रिक्तियों के कारण ट्रिब्यूनल निलंबित नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से शीघ्र नियुक्तियों की अपील
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खाली पदों के कारण ट्रिब्यूनल निष्क्रिय नहीं होना चाहिए और केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि नई नियुक्तियों तक रिटायर होते सदस्यों का कार्यकाल एक महीने के आसपास बढ़ाया जाए। अटॉर्नी जनरल ने बताया कि नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और एड‑हॉक विस्तार पर विचार नहीं किया जाना चाहिए, जबकि कोर्ट ने स्पष्ट जवाब मांगा।

सौजन्य से:- ETV Bharat
रिक्त पदों की वजह से ट्रिब्यूनल खत्म नहीं होने चाहिए: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा
अटॉर्नी जनरल ने पीठ से कहा कि नई नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू हो गई है और एड हॉक एक्सटेंशन पर विचार नहीं किया जाना चाहिए.
By Sumit Saxena
Published : September 15, 2026 at 2:26 PM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यह टिप्पणी की कि रिक्त पदों के कारण ट्रिब्यूनल निष्क्रिय नहीं होने चाहिए, और केंद्र सरकार से कहा कि वह नई नियुक्तियां होने तक ऐसे अर्द्ध-न्यायिक निकायों (quasi-judicial bodies) के रिटायर हो रहे पीठासीन अधिकारियों और सदस्यों का कार्यकाल एक महीने या उसके आसपास बढ़ाने पर विचार करे.
इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने की.
केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने पीठ से कहा कि नई नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू हो गई है और एड हॉक एक्सटेंशन की ऐसी किसी भी अर्जी पर विचार नहीं किया जाना चाहिए.
अटॉर्नी जनरल का जवाब एक वकील की उस बात पर आया जिसमें उन्होंने अलग-अलग ट्रिब्यूनल में खाली पदों के बारे में बताया था, जिसमें DRAT (डेट रिकवरी अपीलेट ट्रिब्यूनल) भी शामिल है, जिसके कुछ सदस्य जल्द ही रिटायर हो रहे हैं.
अटॉर्नी जनरल ने कहा, "अब जब सब कुछ शुरू हो गया है, तो इन IAs (अंतरिम एप्लीकेशन) पर अब और विचार नहीं किया जा सकता है. एक या दो महीने से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए."
पीठ ने अटॉर्नी जनरल से पूछा, "क्या आप अपने स्तर पर यह निर्णय ले सकते हैं कि आप एक या दो महीने के लिए एड हॉक व्यवस्था बढ़ाएंगे."
सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि उसे इस बात का एक निश्चित जवाब चाहिए कि पदों को भरा जाएगा, और आगे जोड़ा कि जैसे ही वह इन याचिकाओं का निपटारा करेगी और अगर कोई नई नियुक्ति नहीं की जाती है, तो (विवाद का) एक और दौर शुरू हो जाएगा.
यह तर्क दिया गया कि अब नया ट्रिब्यूनल सुधार अधिनियम, 2026 आ गया है और यह नियुक्ति प्रक्रिया का प्रावधान करता है.
CJI ने कहा, "हम नहीं चाहते कि ट्रिब्यूनल खत्म हो जाएं. मौजूदा व्यवस्था एड हॉक पर जारी रह सकती है."
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर बुधवार को सुनवाई तय की है.
इस महीने की शुरुआत में, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अलग-अलग ट्रिब्यूनल के 248 सदस्यों को ट्रिब्यूनल सुधार अधिनियम, 2026 के तहत सेवा विस्तार के लिए योग्य पाया गया है और उनकी सेवा बढ़ाई जा रही है.
यह भी पढ़ें- हाई कोर्ट से केस ट्रांसफर नहीं करेंगे, सत्य निकेतन हादसे पर सुप्रीम कोर्ट
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