वन्यजीव अपराध कैसे रोकें, क्या है कानून, कानपुर की खास कार्यशाला में ट्रेनिंग
वन्यजीव अपराध कैसे रोकें, क्या है कानून, कानपुर की खास कार्यशाला में ट्रेनिंग वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) ने लिया भाग. By ETV Bharat Uttar Pradesh Team Published : Augus…

सौजन्य से:- ETV Bharat
वन्यजीव अपराध कैसे रोकें, क्या है कानून, कानपुर की खास कार्यशाला में ट्रेनिंग
वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) ने लिया भाग.
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : August 22, 2026 at 11:44 AM IST
कानपुर: वन्यजीव अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाने और कार्रवाई को और मजबूत करने के उद्देश्य से वानिकी प्रशिक्षण संस्थान कानपुर नगर में क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) के समन्वय से आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने अधिकारियों और फील्ड कर्मचारियों को वन्यजीव अपराध की पहचान, रोकथाम और कानूनी कार्रवाई से जुड़ी जानकारी दी.
वन विभाग कानपुर मंडल की ओर से कार्यशाला आयोजित की गई. कानपुर मंडल के विभिन्न वन प्रभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के अलावा पुलिस व रेलवे विभाग के अधिकारी एवं फील्ड स्टाफ भी शामिल हुए. वन्यजीव अपराध की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात क्षेत्रीय वन अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी प्रशिक्षण में हिस्सा लिया.
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं निदेशक प्रोजेक्ट टाइगर उत्तर प्रदेश राम कुमार रहे. वानिकी प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक संजीव कुमार, कानपुर प्राणी उद्यान के निदेशक कन्हैया पटेल, झांसी मंडल के मुख्य वन संरक्षक एचवी गिरीश, कानपुर मंडल के मुख्य वन संरक्षक एनके जानू और डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार समेत वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
WCCB के उपनिदेशक नायर विष्णराजु, WII के वन अपराध विशेषज्ञ सीपी शर्मा और वन एवं वन्यजीव कानून विशेषज्ञ सुरेश चंद्र यादव ने प्रशिक्षण दिया. विशेषज्ञों ने न्यायालय में वन्यजीव अपराध से जुड़े मामलों की प्रक्रिया, कार्रवाई के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और प्रतिबंधित वन्यजीव सामग्री की पहचान के बारे में जानकारी दी.
प्रशिक्षण को व्यावहारिक बनाने के लिए हैंड्स-ऑन डेमॉन्स्ट्रेशन भी कराया गया. इसके अलावा प्रतिभागियों के साथ प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित कर वन्यजीव अपराध से जुड़े मामलों में आने वाली व्यवहारिक चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा की गई.
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