकॉर्ड गायब मिलने के बाद हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) को मामले में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया कि 22 अप्रैल को मामले की सुनवाई के दौरान रजिस्ट्री की ओर से पेश की गई रिपोर्ट संतोषजनक नहीं पाई गई।
2023 की SOG FIR से जुड़ा है मामला
यह मामला 2023 में स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप की ओर से दर्ज एफआईआर से संबंधित है। आरोपियों पर धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और आपराधिक साजिश सहित कई आरोप हैं।
अग्रवाल पर करीब 298 मामलों का जिक्र
याचिका में ज्ञान चंद अग्रवाल को ‘हिस्ट्रीशीटर’ बताया गया है। इसमें कहा गया है कि राजस्थान पुलिस ने उसके खिलाफ दर्ज करीब 298 मामलों का सत्यापन किया था। प्रवर्तन निदेशालय की एक प्रेस विज्ञप्ति का भी हवाला दिया गया है, जिसमें जयपुर में अग्रवाल के खिलाफ 300 से अधिक एफआईआर दर्ज होने और राजस्थान पुलिस द्वारा उसे हिस्ट्रीशीटर घोषित किए जाने की बात कही गई थी।
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हाईकोर्ट में जांच में शामिल नहीं होने का आरोप
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के पहले के निर्देश के बावजूद अग्रवाल जांच में शामिल नहीं हुआ, जबकि उसे गिरफ्तारी से संरक्षण मिलता रहा। हालांकि, इस मामले की रिकॉर्ड गुम होने की घटना को सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश और अधिवक्ता संगठनों की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली को लेकर लगाए गए हालिया आरोपों से जोड़ने का कोई आधार नहीं है।
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