सुप्रीम कोर्ट ने केपीएससी पशु चिकित्सा भर्ती जांच पर रोक, एसआईटी गठन को निलंबित किया
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश को रोक दिया, जिसमें केपीएससी की 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं की नई जांच और विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित करने का निर्देश था। कोर्ट ने राज्य सरकार को 12 अक्टूबर तक किसी भी आपत्ति या वैकल्पिक सदस्य नाम सुझाने को कहा, जबकि सरकार ने कहा कि CID ने पहले ही जांच पूरी कर ली है।

सौजन्य से:- navbharattimes.indiatimes.com
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती में कथित धांधली की नए सिरे से जांच और SIT गठन के कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) की पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती में कथित अनियमितताओं की नए सिरे से जांच करने और विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित करने के कर्नाटक हाई कोर्ट के निर्देश पर रोक लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने कर्नाटक सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया। सरकार ने उच्च न्यायालय के 21 सितंबर के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं और केपीएससी की अन्य भर्तियों से जुड़े आरोपों की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी।
12 अक्टूबर तक मांगा जवाब
पीठ ने राज्य सरकार की याचिका पर हाई कोर्ट में मूल याचिकाकर्ताओं से 12 अक्टूबर तक जवाब मांगा है। साथ ही, राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह एसआईटी में नियुक्त अधिकारियों पर यदि कोई आपत्ति हो तो उसका उल्लेख करते हुए अतिरिक्त हलफनामा सीलबंद लिफाफे में दाखिल करे।
पीठ ने किया स्पष्ट
पीठ ने कहा कि राज्य सरकार जांच टीम के लिए वैकल्पिक नाम भी सुझा सकती है। उसने स्पष्ट किया कि अंतरिम रोक उच्च न्यायालय के फैसले के कुछ पैराग्राफ पर लागू होगी, जिनमें एसआईटी के गठन और कथित अनियमितताओं की नए सिरे से जांच का निर्देश दिया गया था।
पीठ ने अपने आदेश में कही ये बात
पीठ ने बृहस्पतिवार को अपने आदेश में कहा, ‘‘इस बीच, पैराग्राफ 34(एक) और 34(दो) में दिए गए निर्देशों पर रोक रहेगी। 12 अक्टूबर को जवाब के लिए नोटिस जारी किया जाता है। अगली तारीख तक राज्य सरकार उच्च न्यायालय के आदेश के तहत गठित एसआईटी के सदस्यों के खिलाफ यदि कोई आपत्ति है, तो उसका उल्लेख करते हुए सीलबंद लिफाफे में दाखिल करे और एसआईटी के लिए वैकल्पिक नाम भी सुझा सकती है।’’
SC में वकील ने दी ये दलील
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि अपराध जांच विभाग (सीआईडी) पहले से ही मामले की जांच कर रहा है और जांच लगभग पूरी हो चुकी है। नए सिरे से जांच का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर रहे सीआईडी अधिकारियों के खिलाफ कोई विशिष्ट आरोप नहीं हैं, जिससे नए सिरे से जांच की जरूरत हो।
एसआईटी सदस्यों की नियुक्ति पर उठाए सवाल
उन्होंने उच्च न्यायालय द्वारा राज्य सरकार के सुझाव लिए बिना एसआईटी के सदस्यों का चयन किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने एसआईटी में कारागार महानिदेशक एवं महानिरीक्षक आलोक कुमार को शामिल किए जाने का भी उल्लेख किया।
क्या था पूरा मामला
हाई कोर्ट ने 21 सितंबर को पशु चिकित्सकों की भर्ती में केपीएससी की कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एसआईटी गठित करने का आदेश दिया था।अदालत ने कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी गठित करने और सीआईडी तथा संबंधित क्षेत्र के पुलिस थाने के पास मौजूद साक्ष्य एसआईटी को सौंपने का निर्देश दिया था।
राज्यपाल थावरचंद गहलोत पर थे ये आरोप
केपीएससी तब जांच के दायरे में आया था, जब राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने उसके अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार को निलंबित कर दिया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपनी दो बेटियों का औद्योगिक विस्तार अधिकारी के पद पर कथित तौर पर अवैध तरीके से चयन कराने में मदद की।
लेखक के बारे मेंदीपांशुदीपांशु वर्तमान में 'नवभारत टाइम्स ऑनलाइन' में कंसल्टेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ. भीम राव अंबेडकर कॉलेज से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन और आईआईएमसी (IIMC) दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। मीडिया इंडस्ट्री में एक साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपांशु ने अपने करियर की शुरुआत साल 2025 में 'NDTV इंडिया' से की थी।उन्हें डिजिटल न्यूज रूम की तेज रफ्तार और ब्रेकिंग न्यूज कल्चर की अच्छी समझ है। दीपांशु की मुख्य रुचि राजनीति और क्राइम खबरों में है। वह बिहार चुनाव 2025, बजट 2026 और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों को कवर कर चुके हैं। इसके अलावा वह यूटिलिटी, लोकल, जंगल न्यूज और गुड न्यूज जैसी खबरों पर भी लगातार काम करते हैं।सोशल मीडिया और गूगल ट्रेंड्स पर उनकी खास नजर रहती है। वह इंटरनेट पर वायरल हो रहे मुद्दों और पाठकों की पसंद को समझकर खबरों को बहुत सरल, सटीक और असरदार तरीके से पेश करते हैं।... और पढ़ें
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