सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार मामले में दी लंबी सुनवाई की चेतावनी, दावेदार को बरी किया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में अनावश्यक और अत्यधिक सबूत पेश करने से सुनवाई देर तक चलती है। इस टिप्पणी का आधार वह अपील था जिसमें गुवाहाटी हाई कोर्ट के 2018 के दोषसिद्धि को चुनौती दी गई और व्यक्ति को बरी किया गया। मामला असम के पशुपालन विभाग की शिकायत पर शुरू हुआ था, जिसमें फर्जी आरसीसी बिलों से पाँच लाख नौसठ हजार दो सौ रुपये का नुकसान बताया गया।

सौजन्य से:- Hindustan
सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार मामले में व्यक्ति को किया बरी
सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामलों में सुनवाई की लंबाई पर टिप्पणी की है, जिसमें कहा गया है कि अनावश्यक और बहुत अधिक सबूत पेश करने के कारण यह समस्या उत्पन्न होती है। यह टिप्पणी एक व्यक्ति की अपील पर की गई, जिसे गुवाहाटी हाई कोर्ट द्वारा दोषी ठहराया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में सुनवाई लंबे समय तक चलने का इतिहास रहा है। इसकी एक बड़ी वजह अक्सर अनावश्यक और बहुत ज्यादा सबूत पेश किया जाना है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने की। पीठ ने 1993 में दर्ज भ्रष्टाचार के एक मामले में एक व्यक्ति को बरी कर दिया।
भ्रष्टाचार के मामलों में सबूत
पीठ ने कहा कि हम यह देखे बिना नहीं रह सकते कि भ्रष्टाचार के मामलों में बहुत बड़ी मात्रा में सबूत पेश किए जाते हैं। यह अक्सर अदालत के लिए परेशानी पैदा करने वाला होता है, खासकर तब, जब सबूत के रूप में पेश किए जाने वाले कई पहलू आरोप को साबित करने या आरोपी सरकारी कर्मचारी का अपराध साबित करने में कोई खास मदद नहीं करते।
अपील का विवरण
सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला उस व्यक्ति की अपील पर सुनाया, जिसमें उसने गुवाहाटी हाई कोर्ट के मई 2018 के दोषसिद्धि के आदेश को चुनौती दी थी।
जांच की पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि इस मामले की जांच असम के पशुपालन विभाग से मिली शिकायत के बाद शुरू हुई थी। शिकायत में कहा गया था कि पांच लाख 97 हजार 200 रुपये का नुकसान हुआ। यह नुकसान दवाइयों की आपूर्ति के लिए फर्जी आरसीसी बिल जमा करने के कारण हुआ था। आरोप था कि दवाइयां वास्तव में आपूर्ति नहीं की गईं, लेकिन उनका भुगतान ऐसी फर्जी कंपनी को कर दिया गया, जिसका वास्तव में कोई अस्तित्व नहीं था।
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