होम›मुकदमे›ससुर को घरेलू हिंसा कानून के तहत जिम्मेदार नहीं ठहराया गया: दिल्ली हाईकोर्ट का निर्णय
मुकदमे

ससुर को घरेलू हिंसा कानून के तहत जिम्मेदार नहीं ठहराया गया: दिल्ली हाईकोर्ट का निर्णय

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि ससुर को बेटे के व्यवहार पर नियंत्रण न रख पाने के कारण घरेलू हिंसा अधिनियम के अंतर्गत जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। न्यायाधीश ने कहा कि केवल पितृ-पुत्र संबंध से ही यह अधिनियम लागू नहीं होता और ससुर के द्वारा कथित दुर्व्यवहार का पर्याप्त प्रमाण नहीं था।

2 अक्टूबर 2026 को 01:04 pm बजे
ससुर को घरेलू हिंसा कानून के तहत जिम्मेदार नहीं ठहराया गया: दिल्ली हाईकोर्ट का निर्णय

सौजन्य से:- Hindustan

बेटे को कंट्रोल न करने के लिए घरेलू हिंसा कानून के तहत ससुर जिम्मेदार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि उसके ससुर ने किसी अन्य महिला के साथ संबंधों को लेकर उससे अलग रह रहे पति के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी ससुर को केवल इसलिए घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि वह अपने बेटे के आचरण को नियंत्रित करने में नाकाम रहा। जस्टिस मधु जैन ने एक महिला की याचिका खारिज करते हुए यह आदेश दिया। महिला ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें घरेलू हिंसा के संबंध में उसके ससुर के खिलाफ कार्यवाही आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया गया था।

याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि उसके ससुर ने किसी अन्य महिला के साथ संबंधों को लेकर उससे अलग रह रहे पति के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। अदालत ने कहा कि घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम की धारा तीन में ऐसे आचरण को शामिल किया गया है जिससे शारीरिक या मानसिक क्षति होती है या होने का खतरा होता है। अदालत ने कहा कि इसमें मौखिक, भावनात्मक और आर्थिक दुर्व्यवहार भी शामिल हैं, हालांकि, केवल पक्षकारों के बीच घरेलू संबंध का होना इस धारा को लागू करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

'बेटे को कंट्रोल ना करने के लिए पिता जिम्मेदार नहीं'

अदालत ने कहा कि कथित वैवाहिक दुर्व्यवहार में ससुर की कोई भागीदारी नहीं थी और किसी पिता को केवल इसलिए घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि उसने अपने बेटे के आचरण को नियंत्रित नहीं किया।

अगस्त में दिए गए आदेश में, कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि इस मामले में याचिकाकर्ता और ससुर के बीच एक फर्म में पार्टनर के तौर पर बिनेस का रिश्ता भी था। कोर्ट ने कहा कि भले ही कमर्शियल विवाद सेक्शन 3 के दायरे से बाहर नहीं है, लेकिन यह साबित करना ज़रूरी है कि उसे DV एक्ट के तहत सुरक्षित किसी संसाधन से वंचित किया गया था।

कोर्ट ने कहा कि इस मामले के तथ्यों से ससुर द्वारा घरेलू हिंसा का कोई खतरा नहीं दिखता। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उनके व्यवहार में अपमान, मज़ाक उड़ाना, बेइज़्ती करना या धमकी देना शामिल था, लेकिन इस दावे के समर्थन में कोई तथ्य नहीं बताए गए।कोर्ट ने कहा, अपमानित करना', 'चिल्लाना' और 'गाली देना' जैसे शब्द सिर्फ़ नतीजे हैं। इनके पीछे के तथ्यों के बिना, ये सेक्शन 3 के तहत मौखिक या भावनात्मक शोषण नहीं माने जा सकते।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
केरल हाई कोर्ट ने पिता के पैसे से खरीदी गई संयुक्त‑नाम वाली संपत्ति को पत्नी की अकेली मालकिन घोषित किया
मुकदमे

केरल हाई कोर्ट ने पिता के पैसे से खरीदी गई संयुक्त‑नाम वाली संपत्ति को पत्नी की अकेली मालकिन घोषित किया

सुप्रीम कोर्ट: बिना भरे ई‑चालान पर गाड़ी जप्त, पंजीयन एवं पीयूसी नवीनीकरण रोके
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट: बिना भरे ई‑चालान पर गाड़ी जप्त, पंजीयन एवं पीयूसी नवीनीकरण रोके

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार को गंगा के फ्लड‑प्लेन से अतिक्रमण हटाने के लिए 8 हफ्ते की अंतिम समय सीमा दी
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार को गंगा के फ्लड‑प्लेन से अतिक्रमण हटाने के लिए 8 हफ्ते की अंतिम समय सीमा दी

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार को 8 हफ्ते में गंगा बाढ़ क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने का अंतिम आदेश
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार को 8 हफ्ते में गंगा बाढ़ क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने का अंतिम आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के अनुकंपा नियुक्ति आदेश को बरकरार रखा, पोते को नौकरी मिलने की संभावना
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के अनुकंपा नियुक्ति आदेश को बरकरार रखा, पोते को नौकरी मिलने की संभावना

सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे की करुणा पदस्थापना आदेश में कोई बदलाव नहीं किया
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे की करुणा पदस्थापना आदेश में कोई बदलाव नहीं किया

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के दया‑नियुक्ति आदेश को बरकरार रखा
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के दया‑नियुक्ति आदेश को बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया: चेक रद्दीकरण पर ड्रॉअर के पते पर भेजा नोटिस वैध, भले ही परिवार के सदस्य ने प्राप्त किया
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया: चेक रद्दीकरण पर ड्रॉअर के पते पर भेजा नोटिस वैध, भले ही परिवार के सदस्य ने प्राप्त किया

ताज़ा ख़बरें