महिला पहलवानों के छेड़छाड़ आरोपों से मुक्ति: Brijbhushan Sharan Singh को बड़ी जीत
दिल्ली की राउजेवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों से छेड़छाड़ के आरोप में कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और उनके सहयोगी को आरोप मुक्त कर दिया।

सौजन्य से:- Hindustan
बृजभूषण शरण सिंह की बड़ी जीत, अदालत ने महिला पहलवानों से छेड़छाड़ के आरोप से मुक्त किया
भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत मिल गई है। दिल्ली की एक अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों से छेड़छाड़ के मामले में आरोप मुक्त कर दिया है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत मिल गई है। दिल्ली की एक अदालत ने महिला पहलवानों से छेड़छाड़ के मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व प्रमुख को आरोप मुक्त घोषित कर दिया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह के साथ ही WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को भी आरोप मुक्त कर दिया है।
एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने 6 महिला पहलवानों की ओर से दर्ज कराए गए मामले में अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। मई 2024 में अदालत ने सिंह के खिलाफ आपराधिक धमकी देने के आरोप तय करने का आदेश दिया था। हालांकि, छह महिला पहलवानों में से एक की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में अदालत ने उन्हें पहले ही आरोपमुक्त कर दिया था।
बृजभूषण शरण सिंह ने अदालत के फैसले के बाद पहली प्रतिक्रिया में कहा, 'कोर्ट ने मुझे बाइज्जत बरी किया। मैंने उस दिन कहा था कि मैं खुद फांसी पर लटक जाऊंगा, वह नौबत नहीं आई, आज मैं कोर्ट से जा रहा हूं।' आरोप लगाने वालों और राजनीतिक साजिश के सवालों पर पूर्व सांसद ने कुछ भी कहने से इनकार करते हुए कहा,'चलिए जो हुआ सो हुआ।'
क्या-क्या आरोप लगाए गए थे
दिल्ली पुलिस ने 15 जून को 6 बार के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल प्रयोग), धारा 354ए (यौन उत्पीड़न), धारा 354डी (पीछा करना) और धारा 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था।
बृजभूषण के खिलाफ जंतर-मंतर पर चला था आंदोलन, टिकट भी कटा
बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी और कार्रवाई की मांग को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 2023 में पहलवानों ने आंदोलन किया था, जिसमें विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया और साक्षी मलिक जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवान शामिल थे। केस दर्ज होने के बाद बृजभूषण शरण सिंह को भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया था। पार्टी ने उनके बेटे को कैसरगंज सीट से उम्मीदवार बनाया था।
लेखक के बारे में
Sudhir Jhaसुधीर झा | वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम लीड
(दिल्ली-एनसीआर, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश)
सुधीर झा एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार और संपादकीय नेतृत्वकर्ता हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में LiveHindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश सहित 8 राज्यों की कवरेज संभालने वाली स्टेट टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। वे राजनीति, अपराध और प्रशासन से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज से लेकर विश्लेषणात्मक रिपोर्ट तक, तथ्य-आधारित और संतुलित पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
15 सालों का अनुभव
सुधीर झा ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। दैनिक आज समाज और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम किया। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर की ग्राउंड रिपोर्टिंग के बाद उन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल, न्यूजट्रैक और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क के अनुभव ने उनकी विश्लेषणात्मक समझ को और व्यापक बनाया। डिजिटल पत्रकारिता में उन्हें होमपेज मैनेजमेंट, लाइव इवेंट कवरेज (लोकसभा चुनाव, केंद्रीय बजट), हाइपरलोकल रिपोर्टिंग और कंटेंट क्वालिटी कंट्रोल में विशेषज्ञता प्राप्त है।
विश्वसनीय खबरों का लेखन
सुधीर झा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होमपेज मैनेजमेंट, लाइव इवेंट कवरेज (जैसे लोकसभा चुनाव और केंद्रीय बजट), हाइपरलोकल रिपोर्टिंग और कंटेंट क्वालिटी कंट्रोल में विशेषज्ञता रखते हैं। उनकी संपादकीय शैली में स्पीड और वेरिफिकेशन का संतुलन प्रमुख है। वे जमीनी स्रोतों, स्ट्रिंगर्स और रिपोर्टर्स के साथ समन्वय कर एक्सक्लूसिव और इम्पैक्टफुल स्टोरीज पर फोकस करते हैं। वे प्रत्येक खबर में मल्टी-सोर्स वेरिफिकेशन, सभी पक्षों की प्रतिक्रिया और विशेषज्ञों की राय शामिल करने पर जोर देते हैं। सुधीर झा न्यूज राइटिंग में विश्वसनीयता और निष्पक्षता का विशेष ध्यान रखते हैं। उनकी संपादकीय प्राथमिकता सार्वजनिक हित, निष्पक्षता और तथ्यपरकता है। सुधीर झा का मानना है कि विश्वसनीयता, पारदर्शिता और तथ्यपरकता ही पत्रकारिता की असली ताकत है।
शिक्षा और सम्मान
सुधीर झा ने कंप्यूटर साइंस में स्नातक किया है और दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। डिजिटल पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें ‘Digi Journo of the Year 2024–25’ और ‘Digital Content Award 2023–24’ से सम्मानित किया जा चुका है। इससे पहले उन्हें 'हम से सीखो' विशेष कैंपेन के लिए भी सम्मानित किया गया है।
विशेषज्ञता
राजनीति, अपराध और प्रशासनिक मामलों की गहन व तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग
ब्रेकिंग न्यूज मैनेजमेंट और मल्टी-स्टेट हाइपरलोकल कवरेज लीडरशिप
डिजिटल होमपेज ऑप्टिमाइजेशन और रियल-टाइम कंटेंट स्ट्रेटेजी
लाइव इवेंट कवरेज (लोकसभा चुनाव, केंद्रीय बजट) और विश्लेषणात्मक लेखन
मल्टी-सोर्स वेरिफिकेशन, संपादकीय गुणवत्ता नियंत्रण और टीम मेंटरशिप
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
बृज भूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में कोर्ट से बरी, पूनिया ने दिया रिएक्शन

विनेश फोगाट ने बृज भूषण के बरी होने के फैसले को प्रजेंटेशनी पलटवार कहा

सुप्रीम कोर्ट ने छात्र विरोध मामलों को बंद करने की अनुमति दी, पुलिस ज्यादती की जांच के लिए नए तंत्र की विचार

तृतीय अनुसूची खातों को खोलने की अनुमति देने से पहले सुनिश्चित करें: सुप्रीम कोर्ट ने ईडी का मुद्दा उठाया

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: राज्यों को मिली आपराधिक मामले वापस लेने की स्वतंत्रता

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय नाविक की तलाश के लिए राजनयिक माध्यमों का उपयोग करने का निर्देश दिया

दिल्ली उच्च न्यायालय ने जमानत देने से इनकार किया, पूर्व आप विधायक नरेश बाल्यान को मकोका मामले में फंसा

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: यौनकर्मियों के अधिकारों की रक्षा, लेकिन नौकरशाही व्यवहार पर सवाल
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा याचिका पर एक सप्ताह में फैसला करें
- सेवा कर की मांग को सही ठहराने के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का एक सप्ताह
- सुप्रीम कोर्ट की हर याचिका के पीछे एक प्रतीक्षा का खेल है
- सुप्रीम कोर्ट ने वृंदा करात की रिव्यू पिटीशन खारिज की, भड़काऊ भाषण पर दोनों नेताओं को क्लीन चिट
- सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर-प्रवेश वर्मा की पुनर्विचार याचिका खारिज की, कोर्ट ने कहा- ऐसी बात कहने से कोई अपराध नहीं।
- यौन शोषण मामले में फैसला सुनने के बाद भूपिंदर सिंह हुड्डा के खिलाफ आरोप लगाए
- डॉक्सिंग क्राइम: क्या है यह और भारतीय कानून में इसके लिए क्या सजा है?
- समान नागरिकता कानून देशभर में जल्द लागू होगा, बंगाल में पीछे नहीं हटेंगे बीजेपी

