सुप्रीम कोर्ट ने कहा 'पूरा केस खारिज होने लायक', निलंबित DIG भुल्लर की जमानत याचिका पर तीखी टिप्पणी
नई दिल्ली में हुए सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने निलंबित पंजाब पुलिस DIG हरचरण सिंह भुल्लर की दूसरी जमानत याचिका को 'शत-प्रतिशत खारिज करने योग्य' कहा। कोर्ट ने चार हफ्ते बाद पुनः सुनवाई निर्धारित की और दो छाया गवाहों से पूछताछ करने की अनुमति मिलने पर मामला पुनः देखेगा। भुल्लर को 2025 में भ्रष्टाचार के आरोप में CBI ने गिरफ्तार किया था और बाद में निलंबित किया गया था।

सौजन्य से:- ETV Bharat
'यह पूरी तरह खारिज करने लायक मामला है', निलंबित DIG भुल्लर की जमानत अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
पंजाब पुलिस के निलंबित DIG हरचरण सिंह भुल्लर के वकील ने अदालत से दो छाया गवाहों से पूछताछ करने की अनुमति देने का अनुरोध किया.
By Sumit Saxena
Published : September 15, 2026 at 1:22 PM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को पंजाब पुलिस के निलंबित DIG हरचरण सिंह भुल्लर की दूसरी जमानत याचिका पर सुनवाई हुई. इस दौरान कोर्ट ने कहा कि यह शत-प्रतिशत खारिज करने लायक मामला है.
भुल्लर को पिछले साल अक्टूबर में CBI ने भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ्तार किया था. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने भुल्लर की जमानत याचिका पर सुनवाई की.
CJI ने पूछा, "यह पूरी तरह से खारिज किए जाने योग्य मामला है! आप इसे अभी खारिज कराना चाहते हैं या बाद में?"
पीठ ने मामले की सुनवाई चार हफ्ते बाद निर्धारित की. पीठ ने यह भी इशारा किया कि कुछ जरूरी गवाहों से पूछताछ के बाद वह जमानत याचिका की जांच-पड़ताल करेगी.
सुनवाई के दौरान, भुल्लर के वकील ने दलील दी कि शिकायतकर्ता और एक अहम गवाह से अभी तक पूछताछ नहीं की गई है. वकील ने शीर्ष अदालत से दो छाया गवाहों (shadow witnesses) से पूछताछ करने की अनुमति देने का भी अनुरोध किया.
इस मुकदमे की शुरुआत अक्टूबर 2025 में दर्ज एक एफआईआर से हुई थी, जिसे भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 61(2) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 7-ए के तहत दर्ज किया गया था.
तत्कालीन DIG हरचरण सिंह भुल्लर को अक्टूबर 2025 में मोहाली में उनके ऑफिस से गिरफ्तार किया गया था. उन पर बिचौलियों के जरिये रिश्वत लेने का आरोप है. गिरफ्तारी के बाद पंजाब सरकार ने भुल्लर को निलंबित कर दिया था.
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