सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टर‑हस्पिटल को उपभोक्ता संरक्षण के दायरे में रखने की पुष्टि की
सुप्रीम कोर्ट की पाँच जजों की पीठ ने मेडिको लीगल सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा दायर क्यूरेटिव याचिका को खारिज कर दिया, जिससे 1995 के ऐसे फैसले को नहीं बदला गया जिसमें चिकित्सा सेवाओं को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के दायरे में लाया गया था। कोर्ट ने कहा कि वकीलों के संबंध में दिया गया अपवाद इस मामले पर लागू नहीं होता और इस पर पुनर्विचार की आवश्यकता नहीं है। इस निर्णय के साथ ही कोर्ट ने जन सूचना सेवा के तहत निर्णयों को हिंदी में उपलब्ध कराकर जनता तक न्यायिक जानकारी पहुंचाने की नई पहल की घोषणा की।

सौजन्य से:- Amar Ujala
सुप्रीम कोर्ट: शीर्ष अदालत का कड़ा रुख, कहा- उपभोक्ता कानून के दायरे में ही रहेंगे डॉक्टर, मामला क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डॉक्टर और अस्पताल आगे भी उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत ही मरीजों के प्रति जवाबदेह रहेंगे। इस बारे में दायर एक सुधारात्मक याचिका को सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने खारिज कर दिया। याचिका में 1995 के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसमें चिकित्सा सेवाओं को उपभोक्ता संरक्षण कानून (सीपीए) के दायरे में लाया गया था।
1995 के सुप्रीम फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस एमएम सुंदरेश, जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पांच जजों की पीठ ने 9 सितंबर को याचिका खारिज करते हुए कहा, क्यूरेटिव याचिका पर विचार करने के लिए तय किए गए नियमों के तहत कोई मामला नहीं बनता है। याचिका मेडिको लीगल सोसायटी ऑफ इंडिया के डॉ राजीव डी जोशी ने दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट का 1995 का ऐतिहासिक फैसला इंडियन मेडिकल एसोसिएशन बनाम वीपी शांता मामले में आया था जिसमें मरीज को उपभोक्ता मानते हुए मेडिकल सेवाओं में कमी होने पर उसे डॉक्टर और अस्पताल के खिलाफ उपभोक्ता अदालत जाने की अनुमति दी गई थी।
वकीलों को मिली छूट को बनाया था आधार
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया गया था जिसमें शीर्ष कोर्ट ने कहा था कि कानूनी पेशेवरों (वकीलों) के खिलाफ सेवा में कमी के लिए उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती। इस फैसले के आधार पर क्यूरेटिव याचिका में 1995 के फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध किया गया था।
संदर्भ गैर जरूरी
पीठ ने कहा, यह संदर्भ गैर-जरूरी था। वकीलों से जुड़ा पिछला फैसला खास तौर पर कानूनी पेशे से संबंधित था और उपभोक्ता संरक्षण कानून से वकीलों को बाहर रखने का मतलब यह नहीं है कि चिकित्सा पेशेवरों पर लागू कानून के मामले को फिर से खोलने की जरूरत है।
जटिल कानूनी भाषा को आसान बनाने की पहल, अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले हिंदी में भी पढ़ सकेंगे
सुप्रीम कोर्ट ने फैसलों को जनसामान्य तक पहुंचाने की दिशा में बड़ी पहल की है। अदालतों में जटिल कानूनी भाषा और अंग्रेजी के आधिपत्य जैसे मंजर के बीच देश की शीर्ष अदालत ने तय किया है कि न्यायिक जानकारी आम लोगों तक सरल तरीके से पहुंचाने के लिए हिंदी में ‘जन सूचना सेवा’ शुरू की जाएगी। सोमवार, 14 सितंबर को हिंदी दिवस के मौके पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘जन सूचना सेवा’ के तहत महत्वपूर्ण फैसलों और आदेशों का सार सरल हिंदी में उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, 15 से 30 मिनट की अवधि वाले हिंदी ऑडियो-वीडियो बुलेटिन भी जारी किए जाएंगे। बाद में चरणबद्ध तरीके से इसे अन्य भारतीय भाषाओं में भी शुरू किया जाएगा।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
पहला पिकलबॉल बिजनेस‑लॉ कप: उद्यमियों‑वकीलों का मिलन, करुणा का प्रसार

राष्ट्रीय लोक अदालत ने 23,581 मामले निपटाए, 2.19 करोड़ रुपये का सेटलमेंट

सीजेआई ने जजों के विरुद्ध शिकायत निपटान के सिस्टम को तेज़ और भरोसेमंद कहा

ओडिशा हाई कोर्ट ने जज इप्सिता मोहनती को पुनर्स्थापित किया, कहा उनके बेटे के ऑटिज़्म के इलाज की कमी ने इस्तीफे को अनैच्छिक बना दिया

दिल्ली हाई कोर्ट ने पान मसाला केस में कंपनी की याचिका खारिज, शाहरुख, अजय, टाइगर को नोटिस पर चुनौती निरस्त

सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों को उपभोक्ता संरक्षण के दायरे में रहने की पुष्टि की

भादो जात्रा में देवी-देवताओं की अनोखी अदालत: 35 को उम्रकैद, कई को एक वर्ष रिमांड

सुप्रीम कोर्ट ने 1995 के फैसले को बरकरार रखते हुए डॉक्टरों को कंज्यूमर एक्ट से बाहर नहीं किया
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने हिंदी में फैसलों के सारांश और ऑडियो‑वीडियो बुलेटिन की शुरुआत की
- जिला अदालतों को न्याय का मुख्य द्वार, वकील बनें प्रणाली के स्तम्भ
- सहरसा में राष्ट्रीय लोक अदालत में 2,389 विवादों का समाधान
- गाज़ियाबाद में वैवाहिक विवादों में महिलाओं ने अदालत का रास्ता चुना, समझौते में पुरुष पक्ष ने ही किया वापसी
- लोक अदालत ने अयोध्या में 89,710 मुकदमों का निस्तारण कर किया नया रिकॉर्ड
- जस्टिस एस चंद्रशेखर को देवघर में अधिवक्ता संघ ने सम्मानित, बाबा बैद्यनाथ का मोमेंटो व वस्त्र भेंट
- इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बिना नोटिस के राजस्व अभिलेखों के आदेश पर रोक लगाई
- सुप्रीम कोर्ट ने हिंदी में फैसलों की सार्वजनिक सेवा शुरू की, ऑडियो‑वीडियो बुलेटिन भी मिलेगा

